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केतकी गडकरी : एक हज़ार करोड़ रुपये में विवाह

पीएम ने रैली में पूछा कि गरीबों के हक के लिए लड़ना क्या गुनाह है? मैं आपके लिए लड़ रहा हूं। मेरा क्या कर लेंगे ये लोग? मैं फकीर हूं, झोला लेकर निकल लूंगा। अगर गरीब के हाथ में ताकत आ जाए तो गरीबी कल खत्म हो जाएगी। इरादे नेक हैं, तो देश कुछ भी सहने को तैयार को जाता है, ये मैंने महसूस किया है। आज सवा सौ करोड़ के देश ने जिम्मेदारी को अपने कंधे पर ले लिया है। देश भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहता है।
दस लाख रुपये का सूट पहनने वाला सत्तर करोड़ रुपये के काजू खाने वाला किस तरह से अपने मुंह से अपने को फ़कीर घोषित कर रहा है. इन बगुला भगतों ने अपने शब्दकोष से शर्म नाम के शब्द को हटा दिया है. मोदी कि इसी रैली के पहले  यूपी पुलिस ने 2000 रुपए के नए नोटों से भरी भा ज पा कि एक गाड़ी पकड़ी है। उस गाड़ी में 2000 की नई करेंसी के 95 लाख रुपए मिले थे । गाड़ी को जब्त कर लिया है।करोड़ों रुपये विदेश यात्राओं पर खर्च कर नोटबंदी लागू कर चुका है. बैंक की लइनों में लगे हुए लोगों में से 200 लोग मर चुके हैं. हद तो यहाँ तक हो चुकी है कि पैसा निकालने कि लाइन में लगे-लगे ही बच्चा पैदा हो चुका है.
प्रधानमंत्री शादी ब्याह में ढाई लाख रुपये बैंक से निकालने कि अनुमति देते हैं और इतनी शर्तें लगा देते हैं कि ढाई लाख रुपये बैंक से निकलने भी न पाए. वहीँ, खनन करोबारी और भाजपा के पूर्व मंत्री बी जनार्दन रेड्डी की बेटी ब्रह्माणी की 16 नवंबर को बंगलुरू में भव्य शादी हुई थी.  यह विवाह समारोह पांच दिन का था.

                अब मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी के पुत्री केतकी के विवाह में 50 चार्टर्ड प्लेन, 10000 लोगों के फाइव स्टार रुकने वा खाने कि व्यवस्था जिसमें लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च कर फकीरी ढंग से शादी की जा रही है. 3 और 4 दिसम्बर को  नागपुर के लिए किसी भी जगह से हवाई टिकट उपलब्ध नहीं हैं। अतिथियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत उनमें से ज्यादातर वीवीआईपी, मुकेश अंबानी और रतन टाटा, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, केन्द्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और उद्योगपति है. इस कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्वदेशी डांस भी होगा.
            अब प्रधानमंत्री मोदी साहब को देश को यह बताना चाहिए कि एक हज़ार करोड़ रुपये में खर्च होने वाले नोट नए नोट हैं या पुराने नोट हैं. काला धन है या सफ़ेद धन है. मोदी का मंत्रिमंडल सफ़ेद झूठ बोलने वालों का मंत्रिमंडल है यहाँ सभी झूंठ पर झूंठ बोलने के आदी हैं. शर्म तो आनी ही नही है. नाक  कटवाओ – स्वर्ग मिलेगा की नीति के तहत जनता को नोट बंदी के सवाल के ऊपर समझाया जा रहा है.
