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Archive for सितम्बर 6th, 2009

आजादी के बाद आज तक मिलावट करने वाले व आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कोई सक्षम कानून का निर्माण विधायिका ने नहीं किया। हद तो यहाँ तक हो गयी है कि मिलावट खोरों ने मानव रक्त में भी मिलावट कर पूरे इंसानी समाज से खेलना शुरू कर दिया है और सरकार के पास उनके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कोई सक्षम कानून नहीं है, जिससे उनको दण्डित किया जा सके। आज मिलावट खोरों के चलते अधिकांश आबादी को हृदय रोग, मधुमेह, किडनी, लीवर आदि गंभीर बीमारियाँ हो रही हैं। हड्डियों से देसी घी बनाया जा रहा है। खाद्य पदार्थों में अखाद्य चीजों की भरपूर मिलावट की जा रही हैं। इस सम्बन्ध में न तो केन्द्र सरकार और ना ही प्रदेश सरकार कोई कारगर उपाय कर रही है। चीनी, खाद्य तेल, दालें तथा कुछ सब्जियों का बफर स्टाक करके जमाखोर बड़ी पूँजी के
माध्यम से कृत्रिम अभाव पैदा कर देते हैं और मनमाने तरीके से जनता से ऊँचे दामों पर उपभोक्ता वस्तुएँ बेचते हैं। सरकार उन्हीं से संचालित हो रही है। जब वे चाहते ह,ैं आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में अपनी इच्छानुसार संशोधन करवा लेते हैं। अपमिश्रत खाद्य पदार्थो ंकी प्रयोगशालाएं भी मिलावटखोर चलने नहीं देते और वहाँ से भी इच्छित निष्कर्ष लिखवाकर वाद कायम होने की नौबत ही नहीं आने देते हैं। जरूरत इस बात की है कि बहुसंख्यक आबादी के स्वास्थ्य के साथ खिलावाड़ बन्द होना चाहिए और इसके लिए कठोर कानून की आवश्यकता है।

-मुहम्मद शुऐब
-रणधीर सिंह ‘सुमन’

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देश में एक तरफ सूखे की स्थिति दूसरी तरफ बाढ़ के हालात इस कदर बिगड़ गये हैं कि बहुसंख्यक आबादी का अपने आप में जीविकोपार्जन करना मुश्किल हो गया है। मँहगाई के चलते दाल 90 रूपये किलो तक पहुँच गयी है। आम आदमी की थाली से भोजन गायब होता जा रहा है। बाढ़ और सूखे की वजह से मुख्य उत्पादक किसान और खेत मजदूर तबाह हो रहे हैं, स्थितियाँ विकट हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा व सत्तारूढ़ दल कांग्रेस जिन्ना विवाद में उलझे हुए हैं जब पूँजीवादी संकट के चलते मेहनतकश जनता तबाह और बरबाद हो रही होती है तब ये पूँजीवादी दल इसी तरह के मुद्दे उछालकर जनता का ध्यान उनके क्रिया-कलापों की तरफ न जाये, इसी तरह की बहस छेड़ते रहते हैं। आज पूँजीवादी व्यवस्था को जनसंघर्ष के माध्यम से उखाड़ फेंकने की है और एक ऐसी व्यवस्था कायम करने की है जो टाटा बिरला और अम्बानियों से संचालित न हो क्योंकि ये इजारेदार पूँजीपति साम्राज्यवादी शक्तियों के ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं और इनका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक सम्पदाओं का दोहन कर अपने आर्थिक साम्राज्य को बढावा देना है इसके लिए यह लोग सब कुछ करने के लिए तैयार हैं। मानवीय संवेदनाओं से रहित ये पूँजीवादी विदेशों का कचरा भी लाकर इस देश में बेचकर मुनाफा कमाने से बाज नहीं आते हैं।

-मुहम्मद शुऐब
-रणधीर सिंह ‘सुमन’

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प्रसन्नता की बात है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर होने वाले प्रायोजित कार्यक्रम इस बार नहीं हुए। पूर्व वर्षों की भाँति गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कुछ एजन्सियों द्वारा कथित आतंकवादियों की पकड़-धकड़ व एनकाउन्टर जैसे कार्यक्रम नहीं हुए, इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिकन साम्राज्यवादियों व उनके सहयोगी इसराइल ने मुम्बई आतंकी घटना को अंजाम देकर देश में पहली बार अपने नेटवर्क को प्रारम्भ किया और उसके बाद केन्द्र सरकार से जो चाहते थे वे सहूलियतंे ले लीं। साम्राज्यवादियों का नज़रिया देश को अप्रत्यक्ष रूप से गुलाम बनाकर उसका हर तरीके से शोषण करना है। साम्राज्यवादियों के विकास का मुख्य आधार उपनिवेशक लूट है। जिसको वह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीके से करते हैं। पाकिस्तान, बाँग्लादेश सहित हमारे देश भारत को प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश पुर्तगाली फ्रांसीसी साम्राज्यवादियों ने कब्जा कर उपनिवेशित लूट कर अपने अपने देशों को समृद्ध बनाया था। जिसके कारण हमारे देश में बुद्धिजीवी वर्ग में गुलाम मानसिकता वाले व्यक्तियों की संख्या प्रचुर मात्रा में है जो अमेरिकन साम्राज्यवाद द्वारा किये गये हर कार्य को जायज ठहराने का प्रयत्न करते हैं उसी कड़ी मंे आतंकवाद एक मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल होता है, कुछ सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी प्रोन्नति, आर्थिक लाभ, प्रचार व अत्याधुनिक साज व सामान को प्राप्त करने के लिये बेगुनाह लोगों को आतंकवाद के नाम पर फर्जी गिरफ्तारी दिखाकर अपने शौर्य पुण्यों को बयां करते हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा समाज के प्रबुद्ध वर्ग द्वारा इस तरीके की घटनाओं की जांच से जो परिणाम आये हैं उससे उनकी कलई खुली है लेकिन उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं क्योंकि उन्हें साम्राज्यवादियों की लूट में अपना हिस्सा मिलता नजर आ रहा है।

-मुहम्मद शुऐब
-रणधीर सिंह ‘सुमन’

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