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Archive for जून, 2009

बीज़ेपी और संघ परिवार के अन्य सदस्यो के सन्दर्भ में कल्पना करें की भारत जैसे विविधतापूर्ण और बहुलवादी देश में देश भक्त होने के लिए सेकुलर होने और विख्नण्ङनकारी राजनीति के त्याग की शर्त कोई जरूरी नही है क्योंकि सावरकर से लेकर गोलवलकर तक ,हिंदुत्व के सभी विचारको को हिटलर ने सदैव प्रेरित किया है । इसलिए , सिर्फ़ तर्क की खातिर , देखते है की संघ परिवार जिन हिन्दुत्ववादी ताकतों का प्रतिनिधित्व करता है, वे हिटलरी नजरिये से राष्ट्रवादी है या नही। सिर्फ़ तीन मुद्दों कश्मीर, कंधार और सीटीबीटी – पर हम विचार करेंगे । इस विचार का निष्कर्ष यह है की सबको, खासतौर से मुसलमानों को, राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट देने वाली ये ताकतें वास्तव में राष्ट्रिय हितों की सौदागर है और भारतीय जनता ने 15 वी लोकसभा के चुनाव में अडवानी एंड कंपनी को शिकस्त देकर ऐतिहासिक कार्य किया है । पहले कश्मीर। यह सर्विदित है, फिर भी संछेप में दोहराने की जरूरत है की जम्मू – कश्मीर का हिंदू महाराजा अंत तक अपनी रियासत की संप्रभुता के लिए कोशिश करता रहा, पाकिस्तानी हमले के बाद महाराजा रातोरात श्रीनगर से भागकर जम्मू पहुँचा और उस दौरान शेख अब्दुल्ला श्रीनगर में जनता के साथ खड़े रहे, शेख अब्दुल्ला की बदौलत कश्मीर का भारत में विलय हुआ और अगर महात्मा गाँधी एवं जवाहरलाल नेहरू न होते टू कश्मीर भारत में न होता । उस दौर में ”एक देश में दो विधान , दो निशान , दो प्रधान नही चलेंगे, नही चलेंगे ” का नारा लगाकर भारतीय जनसंघ ने विखंडन का बीजरोपण कर राष्ट्रिय सर्वानुमति को कमजोर किया। अब देखिये 21 वी शताब्दी में क्या हो रहा है । पकिस्तान चाहता है की कश्मीर घाटी उसे मिल जाए और भारत जम्मू-लद्दाख के इलाके ले ले । सामरिक महत्त्व के अलावा कश्मीर घाटी की अहमियत यह है की वह मुस्लिम बहुल है। अमेरिका में सक्रीय ‘कश्मीर ग्रुप’ के अमेरिकी नेट कठियारी का फार्मूला भी इसी समाधान से मिलता -जुलता है। आर.एस.एस के फोर्मुले से पकिस्तान के मनसूबे पूरे हो रहे है । जम्मू – कश्मीर के ऐसे विभाजन की मांग टू अभी तक अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस ने भी नही की है । सहज बुद्धि से समझा जा सकता है की भारत के अन्दर बने स्वायत्त मुस्लिम कश्मीर राज्य के पकिस्तान के विलय में ज्यादा वक्त नही लगेगा । निष्कर्ष यह है की भारत की अखंडता के बजाय करीब 60 लाख मुसलमानों से छुटकारा आर.एस.एस के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कंधार :24 दिसम्बर 1999 को इंडियन एयरलाइन्स की फलीते आईसी 814 के साथ हुआ हादसा एक सबूत है की संघ परिवार के लौह पुरूष वास्तव में मोम के होते है और अपनी सरकार बचाने के लिए उन्हें राष्ट्रिय हितों को ठुकराने में संकोच नही होता। यह भी की वे अपनी बुज़दिली को छुपाने के लिए बेलगाम झूठ-फरेब का सहारा लेते है।