सुमन

तंजीम-ए-इन्साफ के महासचिव अमीक जामेई वा समाजवादी चिन्तक फ्रैंक हुजुर
बाराबंकी। मोदी की नोटबंदी नीति के कारण लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं. खेती चैपट हो चुकी है, व्यापार ठप है. वहीँ, लाखों करोड़ रुपये की कर्ज माफी मोदी सरकार के नियंत्रक कॉर्पोरेट सेक्टर को दी जा चुकी है। सैकड़ों लोग विमुद्रीकरण के कारण मर चुके हैं। लगभग 50 लाख लोगों कि शादियाँ अधर में हैं. काले धन से पांच सौ करोड़ रुपये की शादी हो रही है। दूसरी तरफ आम जनता अपने ही रुपयों में से 2.5 लाख रुपये बैंक से निकालने में असमर्थ है।
                       गाँधी भवन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए तंजीम-ए-इन्साफ नई दिल्ली के महासचिव अमीक जामेई व समाजवादी चिन्तक फ्रैंक हुजूर ने कहा कि मोदी सरकार विमुद्रीकरण या नोटबंदी कार्यक्रम से यह प्रचारित किया जा रहा है है कि इससे आतंकवाद या माओवादियों को रुपये सप्लाई कार्य रुक जायेगा। यह बात भी मोदी सरकार की हवा हवाई है। यह बात उसी तरीके से है कि अमीर लोगों की नींद हराम हो चुकी है और काला धन बरामद किया जा रहा है। वास्तविकता यह है कि आम आदमी अपने ही रुपयों को निकालने के लिए तीन-तीन दिन तक बैंक की लइनों में लगा रहा है और खाने-पीने के लिए तंगी का सामना किया. इसके विपरीत पेट्रोल पंप मालिकों, बिग बाजार को फायदा पहुँचाया गया। सरकार यह बताने में पूर्णतया असमर्थ है कि कितना काला धन अभी तक वह बरामद कर पायी है। प्रधानमंत्री संसद का सामना करने से मुंह चुरा रहे हैं। अब तक 14 दिनों में मोदीजी ने किसी नेता के यहां छापा मारकर एक लाख के अमान्य नोट तक नहीं पकड़े हैं, आयकर विभाग ने 91 लाख के नोट महाराष्ट्र के भाजपा विधायक और मंत्री की कार से पकड़े हैं।
इनका नोट बंदी अभियान चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के संस्थापक तथा चीन के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक जैक मा को लाभ पहुँचाना हैं। पेटीएम प्रचार अभियान उसी का हिस्सा है। एक तरफ चीन के खिलाफ युद्ध का माहौल बनाया जाता है और दूसरी तरफ चीन को फायदा पहुंचाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है।
दोनों नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार अगर वास्तव में भ्रष्टाचार को समाप्त करने तथा काला धन बरामद करना चाहती है तो  कॉर्पोरेट सेक्टर के यहाँ छापे डाले तथा बकायेदारों का कर्ज माफ करने के बजाये उनसे वसूली अभियान तेज करे।
तंजीम-ए-इन्साफ जनता कि मदद के लिए तथा देश को दिवालिया करने के खिलाफ मोदी सरकार कि नीतियों को आम जनता तक ले जाएगी. उसी कड़ी में यह संवाददाता सम्मलेन भी किया जा रहा है।

बाराबंकी। नोटबंदी के नाम देश का कालाधन निकालने की मोदी सरकार की योजना एक बड़ा छलावा है। मोदी जी यदि अगले चन्द वर्ष तक इसी तरह मनमाने रवैये देशहित व समाज हित को त्याग कर लेते रहे तो देश के सामने गम्भीर आर्थिक परिणाम खड़े हो जायेगें।     