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Archive for जनवरी, 2010

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महान सेनानी मोहनदास करमचंद गाँधी की हत्या आजादी के बाद ब्रिटिश साम्राज्यवाद के पिट्ठू हिंदुत्ववादी शक्तियों ने कर दी थी। अब उन्ही शक्तियों को गाँधी की सूरत गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी में दिख रही है। गाँधी जी ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हुए शांति पूर्ण युद्ध के अद्भुद महानायक थे। गाँधी से हम सहमत हों या न हों यह दूसरी बात है लेकिन गाँधी धर्म निरपेक्षता को बनाये रखने के भी महान सेनानी भी थे। भारतीय संघ को धार्मिक रूप से एक रखने की अदभुद क्षमता थी। अंग्रेजो ने हिन्दू-मुसलमान का जो बीज अपने फायदे के लिए बोया था। गाँधी जी जबतक जिन्दा थे उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा कर उस बीज को पेड़ नहीं बनने दिया। गोडसे प्रतीक ने गाँधी का वध किया था। आज उनके अनुयायीओं को नरेंद्र मोदी में गाँधी की तस्वीर दिखती है। मोदी जी ने गुजरात के अन्दर मुस्लिम अल्पसंख्यकों का नरसंहार कराया था आज उसी व्यक्ति में अगर गाँधी की तस्वीर दिखती है तो भी वह गाँधी की दूसरी हत्या है।
गाँधी जी के तथाकथित उत्तराधिकारी अमेरिकन साम्राज्यवाद की सेवा में लगे हुए हैं। साम्राज्यवाद का मुख्य दुश्मन महात्मा गाँधी थे। अगर उनके तथाकथित उत्तराधिकारी साम्राज्यवाद की सेवा में लगे हुए हैं तो यह गाँधी के विचारों का वध नहीं है तो और क्या है ? गाँधी जी के विचार आज पूरी दुनिया में प्रासंगिक हैं अगर उनका सत्य और अहिंसा का प्रयोग उनके अनुयायी अगर अपने जीवन में उतारे होते तो निश्चित रूप से साम्राज्यवादी शक्तियों का शोषण भारतीय जनता को आत्महत्या करने को मजबूर नहीं करता।

सुमन
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सर्वश्री जमुना प्रसाद त्रिपाठी, चन्दन मिश्र, मनीष मेहरोत्रा व नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्रा

बाराबंकी में सैकड़ों साल पुराना ठाकुरद्वारा का मंदिर शहर के बीच में स्थित है ठाकुरद्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदि पुरुष गण हैं । संघ का परिचय उन्ही के नामो से शुरू होता है इन लोगो ने शहर में दंगा करने के लिए मंदिर के अग्र भाग को प्रोपर्टी ड़ीलर नौशाद आलम उर्फ़ चंदा को बेच दिया जिस पर जैसे ही मंदिर टूटना प्रारम्भ हुआ शहर में तमाम तरह की अफवाहें उड़ना शुरू हो गयीं वो तो कहिये की नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्र, जमुना प्रसाद त्रिपाठी पूर्व अध्यक्ष राज्य कर्मचारी महासंघ, चन्दन मिश्र व समाज सेवी मनीष मल्होत्रा ने स्थित को संभाला और संघ के बाराबंकी के संस्थापको में से एक सूर्य नारायण टंडन को जेल जाना पड़ा।
मंदिर का आगे का बिका हुआ खंड

संघ के लोगो ने प्राचीन मंदिर को प्रोपर्टी ड़ीलर के हाथ कुल रकबा का 60% प्रोपर्टी ड़ीलर को बेच डाला है अब सवाल यह उठता है की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का हिंदुत्व सिर्फ हिन्दू धर्म के प्रतीकों को नष्ट करना, धर्म के महान नायकों को राजनीति में उनका इस्तेमाल कर अपमानित करना है । उनका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है यह लोग हिटलर की नाजी विचारधारा से प्रेरणा लेते हैं। हिंदुत्व इनकी राजनीतिक विचारधारा है।