गौरतलब है की तीन कुख्यात आतंकवादियो की रिहाई के बदले बाजपेई सरकार ने विमान यात्रियों की आजादी कंधार से हासिल की थी । इन ती३न आतंकवादियो को अपने साथ विशेष विमान में बिठाकर विदेश मंत्री जसवंत सिंह कंधार ले गए थे। अडवानी के लौह पुरूष की छवि को बनाये रखने के लिए लगातार कोई न कोई झूठ बोला जाता रहा है। नवीनतम बयान अरुण शोरी का है , जो उन्होंने लोकसभा चुनाव का दौरान दिया । बिजपी के प्रधानमंत्री पड़ के उम्मीदवार (!) की वीरोचित छवि की रक्षा के लिए शोरी ने कहा की कैबिनेट की बैठक में अडवानी ने आतंकवादियो की रिहाई का विरोध किया था। लेकिन ख़ुद अडवानी अभी तक कहते रहे है की जसवंत सिंह को कंधार भेजे जाने के बारे में उन्हें अंत तक जानकारी नही थी। वह इस आशय का बयान भी दे चुके है की आतंकवादियों को रिहा करने के फैसले से भी वह नही जुड़े थे। वह यह भी कह चुके है और सुघिन्द्र कुलकर्णी इन दिनों बार-बार इसे कह रहे है की विमान यात्रियों के बदले आतंकवादियों को रिहा करने का फैसले पर कांग्रेस समेत सभी पार्टियां सहमत थी । तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज़ फर्नाङिस के बयान का दो टूक खंडन कर चुके है । जार्ज़ का कहना है की जिस मीटिंग में फ़ैसला लिया गया, उसमें अडवानी मौजूद थे। कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला का कहना है की अडवानी ने फोनकर कश्मीर की जिलो में बंद आतंकवादियो -मसूद अजहर और मुश्ताक जरगर को रिहा करने की बात कही तो उन्होंने इसका विरोध किया ।

क्रमश :

प्रदीप कुमार
लेखक सुप्रसिद्ध पत्रकार है॥
मोबाइल:09810994447

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है राग भरा उपवन में,
मधुपों की तान निराली।
सर्वश्व समर्पण देखूं
फूलो का चुम्बन डाली॥

स्निग्ध हंसी पर जगती की,
पड़ती कुदृष्टि है ऐसी।
आवृत पूनम शशि करती,
राहू की आँखें जैसी॥

उपमानों की सुषमा सी,
सौन्दर्य मूर्त काया सी।
प्रतिमा है अब मन में
सुंदर सी,सुन्दरता सी॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

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वह मूर्तिमान छवि ऐसी,
ज्यों कवि की प्रथम व्यथा हो।
था प्रथम काव्य की कविता
प्रभु की अनकही व्यथा हो॥

निज स्वर की सुरा पिलाकर
हो मूक ,पुकारा दृग ने।
चंचल मन बेसुध आहात
ज्यों बीन सुनी हो मृग ने॥

मुस्का कर स्वप्न जगाना,
फिर स्वप्न सुंदरी बनना।
हाथो से दीप जलना
अव्यक्त रूप गुनना॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ‘राही’

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लघु स्मृति की प्राचीरों ने,
कारा निर्मित कर डाला ।
बिठला छवि रम्य अलौकिक
प्रहरी मुझको कर डाला ॥

पाटल-सुगंधी उपवन में,
ज्यों चपला चमके घन में।
वह चपल चंचला मूरत
विस्थापित है अब मन में॥

परिधान बीच सुषमा सी,
संध्या अम्बर के टुकड़े ।
छुटपुट तारों की रेखा
हो लाल-नील में जकडे॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ‘राही’

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ले प्रेम लेखनी कर में
मन मानस के पृष्ठों में।
अनुबंध लिखा था तुमने
उच्छवासो की भाषा में॥

अनुबंध ह्रदय से छवि का
है लहर तटों की भाषा।
जब दृश्य देख लेती है
तब भटकती प्रत्याशा॥

उन्मीलित नयनो में अब
छवि घूम रही है ऐसे।
भू मंडल के संग घूमे,
रवि,दिवस,प्रात तम जैसे॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

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श्रम के बलु ते भरी जाँय जहाँ गगरी -गागर ,बखरी बखरा ।
खरिहान के बीच म ऐसु लगे जस स्वर्ग जमीन प है उतरा ।
ढेबरी के उजेरे मा पंडित जी जहँ बांची रहे पतरी पन्तर।
पहिचानौ हमार है गांव उहै जहाँ द्वारे धरे छ्परी – छपरा॥