लोक संघर्ष पत्रिका के सलाहकार डा0 उमेश चन्द्र वर्मा की दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए गांधी भवन में आयोजित एक शोक सभा में उपस्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सह सचिव अरविन्द राजस्वरूप अपने उक्त विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि देश इस समय जबरदस्त सामाजिक प्रक्रियाओं के दौर से गुजर रहा है जिनकी रफ्तार सुस्त अवश्य होती है। लेकिन निश्चित रूप से निर्णायक स्थिति तक पहुँचती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वर्तमान हालात से कतई निराश न हो और साम्राज्यवादी शक्तियों के विरूद्ध एक जुट होकर संघर्ष करें। एक न एक दिन वह सुबह जरूर आयेगी। मोदी जी के नोट बन्दी ऐलान को उन्होंने अपने चन्द उद्योगपति मित्रों को आर्थिक रूप से और सम्पन्न बनाने की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि मोदी अब छोटे व्यवसायियों के हितों के संरक्षक नहीं है बल्कि उन 35 बड़े पूंजीपतियों के संरक्षक बन गये है जिन्होंने राष्ट्रीय बैंको को अस्सी हजार करोड़ रूपये लोन नहीं लौटाया है। कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि साम्राज्यवादी विचारधारा का मुकाबला केवल साम्यवादी विचारधारा कर सकती है।
देश के प्रसिद्ध ब्लागर रवीन्द्र प्रभात ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज देश व समाज एक खोखले व्यक्ति के ऊपर केन्द्रित होकर रह गया है जो ऐसे निर्णय ले रहा है जो देश व समाज के लिए अहितकारी है।
प्रसिद्ध समाजवादी विचारक राजनाथ शर्मा ने कहा कि देश में वैचारिक शून्यता आ गयी है। इसी के कारण हमारा समाज व राजनीति दिशाहीन हो चली है और खुदरा नेताओं की उत्पत्ति हो रही है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने शोक सभा में डा0 उमेश चन्द्र वर्मा को अपनी श्रृद्धाजंलि अर्पित करते हुए कहा कि उनको सच्ची श्रृद्धाजंलि हम तभी दे सकते है जो देश में गोडसेवाद को कमजोर करे। उन्होंने मोदी द्वारा नये पूँजीपति घरानो को बढ़ावा देना देश के लिए घातक बताया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव फवाद किदवाई ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में निष्पक्ष एवं निर्भीक मीडिया की अति आवश्यकता है। कारर्पोरेट मीडिया देश व समाज के लिए हितकारी नहीं है।
शोक सभा की अध्यक्षता बृजमोहन वर्मा तथा तारिक खान के संचालन में आयोजित शोक सभा के अन्त में स्वर्गीय डा0 उमेश चन्द्र वर्मा के सुपुत्र संजय कृष्ण मोहन वर्मा ने उपस्थितजन के प्रति आभार व्यक्त किया।
शोक सभा में श्रृद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रबन्ध सम्पादक लोक संघर्ष पत्रिका के रणधीर सिंह सुमन, इं0 विनय श्रीवास्तव, डा0 जसवन्त सिंह, डा0 कौसर हुसैन, कदीर खान, हनोमान प्रसाद, मनोहर लाल वर्मा, श्याम बिहारी वर्मा, कौशल किशोर त्रिपाठी, मोहम्मद वसीम राईन आदि शामिल रहे।
इस अवसर पर मुनेश्वर वर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह, सरदार भूपेन्द्र सिंह, नीरज वर्मा, रामनरेश, गिरीश चन्द्र, मास्टर अतीकुर्रहमान, मिर्जा कसीम बेग, सत्येन्द्र यादव, विनय दास, गिरीश चन्द्र, रामलखन वर्मा, अवधेश आदि उपस्थित थे।
भारतीय रिज़र्व बैंक जनता को दो हज़ार रुपये का नोट दे रहा है किन्तु जब आज बैंक ऑफ़ बरौदा की बाराबंकी शाखा में दो हज़ार रुपये का नोट खाते ज़मा करने से मना कर दिया. वहीँ, बैंक अधिकारीयों ने यह भी कहा कि सौ रुपये का भी नोट नहीं ज़मा किया जायेगा. यह नई गाइडलाइन्स अम्बानी के बहनोई उर्जित पटेल अर्थात रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया गवर्नर साहब का है. मोदी सरकार जितना लिखित कानून है उससे कहीं ज्यादा मौखिक कानून जारी कर रही है और मौखिक आदेश में कोई न कोई जालसाजी छिपी हुई है.