सुमन
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महंगाई अपनी चरम सीमा पर है। आम आदमी की आय में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। सरकार द्वारा सार्वजानिक वितरण प्रणाली उत्तर प्रदेश में ध्वस्त हो गयी है आपूर्ति विभाग के जिला पूर्ती अधिकारी से लेकर विपणन विभाग के अधिकारीयों तक केंद्र सरकार द्वारा सस्ते दामो पर उपलब्ध कराये खाद्यान को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से वितरित होता है किन्तु कई सालों से आपूर्ति विभाग के अफसर फर्जी लिखा पढ़ी करवाकर गेंहू को सीधे फ्लोर मीलों को बेच देते हैं। चावल को महंगे दामो पर खुले बाजार में बेचने का काम भी करते हैं अब जनता को सस्ते दामो पर दालें भी बेचने का काम आपूर्ति विभाग के जिम्मे किया गया है। भगवान् ही मालिक होगा आज जरूरत इस बात की है की इनके अधिकारियो और कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच हो तो 99 प्रतिशत यह लोग आर्थिक अपराधी हैं और आर्थिक अपराधियों की जगह जेल होती है लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था में भ्रष्टाचारियों को ही व्यवस्था का प्रमुख बनाया जाता है । इस तरह से कैसे मिलेगी गरीब आदमियों की रोटी इस पर एक प्रश्नवाचक चिन्ह है ।

सुमन
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फोटो साभार: google

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उत्तर प्रदेश पुलिस के आरमोरर श्री राजेश कुमार सिंह को उनके साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया उनके पास से सौ कारतूस 9 एमएम, ए.के 47 के 49 कारतूस व एस.अल.आर व खाली कारतूसों के 498 खोखे भी बरामद किये गए। पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ काफी दिनों से कार्य कर रहा है अपराधियों को शस्त्रों व कारतूसों की सप्लाई पुलिस विभाग से ही होती है प्रतिबंधित बोर के आर्म्स के कारतूस बाजार में नहीं मिल सकते हैं उनकी सप्लाई पूरे देश में नियोजित तरीके से अपराधियों को होती है।
अपराधियों, पुलिस व राजनेताओं का गठजोड़ संगठित अपराधों को बढ़ावा देता है। चाहे दिल्ली हो चाहे मुंबई हो शस्त्रों की सप्लाई व अपराधी समूहों को संरक्षण इस गठजोड़ से मिलता है, जबतक इस गठजोड़ को ईमानदारी से नष्ट नहीं किया जायेगा तब तक संगठित अपराध होते रहेंगे। अपराधियों ने अपने गठजोड़ में कार्यपालिका के भी अधिकारियो को शामिल कर रखा है। राजनीतिक दल तो उनके लिए कार्य करते ही रहते हैं। गणतंत्र दिवस के दिन पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के गोसाबा के छोटामोल्लाखाली थाना में बंद एक कैदी को छुड़ाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के लोग थाने पर हमला कर पुलिस वालों की पिटाई कर कैदी को छुड़ा ले गए। आज आवश्यकता इस बात की है की राजनीतिक दलों को अपराधिक पृष्टभूमि वाले लोगों को अपने दल से निष्काषित करना होगा ।

सुमन
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केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अनिवासी भारतीय अमेरिकन संत सिंह चटवाल को पद्मभूषण से सम्मानित किया है श्री संत सिंह चटवाल ने नब्बे लाख डालर का घोटाला स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में किया था। जिसकी जांच सी.बी.आई ने की थी । जांच उपरांत सी.बी.आई ने संत सिंह चटवाल के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है।
सरकार के इस कदम से यह साबित होता है कि भ्रष्टाचार व आर्थिक अपराधियों को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना उसको मान्यता देना है । सरकार आने वाले वर्षों में देश में सबसे बड़े आर्थिक अपराधी व भ्रष्टाचारी को भारत रत्न भी दे सकती है सरकार के इस कदम से यह लगता है की श्री संत सिंह चटवाल अगर भारतीय नागरिक होते तो उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता था।

