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Archive for फ़रवरी, 2011

जनता की ताकत


अमेरिकन आका भी बचा नहीं पाए

महंगाई बेरोजगारी उत्पीडन से परेशान बेहाल जनता ने 18 दिन सारा कामकाज छोड़ कर मिस्त्र में अमेरिकन साम्राज्यवाद के पिट्ठू तानशाह हुस्नी मुबारक को राष्ट्रपति पद से मुक्ति दिला दी। मध्य एशिया में इस तरह के तानाशाह बीस-बीस, पच्चीस-पच्चीस साल से विराजमान हैं और जनता की समस्याओं से उनका कोई लेने देना नहीं रहता है। विश्व स्तर की राजनीति में वह अमेरिकन साम्राज्यवाद की जी हजूरी में रहकर उसके हितों की परिपूर्ति करने का साधन बने रहते हैं। अमेरिकन साम्राज्यवादियों ने बड़ी ख़ूबसूरती से बूढ़े तानाशाह से मुक्ति पा ली क्योंकि आने वाले उसी के व्यक्ति हैं, जो राजसत्ता पर स्थापित हो रहे हैं। इस तरह से कोई व्यवस्थागत परिवर्तन नहीं हो रहा है जबकि इसके विपरीत जनता को रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य तथा अपने शोषण से मुक्ति की आवश्यकता है लेकिन हर्ष इस बात की है कि जनता ने अपनी ताकत को पहचाना है। मिस्त्र की आत्मविश्वास भरी जनता आने वाले शासक को भी जनता के हितों के लिए काम करने को मजबूर करेगी।
मिस्त्र के जनांदोलन ने मध्य एशिया के देशों में नई आशा और विश्वास का संचार किया है और हो सकता है कि आने वाले दिनों में सूडान, यमन, सीरिया, टर्की सहित बादशाहत वाले अमेरिकी साम्राज्यवाद के प्रतिनिधियों को उखाड़ फेंकेगी और एक नए समाज की संरचना हेतु जनता में आशा और विश्वास को पुनर्जीवित करेगी। अपने देश के युवाओं में भी इन तानाशाह के पतन से नई आशा व विश्वास का जन्म हुआ है जो आने वाले दिनों में इन भ्रष्टाचारी राजनेताओं के पतन का कारण बनेगी।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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देश में आजादी के बाद भी काले कानूनों का निर्माण हुआ है चाहे वो पोटा के रूप में हो चाहे एन.डी.पी.एस हो या टाडा। आतंकवाद व माओवाद से निपटने के नाम पर विभिन प्रदेशों में काले कानूनों का निर्माण हुआ है। इन काले कानूनों की एक विशेषता है कि यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम व भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता से हट कर इनका विचारण होता है। इसमें कुछ कानूनों में तो यह प्राविधान है कि पुलिस ने अंतर्गत धरा 161 सी.आर.पी.सी के तहत दिया गया बयान या पुलिस के समक्ष किसी भी आत्म स्वीकृति को सजा का आधार बना लिया जाता है। इन कानूनों के तहत यह भी व्यवस्था होती है कि इसमें सभी पुलिस वाले पेशेवर गवाहों की तरह गवाही देते हैं और उसी आधार पर सजा हो जाती है। जैसे एन.डी.पी.एस एक्ट के तहत अधिकांश मामलों में जिस व्यक्ति को जितने दिन जेल में रखना होता है उतनी ही मात्र में मार्फीन या हेरोइन की फर्जी बरामदगी दिखा दी जाती है इसमें भी जमानत आसानी से नहीं मिलती है। सजा, विचारण के पश्चात लगभग तयशुदा होती है। इन वादों में पुलिस की इच्छा ही महत्वपूर्ण है कि वह आपको समाज के अन्दर रखना चाहती है या कारागार में। कई बार ऐसा भी होता है कि पुलिस बेगुनाह नवजवानों को एन.डी.पी.एस एक्ट के तहत हँसते हुए न्यायालय रवाना कर देती है कि जाओ कुछ वर्ष अन्दर रह आओ और ऐसे वादों में न्यायालय के पास पुलिस की बातों को सच मानने के अतिरिक्त कुछ नहीं होता है। बिनायक सेन के मामले में भी यही हुआ है कि छत्तीसगढ़ के काले कानून के तहत उनका वाद चलाया गया और सजा हुई और अब माननीय उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। अगर आप यह भी कहते हें कि यह सरकार अच्छी नहीं है सरकार बदल दी जाएगी तो काले कानूनों के तहत आप आजीवन कारवास के भागीदार हो जायेंगे लेकिन प्रश्न यह है कि काले कानूनों के तहत हजारो लाखो लोग जेलों में बंद हैं। जनता अपनी समस्याओं से पीड़ित है कौन इन काले कानूनों का विरोध करे। विधि निर्माण करने वाली संस्थाएं संसद व विधान सभाएं अपने में मस्त हैं उनके पास सरकार बचने व सरकार गिराने के अतिरिक्त समय नहीं है। काले कानून बनाते समय यह संस्थाएं उस पर विचार नहीं करती हैं। नौकरशाही द्वारा तैयार ड्राफ्ट को हल्लागुल्ल के बीच कानून की शक्ल दे दी जाती है और फिर वाही नौकरशाही जिसको चाहे आजाद रखे जिसको चाहे निरुद्ध।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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मैं भी अमेरिकन साम्राज्यवाद का सेवक था अब अपनी मजदूरी वसूल रहा हूँ