                मोदी सरकार जनता को रंग छूटने वाला दो हज़ार रुपये का नोट दे रही है और जब बैंक में पुन: नहीं ज़मा हो पा रहा है तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए. कहीं यह ठगी का नया गुजराती तरीका निकाला गया है. अभी तक जानकारी के अनुसार कोई रुपया अगर सरकार जारी करती है तो वह रुपया बैंक और सरकार स्वयं भी लेगी लेकिन झूठों की सरकार है, बागों में बहार है.
सुमन

भारतीय लोकतंत्र में वेटिंग प्रधानमंत्री ने चुनाव को  संचालित करने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये चुनाव में  कॉर्पोरेट सेक्टर से लिए थे. उसकी अदायगी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने सात हज़ार सोलह करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाल कर माफ़ कर दिया है. दूसरी तरफ विमुद्रीकरण कर गरीब, मजदूर, किसान के यहाँ काला धन ढूँढा जा रहा है. अब तक 36 लोग मर चुके हैं और हजारों लोग रुपया होते हुए भी नरेन्द्र दामोदर मोदी की सनक के कारण इलाज न पाने के कारण मर चुके हैं जबकि कर्नाटक भाजपा के पूर्व नेता और मंत्री रहे जनार्दन रेड्डी अपनी बेटी की शादी करने जा रहे हैं जिसमें 500 करोड़ रुपए का खर्च कर रहे हैं और यह रुपया कहाँ आ रहा है और विमुद्रीकरण के कारण यह 24 हज़ार रुपये से ज्यादा एक हफ्ते में कैसे निकाल लेंगे यह प्रश्नचिन्ह है और मोदी साहब को यह सब नहीं दिखाई दे रहा है.
एसबीआई ने जून 2016 तक 48,000 करोड़ रुपये उद्योगपतियों को माफ़ कर दिया है. जिन कर्जों को माफ़ किया गया है उनकी सूची में 1,201 करोड़ रुपये के कर्ज के साथ किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या का नाम सबसे ऊपर है. इसके बाद केएस ऑयल (596 करोड़) सूर्या फॉर्मास्यूटिकल्स (526 करोड़), जीईटी पॉवर (400 करोड़) और एसएआई इंफो सिस्टम (376 करोड़) का नाम है.
         प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी देश के प्रधान सेवक नहीं हैं. यह जिन लोगों के सेवक हैं उनको लाखों-लाख करोड़ रुपये का फायदा पहुंचा रहे हैं. दूसरी तरफ 10 नवम्बर से पूरे देश की आम जनता के 80 प्रतिशत लोगों को विभिन्न बैंकों के  सामने रोटी खाने के लिए रुपया निकालने के लिए लाइन में खड़ा कर रखा है. विमुद्रीकरण के बहाने उद्योग जगत के मालिकों को फायदा पहुँचाया जा रहा है. वहीँ, छोटे व्यापारियों को भी रोजी रोटी से महरूम किया जा रहा है. मालिकों का जिस तरह से भी फायदा होना है. प्रधान सेवक को उसी हिसाब से कार्य करना है. भारतीय जनता के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है. इसके बाद साम्राज्यवाद को फायदा देने के लिए उनके हथियारों को खरीदने के लिए काल्पनिक युद्ध की तैयारियां चल रही हैं जो किसी समय प्रारंभ हो सकती हैं. युद्ध का छद्म वातावरण नरसंहारी योजना का एक हिस्सा है. क्रूर शासक हमेशा जनता का नरसंहार कराता रहता है. हमारा देश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. लोकतंत्र खतरे में है.न्यायपालिका को पंगु बनाने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्तियां बंद कर दी गयी हैं.
