Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for जनवरी 20th, 2011


तकदीर ने लिखा जिन्दगी का तराना है
महबूब के आगोश में सभी को जाना है

करते रहते हैं इंतज़ार ख़ुशी के ख़त का
खुले खतों में हर्फों सेही दिल बहलाना है

जो करते हैं बातें आसमां तक जाने की
लौट वापस उनको भी जमीं पे आना है

करते हैं मुहब्बत जरुरतमंदों की तरह
क्या दुनिया भी किसी का आशियाना है

जो तूने लिखा दिया इतिहास हो गया
लकीरों में लिखा भी कैसे मिटाना है

जीने का सहारा बन ढूढ़ते हैं ताजिंदगी
तन्हा ही तो एक दिन सबको जाना है

खुद का लिखा न पढ़ पाए “ए जिन्दगी”
क्या लेकर आये क्या ले कर जाना है

जलाते सभी हैं चरागों को शाम ढले ही
”ज्योति” एक दिन सबको बुझ जाना है
-ज्योति डांग

Read Full Post »