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Archive for अप्रैल 2nd, 2010

उद्योगिक उत्पादन में सिगरेट सहित एक सौ पचासी उद्योगिक कार्यो में सूअर का इस्तेमाल होता है कुछ वर्षों पूर्व यह भी समाचार आया था कि चाय की पत्ती को और स्वादिष्ट बनाने के लिए रक्त का इस्तेमाल होता है। कृषि उत्पादन में भी इस तरह की मिलावट जारी है। कद्दू, लौकी, खीरा आदि सब्जियों में भैंस को दूध उतारने वाले इन्जेक्सन का प्रयोग किया जाता है जिससे उनकी लम्बाई, चौड़ाई रातों-रात बढ़ जाती है। इस तरह की सब्जियां मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल स्वभाव डालती हैं। भारतीय समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा अल्कोहोल (शराब) से परहेज करता है अब सब्जियों की पैदावार बढ़ाने के लिए कच्ची शराब का इस्तेमाल किया जाने लगा है। जिससे अल्कोहोल युक्त सब्जियां हम लोग प्रयोग करने लगे हैं। यह पूँजीवाद का संकट है। मुनाफा इनका धर्म है। मानव जाति बचे या न बचे इससे इनका कोई लेना देना नहीं है। मुनाफा होना चाहिए।
आज भारतीय समाज में प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्री विभिन्न अखाद्य पदार्थों के सम्मिश्रण से बिक्री की जा रही है, जिससे बहुसंख्यक आबादी मधुमेह, तपेदिक, पथरी, कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में है। समाज में काफी लोग गलत तरीके से रूपया कमाने की होड़ में लगे हुए हैं। उन्ही को सम्मान दिया जा रहा है पहले ऐसा नहीं था। ऐसे लोगों की निंदा होती थी। हमारे जनपद का सबसे बड़ा मार्फीन तस्कर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री है और जब 26 जनवरी को पुलिस लाइन ग्राउंड में वह सलामी लेता है तो देश भर के सारे मार्फीन तस्कर अपने आप सम्मानित हो जाते हैं।

सुमन
loksangharsha.blogspot.com

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