सुमन

प्रधानमंत्री ने कहा, ’’मेरे बचपन में लोग कहते थे कि मोदी जी जरा चाय कड़क बनाना। मुझे तो बचपन से आदत है। मैंने निर्णय कड़क लिया। गरीब को कड़क चाय भाती है लेकिन अमीर का मुंह बिगड़ जाता है।’’ गाजीपुर की सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री की यह भाषा थी. वह भूल गए कि अभी 2014 के लोकसभा चुनाव में वह 15 हज़ार करोड़ रुपये कॉर्पोरेट सेक्टर से काले धन को प्राप्त कर सत्तारूढ़ हुए थे. प्रधानमंत्री बड़ी ख़ूबसूरती से अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए देशभक्ति और आतंकवाद से हर मुद्दे को जोड़ने का काम करते हैं. एक हजार व पांच सौ के नोट विमुद्रीकरण का मामला भी उन्होंने आतंकवाद और देशभक्ति से जोड़ दिया है. 85 % बड़े नोटों को वापस ले लेने के बाद राष्ट्रीयकृत बैंकों में जनता इन रुपयों को अपने खातों में जमा कर रही है. यह रुपया सेविंग अकाउंट में जितना जमा होगा उसके ऊपर बैंकों को जमाकर्ताओं को ब्याज देना पड़ेगा. जो एक भारी भरकम राशि होगी. बैंक की व्यवस्था यह होती है की जनता उसमें पैसा जमा करे और कम ब्याज प्राप्त करे. दूसरी तरफ बैंक बढ़ी दरों पर लोगों को कर्जा दें और वह कर्जा मय ब्याज के वापस हो. बैंक स्वस्थ रहेंगे. मोदी साहब के इस कार्यक्रम से बैंक रुपये बदलने के साथ-साथ अपने वहां जमा कराने का जो कार्यक्रम चल रहा है. उससे बैंक की पूरी की पूरी व्यवस्था नष्ट हो जाएगी और वह दिवालियेपन की और बढ़ेंगे. उपलब्ध आकंड़ों के अनुसार चार लाख करोड़ रुपया सरकारी बैंकों का एनपीए है. वसूली के लिए  द इंर्फोसमेंट ऑफ सिक्यूरिटी इंटेरेस्ट एंड रिकवरी ऑफ डेट्स लॉज एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स (संशोधन) विधेयक, 2016 भी पारित हुआ किन्तु  मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिजर्व बैंक से कहा है कि बैंक कर्ज नहीं चुकाने वाली कंपनियों की पूरी सूची उसे सीलबंद लिफाफे में उपलब्ध कराई जाए। इस मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही इस पीठ में मुख्य न्यायधीश के अलावा न्यायमूर्ति यूयू ललित और आर भानुमति भी शामिल हैं। पीठ ने जानना चाहा है कि बैंक और वित्तीय संस्थानों ने किस प्रकार से उचित दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना इतनी बड़ी राशि कर्ज में दी और क्या इस राशि को वसूलने के लिए उपयुक्त प्रणाली बनी हुई है?
वहीँ, मोदी सरकार कंपनियों को दिया गया करीब 40,000 करोड़ रुपये का ऋण 2015 में बट्टे खाते में डाल कर अपनी स्वामी भक्ति का परिचय दिया है. मोदी साहब जिन कॉर्पोरेट सेक्टर के चंदे से या मदद से प्रधानमन्त्री बने हैं, वह हक़ अदा कर रहे हैं. जनता से उनका कोई लेना देना नहीं है. उनके इस निर्णयों से हज़ारों लोग मर चुके हैं और अगर बैंक डूब जायेंगे तो एक ही समय में रोयेंगे भी और हसेंगे भी.
देश को दिवालिया करने के बाद मोदी साहब जो उनसे सवाल पूछेगा उसे देश द्रोही घोषित कर देंगे क्यूंकि उनकी जिम्मेदारी संविधान के प्रति नहीं है. उनका विश्वास लोकतंत्र में नहीं है, वह हिटलर की समस्त नक़ल करते हैं.
