Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for अगस्त 9th, 2010


मानव जाति तथा अन्य प्राणियों में बहुत सी विभिन्नताएं तो हैं ही परन्तु अनेकानेक समानताएं भी है। विशेषताओं या गुणों में कुछ जीव-जंतु मनुष्यों से बहुत आगे हैं। कुत्तों और घोड़ों की वफादारी एवं संवेदनशीलता को सभी जानते हैं। आप ने कुछ समय पूर्व इंदौर के एक कुत्ते का हाल अख़बारों में पढ़ा होगा जिसकी मौत हो जाने पर वहां के आड़ा बाजार इलाके की दुकाने शोक में बंद कर दी गयी- यह मृतक कुत्ता लगभग पिछले दस वर्ष से इलाके की अधिकांश शव यात्राओं में आश्चर्य जनक रूप से शामिल हो रहा था, अपने इस अद्भुत गुण के कारण वह स्थानीय लोगो में काफी लोकप्रिय था। उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और धार्मिक पद्धति से किया गया , जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए । ‘खुमार ‘ ने कहा था – ‘इस दौर के इंसान वफ़ा भूल गए हैं’ – मैं कहता हूँ कुत्ते ही से कुछ सीख लें।
अब एक किस्सा भी सुन लीजिये- कुत्तों का जिन से विरोध हो जाता है, उनको छोड़ते भी नहीं। लतीफा यह है कि एक नए ढंग की शव यात्रा जा रही थी, आगे-आगे एक कुत्ता था जिसकी जंजीर एक आदमी के हाथों में थी, कुत्ते पर फूल मालाएं पड़ी थी, उसके पीछे कन्धों पर शव, फिर उसके पीछे आदमियों की एक एकहरी पंक्ति थी। रास्ते में दूर पर खड़े एक जवान ने देखा तो उसको बड़ा ताज्जुब हुआ, तेज कदम बढ़ा कर पंक्ति तक पहुंचा, पिछले आदमी से हाल पूछा तो उसने बताया कि यह शव उस व्यक्ति की पत्नी का है जिसके हाथ में कुत्ते की जंजीर है। उसकी पत्नी इसी कुत्ते के काटने से मरी हैं, जवान बड़ी लालसा से पूछा क्या यह कुत्ता मुझे मिल सकता है ? – उसने जवाब दिया यह बात कुत्ते के मालिक से पूछो – वह दौड़ कर आगे पहुंचा और यही सवाल किया- उसने जवाब दिया देखते नहीं हो- इसीलिए तो सब लाइन में लगे हैं- सब का काम क्रम से होगा, जाओ सब से पीछे लग जाओ।
अब बताइए कुत्ते की प्रसंशा की जाए या निंदा ?

‘गिरिधर’ की एक पंक्ति शब्द परिवर्तन के साथ – ‘कुत्ते’ में गुन बहुत हैं, सदा रखिये संग।

-डॉक्टर एस.एम हैदर

Read Full Post »