पद्मभूषण श्री संत सिंह चटवाल

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फल, सब्जी, शक्कर हुआ सपना, यही कमर तोड़ महंगाई में,
ईद का चाँद हुई दालें, सौ रुपया रोज कमाई में।
बच्चे रोटी दाल को तरसें, मटरफ़ली देखि ललचायें॥ बोलो देश…..
तीस साल तक लड़े मुकदमा, हत्यारे सब बरी होई गए।
टूटी थी अंधे की लाठी, गहनों, खेत मकान बिक गए।
शोक मनाये मात-पिता कि, न्यायपालिका के गुण गायें। बोलो देश……….
फर्जी मुठभेड़ों में जिनके, प्रिय जन स्वर्ग सिधार गए।
जो भ्रष्ट व्यवस्था, सत्ता के, गुंडों से लड़कर हार गए।

जो नीर अपराधीन नवजवान हिंसक आतंकी कहलाएं॥ बोलो देश………
गुजरात, उड़ीसा, महाराष्ट्र में, जो जिन्दा ही दफ़न हो गए,
धू-धूकर जलते भवनों में, जिनके प्रिय बेकफ़न सो गए।
जो अपना सर्वस्व गवांकर, शिविरों में जिंदगी बिताएं॥ बोलो देश…….
गोदें सूनी हुई और जिन मांगों के सिन्दूर धुल गए।
भस्म हुए स्वर्णिम सपने, आँखों में बनकर अश्रु घुल गए।
रक्षक पुलिस बन गयी भक्षक, दंगाई मिलि आग लगायें ॥ बोलो देश……
गए कमाने मायानगरी, बीवी बच्चे आस लगाए,
राजठाकरे के गुंडों से, बचकर फिर न वापस आये।
मातम करें आश्रित या कि, संविधान की महिमा गाएं॥ बोलो देश……
संविधान की ऐसी की तैसी, करते गुंडे व्यभिचारी,
कर रहे कलंकित रक्षक पद, राठौर सरीखे अधिकारी।
जो स्वदेश में छिपते फिरते, कैसे मान सम्मान बचाएँ॥ बोलो देश…..
मृतक घोषित कर, वारिस बन, माफिया जमीन हथियाय रहे।
न्यायलयों में जा जाकर, मुर्दे फ़रियाद सुनाये रहे।
हम जीवित है हम जीवित हैं, वे जगह-जगह प्रमाण दिखाएं॥ बोलो देश…..

जिनके पुरखे देश के लिए, शीश कटाए रक्त बहाए।
मात्रभूमि की रक्षा हित जो, तन-मन-धन सर्वस्व लुटाये॥
झुग्गी झोपड़ियों में रहकर, घुट-घुटकर जिंदगी बिताएं॥ बोलो देश…….
काल बनी मेहँदी की लाली, दुल्हन के जोड़े कफ़न बन गए,
सेज सुहाग की चिता बन गयी, सारे सपने दफ़न हो गए।
चढ़ी दहेज़ की बलि वेदी पर, जिनकी बहन, बेटियाँ, माएं॥ बोलो देश……
फटे चीथड़ों में कितनी, माँ बहनें छिपकर लाज बचाएँ॥ बोलो देश……
आज भी लाखों नन्हे मुन्ने, रोते-रोते सो जाते हैं।
भूख कुपोषण बीमारी से, तड़प-तड़पकर मर जाते हैं॥
वे क्या जाने लोकतंत्र औ क्या गणतंत्र की महिमा गायें॥ बोलो देश………
फटा सुथन्ना पहन के बुधुआ, झूम-झूम जन गण मन गाये।
नंग धडंग खड़ा दुवारे, घिसुआ देख-देख मुस्काये॥
छोडो अनंत कथा यह बंधू , आओ जन गण मंगल गाएँ॥
बुधुआ गाए, घिसुआ गाए, दुखना बंधुना काकी गाएँ।
नेता अभिनेता सब गाएँ, व्यभिचारी अचारी गाएँ॥
मिलावटखोर व्यापारी गाएँ, महाभ्रष्ट अधिकारी गाएँ।
चली आ रही वर्षों से, यह परंपरा हम आप निभाएं॥