साम्यवादी चीन के सम्बन्ध में सन 2006 में विकीलीक्स ने व्यवस्था सम्बन्धी तमाम सारी अव्यवस्थाओं को उजागर किया तो पश्चिमी मीडिया और उसके नेतागण दुनिया में उसे अपने सर पर बैठाये हुए नाच रहे थे लेकिन जब विकीलीक्स ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के सफ़ेद झूठों को उजागर करना शुरू किया तो ओबामा प्रशासन ने अमेरिकी कर्मचारियों को विकीलीक्स पढने पर पाबन्दी लगा दी। अमेरिका की लाईब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस ने सभी कम्प्यूटरों पर विकीलीक्स को प्रतिबंधित कर दिया। विकीलीक्स ने अमेरिकन साम्राज्यवाद को इराक, अफगानिस्तान, ईरान के सम्बन्ध में अमेरिका ने सैन्य हस्तक्क्षेप के जो बहाने बनाये थे उनको तार-तार कर दिया। मेन स्ट्रीम मीडिया दुनिया में यह ढिंढोरा पीटता है कि वह सच समाचार प्रकाशित करता है उसकी भी सारी बातें गलत साबित हुई।
अमेरिकन साम्राज्यवाद ने अफगानिस्तान में। यू.एस.एस.आर के खिलाफ तालिबान को खड़ा किया था। उसी तरह से विकीलीक्स को पश्चिमी मीडिया व उसके नेताओं ने साम्यवादी व्यवस्थाओं के खिलाफ पोषित किया था किन्तु तालिबान की भूमिका समाप्त होते ही तालिबानियों ने उलट कर अमेरिकन साम्राज्यवाद के शोषण के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया उसी तरह विकीलीक्स ने अमेरिकन साम्राज्यवाद के खिलाफ लीक जारी करना प्रारंभ किया तो उसके सारे मुखौटे गायब होते चले गए और वह पूरी दुनिया में अभियुक्त की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, समानता आदि के पाखंड को नंगा कर दिया। ईराक के अन्दर अमेरिकन सेनाओ ने जो भी कुछ किया है उसके आगे हिटलर के भी अपराध कम मालूम देते हें अमेरिका के ज्यादा अमेरिकन साम्राज्यवाद के लोग विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों की जिस तरह से बेइज्जती करते हैं उसका भी खुलासा हुआ है। अब अमेरिकन साम्राज्यवाद व उसके पिट्ठू विकीलीक्स के संचालक असान्जे को आतंकी बता कर जेल में रहने की बात कर रहे हें। हद तो यहाँ तक हो गयी है कि इन्टरनेट पर लोगों को प्राप्त अबाध स्वतंत्रता पर पाबन्दी लगा देने का प्रयास किया जा रहा है।
मिश्र में इन्टरनेट सेवाएं अमेरिकन साम्राज्यवाद के पिट्ठू तानाशाह हुस्नी मुबारक ने लगा रखी है लेकिन जनता के सामने वह बेबस है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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मैं भ्रष्टाचार कर ही नहीं सकता

२ जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद एस बैंड स्पेक्ट्रम घोटाले में इसरो का कहना है कि समझौता देवास कंपनी से रद्द किया जा रहा है। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के कुशल नेतृत्व में दो लाख करोड़ रुपये का घोटाला करने का समझौता किया जा चुका था। विपक्ष द्वारा समय पूर्व हल्ला मचा देने से समझौते को रद्द किया जा रहा है। इसरो अन्तरिक्ष विभाग के अंतर्गत आता है और यह विभाग सीधे डॉक्टर मनमोहन सिंह के पास है।
भारतीय कानूनों के तहत किसी अपराध की तैयारी, प्रयास आदि के लिए भी दंड की व्यवस्था है यदि किसी साधारण व्यक्ति से यह मामला सम्बंधित होता तो उसके ऊपर विभिन्न धाराएं लगा कर अदालत में पेश कर दिया गया होता और प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया बार-बार उस व्यक्ति का चेहरा दिखा कर अपना राग अलाप रही होती कि देखो कितना खूंखार अपराधी है और भारतीय न्याय तंत्र के न्यायालय उस व्यक्ति को अभियोजन एजेंसी को दस से पंद्रह दिन की रिमांड पर भी दे दिए होते लेकिन मामला प्रधानमंत्री का है, वह भी उस प्रधानमंत्री का है जिसके ऊपर अमेरिकन साम्राज्यवाद का हाथ हो।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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देश में धर्म निरपेक्ष व्यवस्था लागू है किन्तु व्यवहार में शासन में बैठे हुए अधिकारी अपनी घ्रणित मानसिकता के चलते तरह तरह के प्रयोग धार्मिक व जातिगत भेद करने के लिए करते हैं। रेलवे पॉवर कर्पोरेशन बैंकिंग से सम्बंधित सेवाओं में भर्ती परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं में आवंटित रोल नंबर के साथ साथ प्रतिभागियों का नाम धर्म का उल्लेख करना आवश्यक है। उत्तर पुस्तिका की जांच करने वाला व्यक्ति घ्रणित मानसिकता का है तो वह धर्म के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों का नुकसान करता है। केंद्र एवं राज्य की विभिन्न प्रतियोगिताएं में रोल नंबर के साथ साथ परीक्षा नियंत्रकों द्वारा नाम व धर्म का उल्लेख किया जाना अनिवार्य कर दिया है।
पूर्व में कोई भी परीक्षा जाति व धर्म से रहित होकर योग्य अभ्यथियों के चयन की होती थी इसीलिए नाम और जाति, धर्म को गोपनीय रखने के लिए रोल नंबर की व्यवस्था की जाती थी और गोपनीयता को बनाये रखने के लिए जब उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षक को जांच के लिए दी जाती थी तो उस पर रोल नंबर के बजाये कोड नंबर दिए जाते थे। इसलिए आवश्यक है कि धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव न हो परीक्षा की पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाये। सभी परीक्षा परिणाम इन्टरनेट पर उपलब्ध कराने कि भी आवश्यकता है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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………गतांक से आगे
ब्लॉग विश्लेषण के १८ भागों में आपने लगभग हर विषय के ब्लोग्स के बारे में जाना,किन्तु हास्य-व्यंग्य को मैंने सुरक्षित रखा अंतिम भाग के लिए, कारण है कि इसके बाद का भाग ऐसा है जिसमें आप सभी को एक सुखद अनुभूतियों के साथ प्रवेश करना है,यानी आप हैं विश्लेषण के अंतिम,किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव से केवल एक कदम पीछे !

तो चलिए आज हम आपको ले चलते हैं हास्य-व्यंग्य की दुनिया में !कहा गया है कि हँसना एक चमत्कार है, आश्चर्य है, क्योंकि हँसने से जहाँ ज़ींदगी के स्वरूप और उद्देश्य का भाव प्रकट होता है वहीं नीरसता ,उदासीनता और दुख का भाव नष्ट करते हुए आनन्द्परक वातावरण का निर्माण करता है. यह भाव केवल मनुष्य में ही होता है….पशुओं में नहीं !

वर्ष- २००६ से संचालित हास्य-व्यंग्य का प्रमुख ब्लॉग है चक्रधर का चक्कलस ! यह ब्लॉग हिन्दी के श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर का है ,वर्ष-२०१० में इस पर कुल ५८ पोस्ट प्रकाशित हुए जो वर्ष-२००८ और २००९ में प्रकाशित पोस्ट के बराबर है अर्थात इस वर्ष अशोक चक्रधर जी के इस ब्लॉग पर सक्रियता अचंभित करती है !

