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Archive for the ‘एतद् देश प्रसूतस्य शकासाद् अग्रजन्मन :’ Category


मनुस्मृति एक ग्रन्थ के रूप में दलितों और महिलाओं के लिए एक अमानवीय दर्शन का वाहक है। मनुस्मृति में शूद्रों/अछूतों व महिलाओं को पशुओ की श्रेणी में रखा गया है। उनके अधिकारों का हनन किया गया है आरएसएस भी दलितों और महिलाओं के प्रति वैसे ही अमानवीय विचार रखता है।
हिन्दू दक्षिणपंथी मनुस्मृति को भारतीय संविधान के स्थान पर लागू करना चाहता है। मनुस्मृति इनके लिए कितना पवित्र है, पर हिंदुत्व के दार्शनिक तथा पथ प्रदर्शक वी.डी सावरकर और आरएसएस के निम्नलिखित कथनों से अच्छी तरह स्पष्ट हो जाता है। सावरकर के अनुसार:
मनुस्मृति एक ऐसा धर्मग्रन्थ है जो हमारे हिन्दू राष्ट्र के लिए वेदों के बाद सर्वाधिक पूजनीय है और जो प्राचीन काल से ही हमारी संस्कृति रीति-रिवाज, विचार तथा आचरण का आधार हो गया है। सदियों से इस पुस्तक ने हमारे राष्ट्र के अध्यात्मिक एवं दैविक अभियान को संहिताबद्ध किया है। आज भी करोड़ो हिन्दू अपने जीवन तथा आचरण में जिन नियमो का पालन करते हें, वे मनुस्मृति पर आधारित है। आज मनुस्मृति हिन्दू विधि है।

-आरएसएस को पहचानें किताब से साभार

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अहिंसा परमो धर्म:

आरएसएस किसका पक्षधर ? हिटलर का ? देश विरोधी संगठनो का…?? (अंतिम भाग)

स्वतंत्रता के बाद गोलवलकर ने अपने एक लेख ‘आंतरिक संकट’ में राष्ट्र के तीन दुश्मन गिनवाए जिनमें नंबर एक पर मुसलमानों, नंबर दो पर ईसाईयों, और नंबर तीन पर कम्युनिस्टों को रखा है। मुसलमानों के बारे में अपने फासीवादी विचार प्रकट करते हुए गोलवलकर ने लिखा है कि:
संसार में अनेको देशों के इतिहास का यह दुखद सबक रहा है कि राष्ट्र की सुरक्षा को बाहरी आक्रान्ताओं की अपेक्षा आंतरिक विरोधी तत्व अधिक बड़ा संकट उपस्थित करते हें। दुर्भाग्यवश, जब से अंग्रेजों ने इस देश को छोड़ा है, हमारे देश में राष्ट्र की सुरक्षा का यह प्रथम पथ सतत अपेक्षित रहा है। आजतक यह कहने वाले अनेको लोग मौजूद हैं कि अब मुस्लमान समस्या बिलकुल नहीं रही है। पाकिस्तान को प्रश्रय देने वाले वह सब दंगाई तत्व सदा के लिए चले गए हैं। शेष मुसलमान हमारे देश के भक्त हैं। इस प्रकार के विश्वास के धोखे में रहना आत्मघाती होगा। इसके विपरीत पाकिस्तान के निर्माण से यह मुस्लिम विभीषिका सैकड़ों गुना बढ़ गयी है, जिसका निर्माण ही हमारे देश पर भावी आक्रमण की योजनाओ के आधार रूप में हुआ है।
गोलवलकर का निष्कर्ष यह है कि:
प्राय: हर स्थान में ऐसे मुसलमान हैं जो ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान से सतत संपर्क स्थापित किये हैं और अल्प संख्यक होने के नाते, सामान्य नागरिक के ही नहीं अपितु कुछ विशेष अधिकारों तथा विशेष अनुग्रहों का भी उपभोग करते हैं काम से काम अब हम जागें, चारो पर देखें, और बड़े-बड़े प्रमुख मुसलमानों के भी शब्द तथा कृतियों के सही तात्पर्य को समझें उनके अपने ही वक्तव्यों ने आज तथाकथित ‘राष्ट्रीय मुसलमानों’ के महानतम व्यक्तियों को भी उनके सच्चे नग्न रूप में प्रकट कर दिया है। आज भी मुस्लमान चाहे वह सरकारी उच्च पदों पर हों अथवा उसके बहार हों घोर अराष्ट्रीय सम्मेलनों में खुले रूप से भाग लेते हैं। उनके भाषणों में भी खुली अवज्ञा और विद्रोह की झंकार रहती है’
ईसाई नागरिकों के बारे में गोलवलकर का कहना है:
जहाँ तक ईसाईयों का सम्बन्ध है, उपरी तौर से देखने वाले को तो वे नितांत, निरुपद्रवी ही नहीं वरन मानवता के लिए प्रेम एवं सहानभूति के मूर्तिमान स्वरूप प्रतीत होते हैं। इसकी गतिविधियाँ केवल अधार्मिक ही नहीं, राष्ट्रविरोधी भी हैं।
इसी विषय में गोलवलकर आगे यह भी कहते हैं:
इस प्रकार की भूमिका है हमारे देश में निवास करने वाले ईसाई सज्जनों की। वह यहाँ हमारे जीवन के धार्मिक एवं सामाजिक तन्तुवों को ही नष्ट करने के लिए प्रयत्नशील नहीं हैं, वरन विविध क्षेत्रों में और यदि संभव हो तो सम्पूर्ण देश में राजनीतिक सत्ता भी स्थापित करना चाहते हैं।

आजाद भारत में जो व्यक्ति या संगठन देश के नागरिकों के बारे में इस तरह का जहर उगलता है वह केवल देश को तोड़ने वालों की ही मदद कर रहा होता है।

आरएसएस को पहचानें किताब से साभार

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असली देशभक्त ?