मोहम्मद जमील शास्त्री

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अंधे भूखे अधनंगे जो, फुटपथों पर रात बिताएं।
बोलो देश बंधुओं मेरे, वे कैसा गणतंत्र मनाएं॥
पेट की आग बुझाने खातिर, जो नित सुबह अँधेरे उठकर
अपना-अपना भाग बटोरते, कूड़े के ढेरों से चुनकर।
गंदे नालों के तीरे जो, डेरा डाले दिवस बिताएं॥ बोलो देश……
बिकल बिलखते भूखे बच्चे, माओं की छाती से चिपटे,
तन पर कुछ चीथड़े लपेटे, सोये झोपड़ियों में सिमटे।
दीन-हीन असहाय, अभागे, ठिठुर-ठिठुर कर रात बिताएं॥ बोलो देश……….
जिनका घर, पशुधन, फसलें, विकराल घाघरा बहा ले गयी।
कोई राहत, अनुदान नहीं, चिरनिद्रा में सरकार सो गयी।
सड़क किनारे तम्बू ताने, शीत लहर में जान गवाएं॥ बोलो देश ………
वृद्ध, अपंग, निराश्रय जिनको, सूखी रोटी के लाले हैं,
उनके हिस्से के राशन में, कई अरब के घोटाले हैं।
वे क्या जन गण मंगलदायक, भारत भाग्य विधाता गायें॥ बोलो देश……
बूँद-बूँद पानी को तरसें , झांसी की रानी की धरती।
अभी विकास की बाट जोहती बुंदेले वीरों की बस्ती।
जहाँ अन्नदाता किसान, मजदूर करें आत्महत्याएं॥ बोलो देश……….
तीस साल के नवजवान जो, वृद्धावस्था पेंशन पाएं।
सत्तर साल की वृद्धा, विधवा, भीख मांगकर भूख मिटायें।
पेंशन मिला न कौनो कारड़, रोय-रोय निज व्यथा सुनाएं॥ बोलो देश ….
रात-दिवस निर्माण में लगे, जो श्रमिक कारखाने में।
जिनकी मेहनत से निर्मित, हम सोते महल, मकानों में,
खुले गगन के नीचे खुद, सर्दी, गर्मी, बरसात बिताएं॥ बोलो देश……..
माघ-पूष में जुटे खेत में, जो नित ठण्ड शीत लहरी में,
तर-तर चुए पसीना तन से, जेठ की तपती दो पहरी में।
हाड-तोड़ परिश्रम करें। मूल सूखी रोटी नमक से खाएं॥ बोलो देश……..

मोहम्मद जमील शास्त्री

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लखनऊ के जिला मजिस्त्रेट अमित घोष की गुंडागर्दी के कारण राज्य कर्मचारियो की हड़ताल हो गयी थी। सैकड़ो राजकर्मचारियों के सर फूटे थे करोडो रुपयों का नुकसान हुआ लेकिन समयबद्द वेतनमान के तहत उनको ईनाम के रूप में सरकार सुपर टाइम स्केल में प्रौन्नति की जा रही है कृषि विभाग के जिस कर्मचारी को थप्पड़ों से पीटा था उसके ऊपर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा चुका है । राज्य द्वारा नियमो कानूनों का उल्लंघन अब आम बात हो गयी है अमित घोष के खिलाफ कमिश्नर की जांच लंबित है जांचें इन अधिकारियों के खिलाफ चलती रहती हैं और इनको प्रोमोशन दर प्रोमोशन मिलता रहता है ये अधिकारिगण अच्छी तरह से जानते हैं कि लोकतंत्र में इनके खिलाफ कुछ नहीं हो सकता है इन अधिकारियों की कार्यशैली आम आदमी की रक्षा के लिए न होकर उनका उत्पीडन करने के लिए है गाँव देहात में इन अधिकारियों की भूमिका बहुत ही निंदनीय हो जाती है । राजधानी लखनऊ के अगल बगल के जिलो में प्रशासनिक अधिकारियो ने अपनी काली कमाई से फार्म हाउस खोले है और किसानो के पास अब उपजाऊ जमीन का टोटा होता जा रहा है हजारो लाखो एकड़ जमीन के चारो तरफ दीवालें बना कर चौकीदार नियुक्त किये जा चुके हैं अच्छा यह होगा की नए जमीन दारों की जमींदारी की जांच हो तो उनके नए-नए कारनामे जनता के समक्ष आयेंगे।