इस वर्ष ताऊ डोट इन ने हास्य व्यंग्य को माध्यम बनाकर पाठकों को भरपूर रूप से आकर्षित किया,इस ब्लॉग की सर्वाधिक रचनाएँ चिट्ठाकारों को केंद्र में रखकर प्रस्तुत की जाती रही और कोई भी ब्लोगर इनके व्यंग्य बाण से आहत होकर न मुस्कुराया हो , ऐसा नहीं हुआ ….यानी यह ब्लॉग वर्ष के सर्वाधिक चर्चित ब्लॉग की कतार में अपना स्थान बनाने में सफल हुआ है ,इस ब्लॉग पर इस वर्ष से वैशाखनंदन सम्मान की भी शुरुआत हुई है ! अलग हरियाणवी शैली और प्रस्तुति के कारण यह हिंदी ब्लॉगजगत में रातो-रात मशहूर हो गया है ।वर्ष-२०१० के वहुचर्चित हास्य ब्लोगर ताऊ रामपुरिया ने जहां ब्लॉग पर अनेक प्रयोग किये हैं इस वर्ष, वहीं संजय झाला ने भी पाठकों को हंसा हंसाकर लोटपोट करने में कोई कसर नहीं छोड़ा !

हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग सुदर्शन की सक्रियता लगातार हमें अचंभित करती रही है !विगत दो वर्षों में इस ब्लॉग पर मैंने अनेक अच्छी-अच्छी सामग्रियां देखी है,प्रस्तुतिकरण और भाषा का लालित्य इसकी विशेषता है ,क्योंकि ब्लोगर के.एम .मिश्रा को स्वस्थ हास्य परोसने में महारत हासिल है !यह ब्लॉग पूरी तरह हास्य और व्यंग्य को समर्पित है !देश के लगभग सभी ज्वलंत मुद्दों पर चुटीली टिप्पणियाँ इस वर्ष यहाँ देखने को मिली है !

GWALIOR TIMES हास्‍य व्‍यंग्‍य में पूरे वर्ष में केवल ८ पोस्ट प्रकाशित हुए, वहीं ठहाका में केवल ३ पोस्ट ! दीपकबापू कहिन पर यद्यपि इस वर्ष कुछ अच्छी हास्य-व्यंग्य रचनाएँ देखी गयी, तीखी नज़र पर हास्य-व्यंग्य की क्षणिकाएं लगातार देखने को मिली ।बामुलाहिजा पर कार्टून के माध्यम से आज के सामाजिक ,राजनैतिक कुसंगातियों पर पूरे वर्ष भर व्यंग्य बरसते रहे । कार्टूनिष्ट हैं कीर्तिश भट्ट । current CARTOONS ताज़ा राजनैतिक घटनाक्रमों पर आधारित कार्टून का महत्वपूर्ण चिट्ठा बनने में सफल रहा । कार्टूनिस्ट हैं -चंद्रशेखर हाडा जयपुर ।मजेदार हिंदी एस एम एस चटपटे और मजेदार चुटकुलों अथवा हास्य क्षणिकाओं का अनूठा संकलन बनने में सफल रहा इस वर्ष,वहीं चिट्ठे सम्बंधित कार्टून हिन्दी चिट्ठाजगत में हो रही गतिविधियों को कार्टून रूप में पेश करने की पूरी कोशिश करता रहा विगत वर्ष, किन्तु इस वर्ष यह पूरी तरह अनियमित रहा ।; SAMACHAR AAJ TAK पर आज की ताज़ा खबरें परोसी गयी मगर मनोरंजक ढंग से और यही इस ब्लॉग की विशेषता रही । अज़ब अनोखी दुनिया के काफी दिलचस्प रहा इस वर्ष ।

आईये अब मिलते हैं की बोर्ड के खटरागी से यानी अविनाश वाचस्पति से जिनके ब्लॉग पर हास्य-व्यंग्य और अन्य साहित्यिक समाचार खूब पढ़ने को मिले हैं इस वर्ष । यूँ ही निट्ठल्ला..… का प्रस्तुतीकरण अपने आप में अनोखा , अंदाज़ ज़रा हट के , आप भी पढिये और डूब जाईये व्यंग्य के सरोबर में ।डूबेजी के ब्लोगर श्री राजेश कुमार डूबे जी का कार्टून सामाजिक आन्दोलन की अगुआई करता रहा । दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान- पत्रिका पर भी कभी-कभार अच्छी और संतुलित हास्य कवितायें देखने कोमिलती रही , यह ब्लॉग सुंदर और सारगर्भित और स्तरीय है । hasya-vyang पर ब्लोगर हास्य-व्यंग्य के साथ न्याय करता हुआ दिखा ।

