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Archive for अगस्त 5th, 2010


वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी का सम्मान

एक ऐसा चिट्ठाकार, जिन्हें पोस्ट प्रकाशन में महारत हासिल है ….जिनका चिट्ठा सर्वाधिक सक्रियता सूची में हमेशा तीसरे-चौथे स्थान परहोता है !
एक ऐसा चिट्ठाकार जिनकी टिपण्णी चमत्कृत करती है चिट्ठाजगत को ….जो दोस्तों का दोस्त और दुश्मनों का दुश्मन है !
सामाजिक सरोकार के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध चिट्ठाकारों में जिनका नाम सर्वोपरि है, किन्तु आज का सम्मान उन्हें ब्लोगोत्सव के श्रेष्ठ सहयोगी होने का सम्मान है !
जानते हैं कौन है वो ?
वो हैं एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ सहयोगी का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

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वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक का सम्मान

एक ऐसी चिट्ठाकारा जो हिंदी के उन्नयन की दिशा में अग्रणी हैं और जिनके चिंतन सामाजिक सरोकार से सने होते हैं !
एक ऐसी अध्यापिका जिन्होनें न जाने कितने शिष्यों को हिंदी की सेवा में समर्पित किया और उन्हें समाज का वेहतर नागरिक बनाया !
हिंदी की एक ऐसी सेविका जो अपने चिंतन से सबको चमत्कृत करती हैं !
जानते हैं कौन हैं वो?
वो हैं श्रीमती नीलम प्रभा

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ महिला चिन्तक का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

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केन्द्रीय कृषि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री शरद पवार एक महत्वकांक्षी व्यक्ति रहे हैं, आई.पी.एल मामले में इनका भी दामन साफ़ नहीं था, ये अलग बात है कि वह बच निकले। विभाग से ज्यादा उन्हें क्रिकेट में दिलचस्पी रही, अब तो वह बी.सी.सी.आई से आई. सी.सी तक पहुँच चुके हैं। हालाँकि क्रिकेट से उनका कोई लेना देना नहीं है। उम्र के हिसाब से भी वह फिट नहीं बैठते। बस यह जरूर है कि नीरस कृषि की अपेक्षा क्रिकेट में ग्लैमर, मस्ती, नाचरंग, विज्ञापन और खरीद फरोख्त सभी कुछ है।
कृषि मामलो में जो कुप्रबंधन रहा है, उसके लिए वह तो दोषी है ही, कांग्रेस या केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है, गेंहू, चावल, शक्कर आदि के लिए भारत की जनता को बहुत झेलना पड़ा। देश में अब इन वस्तुओ की कमी हो गयी तब आपूर्ति को दुरुस्त नहीं किया गया, व्यापारियों को खुली छूट दे दी गयी और वे मनमाने दाम पर उपभोक्ताओं से वसूलते रहे। राज्य सरकारें भी इन साजिशों में शामिल रही। जब हुल्लड़ मचा तब विदेशों से आपात की सौदेबजियाँ हुई। लोगों ने अपनी जेबें भरी।
इधर किसानो को भी खूब नाच नचाया गया, डीजल महंगा, नहरों से पानी गायब, खाद, बीज की कालाबाजारी इन सब में केंद्र एवं राज्यों ने फायदे उठाये। खांडसारी बाहर से आई भी तो बंदरगाहों पर पड़ी रही। बाजारों में चीनी 45-50 रुपये किलो तक बिकी। फायदे में कौन-कौन शामिल था ?
अब किसान ने जब मेहनत से गेंहू पैदा किया तथा उसे सरकारी क्रय केन्द्रों तक ले गया, तो सरकार उसके भण्डारण की व्यवस्था तक न कर सकी। इस जुलाई माह में वर्षा में गेंहू खुले में पड़ा है, जिसके में सड़ने की खबरें मिल रही हैं। हरियाणा में 40 लाख टन गेंहू पूरी तरह बर्बाद हो गया। पंजाब में 5400 टन गेंहू तो ऐसा है जो पशुवों के खाने के लायक भी नहीं रहा। यू.पी के अनेक जिलों सीतापुर, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर में हजारों तन गेंहू बर्बाद हो गया। बाराबंकी में हजारों तन गेंहू खुले में पड़ा भीग रहा है, उस पर पालीथीन तक नहीं डाली गयी। पवार साहब की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
दूसरी और गरीबों को सस्ता अनाज देने की तैयारी चल रही है। अभी तक गरीब परिवारों की संख्या 6.52 करोड़ थी। योजना आयोग की तेंदुलकर कमिटी का आकलन 8.07 करोड़ परिवारों का है। अर्थात गरीबी रेखा से नीचे आने वाले परिवारों की संख्या कुल आबादी का 37.5 फ़ीसदी है।
एक तरफ विकास की बातें होती हैं दूसरी तरफ गरीब परिवारों की संख्या बढती जा रही है।
अब देखिये देश का गेंहू सडाया जा रहा है, जब गरीबों को देना होगा तो महंगे टेंडरो पर आयात किया जाएगा फिर कमीशन बाजियां होगी, बाजार भाव चढ़ेंगे। व्यापारी और सरकारी तंत्र सभी की जेबें भरेंगी- यही चक्र चलता रहेगा- नागार्जुन ने कभी सरलता से यह सूक्ष्म और सटीक चोट की थी-

जनता के कुछ और सत्य हैं, शासन के कुछ और ।

-डॉक्टर एस.एम हैदर

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