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Archive for अगस्त 6th, 2010


वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (महिला) का सम्मान

संगीता पुरी जी आज के चर्चित हिंदी चिट्ठाकारों में से एक हैं , इन्होने पोस्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्योतिष को .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकालने में सफ़लता पाते रहना .. बस यही सकारात्‍मक सोंच रखती हैं ये .. सकारात्‍मक काम करती हैं .. हर जगह सकारात्‍मक सोंच देखना चाहती हैं .. आकाश को छूने के सपने हैं इनके .. और उसे हकीकत में बदलने को ये हमेशा प्रयासरत रहती हैं, इनके महत्वपूर्ण व्यक्तिगत ब्लॉग है-गत्‍यात्‍मक चिंतन /गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष /हमारा खत्री समाज /हमारा जिला बोकारो आदि । संगीता जी की कहानियां अत्यंत सारगर्भित और भावपूर्ण होती है ब्लोगोत्सव के दौरान इनकी एक कहानी थम गया तूफ़ान प्रकाशित हुयी थी , जिसे आधार बनाते हुए ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष की श्रेष्ठ सकारात्मक महिला ब्लोगर का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

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वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष) का सम्मान

जैसा कि आप सभी को विदित है कि हिंदी चिट्ठाकारी शैशवा अवस्था से बाहर निकलकर तरुणावस्था में प्रवेश कर चुकी है, जहां जरूरत है उन्हें सही दिशा और दृष्टि देते हुए सकारात्मक पथ पर ले जाने की …..!
इसी दिशा में लगातार कार्यरत हैं एक ब्लोगर जो पत्रकार भी हैं और साहित्यकार भी, जो जे.पी. मूवमेंट में अपने सामाजिक सरोकार को प्रदर्शित कर चुके हैं…..!
आज प्रिंट मीडिया के माध्यम से हिंदी चिट्ठाकारी को आयामित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं !
नाम है डा. सुभाष राय
जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ सकारात्मक ब्लोगर (पुरुष) का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

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आदि काल से व्यक्ति को अपने सजने सवारने का बहुत शौक रहा है उस समय की कबीलाई और जंगली कौम के स्त्री-पुरुष पत्थरों, लकड़ियों एवं हड्डियों से बने जेवर पहना करते थे। खजुराहो के अति प्राचीन मंदिरों पर पत्थरों से उकेरी गयी मूर्तियों में भी यह भावनाएं साफ़ दिखाती हैं। शुरू में मेहँदी या अन्य चीजों से बाल रंग कर बूढ़े लोग अपने को जवान दिखाने की जुगत में लगे रहते थे। बाद में ‘डाई’ के आने से अंतर्मन की हीन भावना को छुपाने का एक अच्छा आवरण हाथ लगा। धीरे-धीरे यह धंधा घरों से निकल कर सैलून और ब्यूटी पार्लरों तक पहुंचा, जिस से अनेक लोगों को खाने कमाने के अवसर हाथ लगे। इस बीच कंपनियों ने बाल रंगने के नए नए कलर तथा प्रसाधन बाजारों में भेज दिए। अब युवा वर्ग भी इस अंधी-दौड़ में शामिल हो गया।
समाये बदलते देर नहीं लगती। नई चीज आ जाती हैं और पुरानी चीजों को ‘ओवर टेक’ करती हैं।
एक नई वैज्ञानिक खोज की और आपका ध्यान आकृष्ट करने के लिए मुझ को यह सब लिखना पड़ा।

हाल ही में एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक ब्रुनो बर्नार्ड ने एक विशेष ‘मैजिक लोशन’ तैयार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब बालों को डाई टिन्ट्स या रोज-रोज के केमिकल ट्रीटमेंट करने से फुर्सत मिल जायेगी। इसके इस्तेमाल से बालों का स्वाभाविक कलर और चमक वापस आ जाएगी। प्रसाधन प्रेमियों के लिए तो यह एक अच्छी खबर है। परन्तु इस धंधे में लिप्त कंपनियों, सैलूनो तथा ब्यूटी पार्लरो की कमी पर कुछ असर तो जरूर पड़ेगा।
अब बात का दूसरा रुख यह भी देखिये केवल मके-उप से कोई खूब सूरत नहीं बन जाता, मैंने यह भी सुना है कि सुन्दरता व्यक्ति में नहीं, उसको देखने वाले की आँखों में होती है, उर्दू दां सोसाइटी में जब कोई किसी की प्रशंसा करता है तो वह ठेठ उर्दू में जवाब देता है कि ‘यह आपका हुस्ने-नजर है। ‘
दरअसल कोई भी व्यक्ति अपने अच्छे व्यवहार अचार, विचार के कारण ही लोगों में पसंद किया जाता है, खूबसूरती व्यक्ति के चेहरे से नहीं उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व से झलकनी चाहिए – ऐसी ही स्तिथि के लिए किसी ने सांकेतिक भाषा में यह कहा था-

क्यों काजल दे, काहे सँवारे
यह नयना बिन काजल कारे ।

-डॉक्टर एस.एम हैदर

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