वहीँ, आज श्री वी एम प्रसाद ने श्री पंकज चतुर्वेदी की एक कविता भेजी है. जिसमें देशभक्ति देश को मोदी के अनुसार परिभाषित किया गया है. नयी परिभाषाएं देखिये यही सही है.
तुम्हारी मेहरबानी: पंकज चतुर्वेदी
कॉर्पोरेट घरानों का
अरबों रुपये क़र्ज़
माफ़ करने से
जो बैंक औंधे मुँह गिरे
उन्हें नग़दी के
भारी संकट से
उबारने के लिए
तुमने दो सामान्य नोट
अचानक चलन से बाहर किये
और समूचे अवाम को
मुसीबत में डाल दिया
यों छोटे कारोबारियों, बिचौलियों
और जालसाज़ों से
जो हासिल होगा
काले धन का
कुछ हिस्सा
वह उस घाटे की
भरपाई के लिए
जो कॉर्पोरेट घरानों पर
तुम्हारी मेहरबानी का
नतीजा है
और जब कोई पूछता है :
यह अराजकता, तकलीफ़
और अपमान
हम किसके लिए सहते हैं
तो तुम कहते हो :
देश के लिए
जबकि सच यह है
कि पूँजीपतियों का सुख
और जनता का दुख
जिस कारख़ाने में
तुम बनाते हो
उसका नाम तुमने
देशभक्ति रखा है !

सुमन
लो क सं घ र्ष !

मोदी ने अपने मुंह से अपनी पीठ थपथपाते हुए एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए 500 और 1000 रुपये के नोट का विमुद्रीकरण कर प्रचलन से वापस ले लिया और कहा कि काला धन हम वापस ला रहे हैं. वहीँ, दूसरी तरफ 22 अक्टूबर को मोदी ने वडोदरा में सभा संबोधित करते हुए उद्योगपतियों, काला धन के व्यापारियों को संकेत दे दिया था कि सरकार 500 और 1000 के नोट बंद करने जा रही है और 26 अक्टूबर 2016 को दैनिक जागरण अखबार ने इन नोटों के प्रचालन पर रोक लगाने की बात को प्रकाशित किया था. इसके अतिरिक्त काला धन के व्यापारियों को सरकार इस कदम उठाने की विधिवत सूचना थी और उन लोगों ने पहले से अपने धन को काले से सफ़ेद करने की व्यवस्था कर ली थी. दूसरा तर्क यह भी दिया गया कि फर्जी नोटों का चलन रोकने के लिए यह ज़रूरी था. मोदी जी को यह बात भली भांति मालूम है कि एटीएम ही फर्जी नोटों का प्रचार व प्रसार करते हैं और जब दो हज़ार रुपये के नोट आप जारी कर रहे हो तो आप काला धन इकठ्ठा करने वालों को विशेष सुविधा दे रहे हो. आप की नियत अगर साफ़ होती तो आप 2000 और 500 का नोट पुन: नहीं जारी करते. आपकी मंशा गलत है. आपको उद्योगपतियों और बड़े आदमियों को फायदा पहुंचाने की आपकी नीति है. क्या यह बात सही नहीं है कि बैंक अधिकारीयों ने नियोजित तरीके से सौ रुपये के नोट जनता में देने बंद कर दिए थे और एटीएम तक में जो सौ रुपये तक के नोट जारी होते थे वह बंद कर दिए थे और गरीब जनता – साधारण लोगों के पास 1000-500 के नोट पहुँच गए तब आपने उसका प्रचलन बंद कर दिया. एक 500 रुपये का नोट बदलने के लिए पूरा दिन आदमी बैंक के सामने लाइन में लगना पड़ रहा है. क्या यह बात आप नहीं जानते थे. हज़ारों लोग रुपया होने के बावजूद मर गए, लाखों लोग जेब में रुपया होने के बाद भी उनको भूखों रहना पड़ा. एक हज़ार रुपये की नोट 600 रुपये में लोगों को बेचनी पड़ रही है. 500 रुपये की नोट 250 से 300 में बिक रही है. आपके मंत्रिमंडल के कितने सदस्यों ने किसी बैंक के सामने खड़े होकर अपने रुपयों का विनिमय कराया है. आपकी नरभक्षी सोच ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है. लोगों को ठगने के लिए आपकी घोषणा करने से पहले तक 1000 और 500 रुपये के नोट एटीएम जनता को देता रहा. यह आपकी ठगी है या नहीं.
