Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for दिसम्बर 18th, 2010



लोकतांत्रिक देशों में लिंगभेद के आधार पर कोई फैसला नहीं होता है लेकिन वास्तव में अधिकांश फैसले पुरुषवादी मानसिकता के तहत होते हैं। भारत में स्त्री को दुर्गा, सरस्वती, पार्वती जैसे विश्लेषण से विभूषित किया जाता है लेकिन सच यह भी है कि पूरी दुनिया में स्त्रियों की बुरी दशा है और एक बड़ी संख्या में स्त्रियों को देह व्यापार जैसे कार्यों में जबरदस्ती लगाया गया है। स्त्रियों की दुर्दशा का अभी महत्वपूर्ण मामला बिहार में देखने को आया है। 2005 में राष्ट्रीय जनता दल से विधायक चुनी गयी बीमा भारती को उनके पति अवधेश मंडल ने बुरी तरह मारा पीटा की उनको अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। घटना के समय विधायक के अंगरक्षक तमाशा देखते रहे। इस समय भी बीमा भारती सत्तारूढ़ दल जनता दल (यू) की विधायक हैं। बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार उनका हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल भी गए।
अपने देश में महिलाओं के आरक्षण के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सदस्य ग्राम पंचायत तक महिलाएं निर्वाचित होकर पदासीन होती हैं वहीँ संसद तथा विधान सभाओं में निर्वाचित होकर मंत्री बनती हैं। देश की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल हैं। इन में कितनी निर्वाचित महिलाओं की पिटाई आये दिन उनके पति करते होंगे और वह बेचारी समाज में अपनी पदीय विवशता के कारण अपनी बात को भी नहीं कह सकती हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि हमारी शिक्षा दीक्षा इस तरह से निर्धारित कि जाए की उस में लिंग भेद समाप्त हो अन्यथा हम आप नारे लगते रहेंगे और महिलाओं कि दशा में कोई सुधार नहीं होगा।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

Read Full Post »


सत्तारूढ़ दल के लठैत

यूपी पुलिस के दामन में दाग ही दाग हैं। आम तौर पर उसकी छवि जनता के खिलाफ बर्बर गिरोह के रूप में उभरती है, जिसे वर्दी की आड़ में कुछ भी करने की आजादी है। भ्रष्टाचारियों और अपराधियों की साथ गाँठ चलती रहती है। सत्ता के इशारे पर खाकी वर्दी कुछ भी करने को तैयार रहती है।
-जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला, इलाहाबाद उच्च न्यायालय (1967 में की गयी टिप्पणी)

भारत में राजा महाराजाओं के पास शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुश्तैनी व परंपरागत लठैत होते थे जो राज्य में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए कार्य करते थे। वह लठैत लोग कभी-कभी डकैती, बलात्कार, आगजनी जैसे अपराध भी करते रहते थे। ये लठैत लोग लौकी, तुरोई से लेकर बहुमूल्य चीजें नागरिकों से जबरदस्ती छीन लेते थे। नागरिक उनके खिलाफ कुछ कर नहीं पाते थे। कभी कभी लठैत और उनके सरदार राजा की भी संपत्तियों में भी सेंधमारी कर लेते थे लेकिन राजा द्वारा उसकी अनदेखी कर दी जाती थी। उसी तर्ज पर गाँव देहात में आज भी भारतीय पुलिस व्यवस्था काम कर रही है और राज्य उसके कुकृत्यों की अनदेखी कर रहा है। आज किसी की हत्या करानी हो तो एनकाउन्टर विशेषज्ञ से मिल लीजिये ट्रांस्पेरेंसी इन्टरनेशनल के सर्वे के अनुसार भारतीय पुलिस 214 करोड़ रुपये जनता से अवैध वसूली करती है। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती घोटाला, फायर ब्रिगेड में पम्प घोटाला सहित अनेकों घोटाले पुलिस के उच्चाधिकारियों ने किये किन्तु कोई दंडात्मक कार्यवाई उनके खिलाफ अभी तक संभव नहीं हो पायी है।
पुलिस का वर्तमान समय में प्रमुख कार्य यह है कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को हर संभव तरीके से खुश रखो और मनचाहे तरीके से नागरिकों को लूटो, कोई कार्यवाई नहीं हो सकती है। न्याय, संविधान, विधि का शासन सब खोखले नारे हैं। जिला पंचायत के चुनाव में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने जिस तरह जिला पंचायत सदस्यों को डरा, धमका कर, बाद में देख लेने की धमकी देकर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं को निर्वाचित करने में अहम् भूमिका अदा की है और अब ब्लाक प्रमुख पद पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं को निर्वाचित करने के लिए पुलिस अधिकारी स्टार प्रचारकों की भूमिका में नजर आ रहे हैं। बाराबंकी जनपद के रामनगर ब्लाक में अनुसूचित जाति की क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती रामदुलारी के लड़के योगेश का अपहरण सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी संजय तिवारी ने कर लिया था लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोई कार्यवाई न करके संजय तिवारी के हौसलों को और बुलंद किया और स्थानीय पुलिस अधिकारी उनके चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि पुलिसिया लठैतों के काले कारनामो से नागरिको को बचाने के लिए एक अलग व्यवस्था कायम करने की है जिससे वर्दी पहने अपराधियों को दण्डित कराया जा सके।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

Read Full Post »