Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for जनवरी 29th, 2011


माननीय उच्चतम न्यायलय ने कहा कि आदिवासी देश के असली नागरिक हैं। शेष 92 फ़ीसदी लोग आव्रजक आक्रमणकारियों की संतानें हैं। लेकिन हम उनके साथ बुरा व्यवहार करते हें पुराने समय में उन्हें राक्षस और असुर न जाने क्या क्या कहा जाने लगा जबकि ये लोग गैर आदिवासियों के मुकाबले चरित्रवान होते हें, ये न कभी झूठ बोलते हें न कभी ठगते हैं। लेकिन इन पर लगातर अत्याचार होते रहे हैं। इसकी वजह से ये लोग सैकड़ों साल पहले जंगलों में चले गए। आज वे सबसे ज्यादा अशिक्षित, भूमिहीन, बीमार तथा काम आयु तक जीवित रहने वाले लोग बन गए हैं। लेकिन अब जंगलों में भी उन्हें विकास के नाम पर बेदखल किया जा रहा है। कभी खदानें तो कभी कारखाना लगाकर उन्हें वहां से भी खदेड़ा जा रहा है। वाक्य आ गया है कि हम उनके प्रति किये गए ऐतिहासिक अन्याय के बदले में उनके साथ अच्छा व्यवहार करें तथा उन्हें अपना जीवन जीने दें।
माननीय उच्चतम न्यायलय की इस टिपण्णी के बाद जरा अपने बारे में सोचिये कि आप क्या हैं ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

Read Full Post »