सुमन
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भारतीय संविधान के अनुसार राज्य कर्मचारियों को अपनी मांगो के समर्थन में हड़ताल का अधिकार है वहीँ काम नहीं तो दाम नहीं के सिधान्त के अनुसार हड़ताल के समय कर्मचारियों की उस दिन का वेतन न देने का प्राविधान है । उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारी शिक्षक अपनी मांगो के लिए लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे थे जिसपर उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष चहेते जिला मजिस्टे्ट अमित घोष ने लाठियां व गोलियां चलवायीं डी.आई.जी लखनऊ ने निहत्थी महिलाओं को लाठियों से पीटा । सरकारी कार्यालयों में घुस कर गैर हडताली कर्मचारियों को भी पीटा गया। कल दिनांक 22-01-2010 को राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल बलरामपुर हॉस्पिटल में पुलिस और पी.एस.सी, हड़ताल खत्म कराने के नाम पर मरीजों तथा कर्मचारियों के ऊपर अकारण लाठीचार्ज कर दिया अस्पताल के आसपास के राहगीरों को भी पीटा गया । रात में पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में कर्मचारी नेताओं के घरों में घुसकर उनके बीबी और बच्चो की राजाइयाँ डंडो से फेंक कर उनके पतियों का सुराग मालूम करने का प्रयास जारी रहा। कर्मचारियों की पत्नियां व बच्चे राज्य के नौकर नहीं हैं। महिलाओं व बच्चों को राज्य सरकार द्वारा प्रताड़ित करने का कोई औचित्य नहीं है। उनके साथ इस तरह की अभद्रता करना सीधे-सीधे राज्य की गुंडागर्दी है और यह भी एक गंभीर अपराध है ।
लखनऊ के जिला मजिस्टे्ट अमित घोष उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती को खुश करने के लिए कृषि विभाग के एक कर्मचारी को तीन थप्पड़ मारे । डी.आई.जी पुलिस व जिला मजिस्टे्ट अमित घोष पागलपन की सीमा से बढ़ कर आतंक का राज पैदा कर रहे हैं । राज्य द्वारा किये गए अपराधों के लिए कोई कानून नहीं है ?

सुमन
loksangharsha.blogspot.com

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हार न जाना काल चक्र से, जीत को शीश झुकाना होगा।
जीवन सफल बनाना है तो, सत्य पथ अपनाना होगा॥

द्विधा की घनघोर घटा जब, मन मानस पर घिरती जाए।
मोह, भ्रान्ति के अवरोधों से, प्रेम की धारा रूकती जाए।।

ज्ञान, विवेक, सुमति, साहस से, संशय तुम्हे मिटाना होगा।
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा॥

संसार-सिन्धु की लहरों से, जीवन नौका टकराएगी।
प्रचंड काल की भंवरों में, यह कभी उलझ जायेगी॥

निर्भय निर्द्वंद दृढ़ता से, तुमको पतवार चलाना होगा।
जीवन सफल बनाना है तो, सत्य पथ अपनाना होगा॥

दुर्दिन में मित्रों का विछोह , ह्रदय को कभी व्यथित कर देगा।
मित्रता, विश्वास, प्रेम का, छद्म रूप विचलित कर देगा॥

निर्विकार, निष्काम भाव से, स्वकर्तव्य निभाना होगा।
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा॥

सत्य, अहिंसा, दया, प्रेम का, बीज धरा पर बोना होगा।
हिंसा, स्वार्थ, इर्ष्या, घृणा से कल्पित मन धोना होगा॥

काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह को, जग से दूर भागना होगा।
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा॥

मोहम्मद जमील शास्त्री

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