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Archive for अगस्त 30th, 2010


सितबर माह में बाबरी मस्जिद प्रकरण में माननीय उच्च न्यायलय, इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ का फैसला आने वाला है। उस फैसले के मद्देनजर हिन्दुवत्व वादी संगठनो के नेता व कार्यकर्ता जगह-जगह धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए प्रष्टभूमि तैयार कर रहे हैं। धार्मिक उन्माद वाले भाषण भी दिए जा रहे हैं। सरकार द्वारा अघोषित युद्ध की तैयारी की जा रही है किन्तु सरकार ऐसे संगठनो के ऊपर अंकुश लगाने की बजाये प्रशय जयादा दे रही है।
गृहमंत्री चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की बात कहकर वास्तविक खतरे की ओर इंगित किया था लेकिन जैसे ही हिन्दुवत्व वादी संगठनो के भोपू बजने शुरू हुए कि कांग्रेस ने पैंतरा बदला और जनार्दन द्विवेदी ने स्पष्टीकरण दिया कि भगवा आतंकवाद जैसी कोई चीज नहीं होती है। यह बात वस्तुस्तिथि के विपरीत है शाखाओं से लेकर हिन्दुवत्व वादी शिक्षण संस्थान देश के धर्म-निरपेक्ष स्वरूप को न मान कर धर्म विशेष का देश बनाने की बात करते हैं तब वह दूसरे धर्मो के प्रति अपमानजनक और निंदा कारक और धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने वाली बातें करते हैं।
चुनाव में लाभ हानि के आधार पर जब वस्तु स्तिथियों का मूल्यांकन होता है। तब समाज के विभिन्न वर्गों के साथ न्याय नहीं हो पाता है। जरूरत इस बात की है कि कैंसर बन गए जैसे मुद्दों का हल होना अतिआवश्यक है। जब सभी तरह के प्रयास असफल हो जाते हैं तब न्यायपालिका अपना काम करना शुरू करती है लेकिन धार्मिक उन्माद वाले संगठन पहले से ही उद्घोषणा करने लगते हैं, यह मुद्दा न्यायपालिका तय नहीं करेगी। तब कोई विकल्प शेष नहीं बचता है। प्रगति की तरफ यदि हम नहीं बढ़ रहे हैं तो उसका भी मुख्य कारण है कि हम छोटी-छोटी चीजों में आज भी उलझे हुए हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि हम सब मिलकर एक नए भारत के निर्माण की तरफ अग्रसर हों जिसमें जाति धर्म के आधार पर निर्णय न हो।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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