यह उदारहण गुवाहाटी के कुमारपारा इलाके के एक निवासी दीनबंधु ने अपनी बेटी की शादी के लिए मंगलवार को जमीन बेचकर यह धनराशि घर में रख ली थी लेकिन रात को 500 और 1000 के नोटों के चलन पर रोक की खबर सुनकर बेहोश हो गया। उसने उसी रात कई एटीएम में पैसे जमा कराने की कोशिश की लेकिन विफल रहा। वहीँ, दीनबंधु के परिवार के सदस्यों के अनुसार वह बहुत परेशान था और रात को बिना कुछ खाये सो गया। जब सुबह वह शौचालय के लिए जाने लगा तभी दिल का दौरा पड़ गया तथा मौके पर ही उसकी मौत हो गयी.
इसी प्रकार बडे नोटों के बंद होने की घोषणा के बाद शिवसागर जिले के जीतू रहमान को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। रहमान ने अपने भाई की शादी के लिए विभिन्न स्रोतों से तीन लाख रुपये घर में जमा कर रखे थे
केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के अस्पताल में 500 व 1000 के नोट न लेने के कारण मौत हो गई…वही विदेशियों ने कसमे खाई है कि अब इंडिया नही आएगे —उनके पास उचित नोट न होने के कारण भूखा तक रहना पड़ा है
आप सभी लोग डिजिटल इंडिया की बात करते हैं और बैंकों का कम्प्यूटरीकरण कर रखा है. यह सब फर्जी बातें है बैंकों के अधिकांश शाखाओं में सर्वर नहीं काम कर रहे थे. आप ने कोई व्यवस्था नहीं कि अधिकांश बैंकों में 2 बजे रुपया समाप्त करके बैंकों ने ताला लगा दिया. कुछ बैंकों ने रुपया गिनने के नाम पर शाखाओं ने अन्दर से ताले लगा लिए.वही डाकघरों में कोई व्यवस्था ही नही की गई थी हो सकता हो ,बड़े शहरों में कुछ शाखाओ में व्यवस्था की गई हो कुल मिलाकर गरीब तबके का खून सिरिंज से निकाल कर पीने का काम आप लोग कर रहे थे. कोई व्यवस्था आपकी सही नहीं रही. सिर्फ अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने के अलावा. आपके वित्त मंत्री अरुण जेटली कह रहे थे कि आपकी इस योजना से ईमानदार लोग खुश हैं जबकि यह भी जुमला था. ईमानदार लोग आपको कोस रहे थे और बेईमान लोग खुश थे.
इनकी जान कौन वापस करेगा. लोगों को धर्म के नाम पर भड़काकर आप लोगों की जान ले रहे हैं और ठग रहे हैं. आप इस देश के अन्दर एक ठग व नरभक्षी प्रधानमंत्री के रूप में हमेशा याद किये जाते रहेंगे.
वहीँ, जारी 2000 के नोट का कागज, डिजाईन, कलर चूरन वाले नोट की तरह है और लगता है की यह कमीशन खाकर नोट तैयार किये गए हैं. देश के अन्दर इस पूरी भागदौड़ के बाद एक पैसे का भी देश को फायदा नहीं होना है और बन्दर भाग से हज़ारों लोगों की जानें चली गयी हैं और कितनी जाएँगी वह समय बताएगा.
सुमन
लो क सं घ र्ष !