निमिया के तरे बड़वार कुआँ दरवज्जे पे बैल मुंडेरी पे लौकी।
रस गन्ना म डारा जमावा मिलै तरकारी मिली कडू तेल मा छौंकी ।
पटवारी के हाथ म खेतु बंधे परधान के हाथ म थाना व चौकी ।
बुढऊ कै मजाल कि नाही करैं जब ज्यावें का आवे बुलावे क नौकी॥
अउर पंचो! हमरे गाव के प्रेम सदभाव कै पाक झलक दे्खयो-

अजिया केरे नाम लिखाये गए संस्कार के गीत व किस्सा कहानी ।
हिलिकई मिलिकै सब साथ रहैं बस मुखिया एक पचास परानी।
हियाँ दंगा -फसाद न दयाखा कबो समुहै सुकुल समुहै किरमानी।
अठिलाये कई पाँव हुवें ठिठुकई जहाँ खैंचत गौरी गडारी से पानी॥

हियाँ दूध मा पानी परे न कबो सब खाय-मोटे बने धमधूसर ।
भुइयां है पसीना से सिंची परी अब ढूंढें न पैहो कहूं तुम उसर।
नजरें कहूँ और निशाना कहूँ मुल गाली से जात न मुसर।
मुखडा भवजाई क ऐसा लगे जस चाँद जमीन पै दुसर ॥

-अम्बरीष चन्द्र वर्मा ”अम्बर”

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मधु स्मृति के कानन वन में,
वेदना विकल रोती है।
स्नेह भरे दीपक लौ से
दुःख की कालिख घिरती है॥

परिचय की अभिलाषा में ,
लहरें तट से टकराती।
सुंदर होगा आलिंगन ,
आतुरता में बढ़ जाती॥

तुम थे तो केवल तुम थे,
या पथ था सूना-सूना।
या गंध सुमन का संगम ,
कलियों का तरपन सूना ॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

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उषा की पहली किरणे ,
नित करती स्पर्श हमारा ।
कानों में कुछ कह जाती,
ले ले कर नाम तुम्हारा ॥

वरसा मेह सुधारस का
प्रेरणा सबल हो आई।
अप्सरा उतर आई हो ,
तपसी जीवन में कोई॥

आंदोलित भावों पर छवि
निर्मम प्रहार कर बैठी।
आसक्त चकित चितवन से
जीवन का रस ले बैठी।।

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

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लोकसंघर्ष ब्लॉग का इन्टरनेट कनेक्शन टाटा इंडिकॉम कंपनी का प्लग टू सर्फ़ से चलाया जा रहा था । समय से बिल का भुगतान भी किया जा रहा था । अचानक एक हफ्ते पूर्व बाराबंकी जनपद में समस्त टाटा उपभोक्ताओ के इन्टरनेट कनेक्शन ब्लाक कर दिए है और टाटा के एजेंट उपभोक्ताओ को फ़ोन करके यह कह रहे है की भुगतान किए बिल को पुन : जमा करा दो और कनेक्शन चालू हो जाएगा दुबारा भुगतान किए गए रुपयों का आगे समायोजन कर लिया जाएगा इससे ऐसा प्रतीत होता है की टाटा इंडिकॉम कंपनी दिवालिया हो गई है और जिन उपभोक्ताओ को अपना काम टाटा के मध्यम से करना है तो उसकी अनिवार्यिता देखते हुए टाटा इंडिकॉम कंपनी ब्लैक मेल कर रही है ॥

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चितिमय निखिल चराचर की,

विभूति ,मैंने अपना ली।

अंतस के तल में मैंने

विरहा की ज्योति जला ली॥

जो अग्नि प्रज्ज़वलित कर दी,

वह शांत अश्रु करते है॥

अब आंसू के जीवन में –

हम तिरते ही रहते है।

जीवन से लगन नही है,

इति से भी मिलन नही है ॥

अब कौन लोक है मेरा ?

चिंतन का विषय नही है॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

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