देश की सुरक्षा और अखंडता के बारे में आरएसएस बहुत चिंता प्रकट करता है। इसके लिए वह शिविर, महा शिविर आयोजित करता है और जन संपर्क अभियान चलता है। आरएसएस के अनुसार हमारे देश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस.आई का एक पूरा जाल फैला हुआ है। जाहिर है आई.एस.आई हमारे देश में आपसी झगड़ों को हवा देकर गृह युद्ध जैसी स्तिथि पैदा करना चाहता है ताकि पूरा देश टुकडे-टुकडे हो जाए। पर आरएसएस स्वयं इस चुनौती का सामना करने के लिए क्या कर रहा है ये जानकर किसी का भी दिल दहल सकता है।
अगर देश को विखंडित करने का सपना संजोये आई.एस.आई यह चाहता है कि इस देश के लोग धर्म के नाम पर लड़ें ताकि उसको अपनी रोटियाँ सेकनें का मौका मिल सके तो आरएसएस बिलकुल इसी काम में जुटा है। आरएसएस से यह पूछा जाना चाहिए की क्या उसने 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराकर सारे देश की साम्प्रदायिकता की आग में नहीं झोका ? क्या ऐसा करके इसने आई.एस.आई जैसे देश विरोधी संगठनो के प्यान्दो की भूमिका नहीं निभाई ? देश के अल्प-संख्यकों के बारे में आरएसएस जो जहर फैलाता रहा है और फैला रहा है उसके चलते सबसे ज्यादा प्रसन्न केवल आई एस आई जैसे भारत दुश्मन संगठन ही हो सकते हें। आरएसएस किस तरह इस देश के विभिन सम्प्रदायों को लड़वाने में लगा है इसका अनुमान गोलवलकर के निम्नलिखित वक्तव्यों से अच्छी तरह लगाया जा सकता है।
गोलवलकर द्वारा 1939 में छपवाई गयी किताब वी आर अवर नेशनहुड डीफाइन्ड में हिटलर द्वारा प्रतिपादित नाजी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को महिमामंडित किया गया है। साथ ही इस देश के अल्पसंख्यकों के बारे में जो योजना बताई गयी है, वह इस देश का विखंडन चाह रहे किसी भी संगठन को प्रिय लगेगी।

आरएसएस को पहचानें किताब से साभार

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रत्येक मसले पर गिरगिट की तरह से रंग बदलने का आदि रहा है। महात्मा गाँधी की हत्या भी की और जब जरूरत होती है तो कहतें हैं कि गाँधी हत्या से संघ का कोई सम्बन्ध नहीं है। संघ को जब हिन्दू भावनाओ को उग्र कर लाभ उठाना होता है तो मस्जिद तोड़ी कहते हैं और जब मस्जिद तोड़ने की बात स्वीकार करने की बात आती है तो हमारा उससे कोई लेना देना नहीं है कहते हैं। संघ के पूर्व प्रमुख के.एस सुदर्शन ने संघी धरने पर बैठ कर श्रीमती सोनिया गाँधी को सी .आई .ए एजेंट तथा कई घटना व दुर्घटनाओ को हत्या का रूप देने के लिए जिम्मेदार ठहराया और जैसे ही मामले ने तूल पकड़ा वैसे ही संघ ने कहा कि के.एस सुदर्शन के बयान से उनका कोई मतलब नहीं। भारतीय जनता पार्टी ने भी के.एस सुदर्शन से अपना पल्ला झाड़ लिया। सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग व्यक्तियों की चरित्र हत्या करने के आदि हैं। जिस बात को के.एस सुदर्शन ने अब कहा है उसी बात को संघ के लोग नियोजित तरीके से प्रचार-प्रसार में लगे हुए थे। जिसके सबूत चिट्ठाजगत पर भी मौजूद हैं।
सोची समझी रणनीति के तहत के.एस सुदर्शन ने सोनिया गाँधी के सम्बन्ध में बयान दिया क्योंकि संघ के आतंकी प्रकोष्ट के कई नेता कारागारों में जा चुके हैं और कुछ लोग जाने की तैयारी में हैं। अपनी आतंकी कार्यवाइयों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए पूरे देश में संघियों ने धरना दिया जो फ्लॉप शो साबित हुआ और उसी रणनीति के तहत के.एस सुदर्शन ने अपना बयान सोनिया गाँधी के सम्बन्ध में जारी किया जिसकी तैयारी कई वर्षों से संघ कर रहा था।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ चरित्र हत्या से लेकर हिटलर के प्रधानमंत्री गोविल्स के अनुरूप एक झूठ को सच साबित करने के लिए हजार बार दोहराता है जिससे लोग उसको सच समझने लगें। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के बाद अमेरिकन साम्राज्यवाद में सम्पूर्ण निष्ठा रखने वाले संघ के लोग जब किसी को सी.आई.ए एजेंट कहेंगे तो मानिये कि सी.आई.ए के नजदीक कौन है ?
धरने के माध्यम से संघ के लोगों ने हिन्दू धर्म प्रतीक चिन्हों का इस्तेमाल किया जबकि संघ का हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है। संघ का मुख्य उद्देश्य यह है कि हिन्दू भावनाओ को उग्र बना कर देश की राजसत्ता हासिल करना है और संघियों का मुखौटा राजनीतिक दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी है। भ्रष्टाचार के मामले में घोटालों के मामले में सेक्स स्कैंडल के मामलों में इनके नेता किसी से काम नहीं हैं। बार-बार एक ही विषय से रंग बदलने से गिरगिट भी शरमा जाता है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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