सितंबर-२०१० में हास्य-व्यंग्य का एक नया ब्लॉग आया,नाम है वक़्त ही वक़्त कमबख्त !हास्य कविता,व्यंग्य,शायरी व अन्य दिमागी खुराफतों का संकलन (Majaal)है यह !वर्ष-२०१० के आखिरी चार महीनों में इस ब्लॉग पर कुल८९ पोस्ट प्रकाशित हुए जो प्रशंसनीय है !

My Photoimages (4)किसी ने कहा है कि हंसना रवि की प्रथम किरण सा,कानन में नवजात शिशु सा ……हमारा वर्त्तमान इतना विचित्र है कि हमने अपनी सहज-सुलभ विशिष्टताओं को ओढ़ लिया है,आज हर आदमी इतना उदास है कि उसे हंसाने के लिए लाखों जतन करने पड़ते हैं !ऐसे में यदि कोई हमारे उदास चहरे पर हंसी की लालिमा फैलाने की दिशा में कार्य करता है या करती है तो प्रशंसनीय है !हास्य के ऐसे ही एक ब्लॉग से मैं रूबरू हुआ इस वर्ष ,नाम है हास्य फुहार ….इस ब्लॉग को संचालित करने वाली ब्लोगर का कहना है कि “मैं एक घरेलु महिला हूं , हंसो और हंसाओ में विश्वास रखती हूं।”

निरंतर पर भी आप व्यंग्य के तीक्ष्ण प्रहार को महसूस किया गया इस वर्ष । अनुभूति कलश पर डा राम द्विवेदी की हास्य-व्यंग्य कविताओं से हम रू-ब रू हुए । इसी प्रकार योगेन्द्र मौदगिल और अविनाश वाचस्पति के सयुक्त संयोजन में प्रकाशित चिट्ठा है हास्य कवि दरबार पर आपको मिली हास्य-व्यंग्य कविताएं, कथाएं, गीत-गज़लें, चुटकुले-लतीफे, मंचीय टोटके, संस्मरण, सलाह व संयोजन। विचार मीमांशा पर भी पढ़े गए इस वर्ष कुछ उच्च कोटि की हास्य रचनाएँ !

कहा गया है कि तसवीरें जब बोलती हैं तो शब्द मौन हो जाते हैं , प्रकंपित हो जाती हैं भावनाएं और व्यक्ति को समझाने के लिए फिर किसी भी माध्यम की आवश्यकता नहीं पड़ती ! इसका एक नज़ारा देखिये यहाँ-
२७ मई को आमिर धरती गरीब लोग पर अनिल पुसदकर !
कार्टून:- गूदड़ी के लाल की गुदगुदी… १४ अगस्त को काजल कुमार के इस कार्टून में छिपी है राजनीति की गहरी समझदारी ! वहीं २७ अगस्त को प्रकाशित कार्टून में राजनीति में आचरण का प्रदुषण !

Hasya Kavi Albela Khatri हास्य की चर्चा हो और हास्य कवि अलवेला खत्री की चर्चा न हो तो हिंदी ब्लॉगजगत की कोई भी वह चर्चा अधूरी ही मानी जायेगी, क्योंकि अलवेला खत्री टी वी जगत और मंच के मशहूर हस्ताक्षर है, किन्तु ब्लॉग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय है ! इस महत्वपूर्ण ब्लोगर की चर्चा मैं पूर्व में विस्तार से कर चुका हूँ इसलिए यहाँ केवल प्रसंगवश प्रस्तुत है उनका एक वीडियों-

चलते-चलते आपको बता दूँ कि नई दिल्ली में 27 जुलाई को हास्य-कविता की कार्यशाला आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय कविसंगम के अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल ने की। विषय पर व्याख्यान देने के लिए मंच के जाने-माने हस्ताक्षर श्री अरुण जैमिनी, डॉ. प्रवीण शुक्ला,ब्लोगर चिराग़ जैन, डॉ. प्रवीण शुक्ला तथा डॉ.विनय विश्वास मौजूद थे।

और अब हास्य से कुछ अलग हटकर –

इस कड़ी में हम आपको हिंदी ब्लॉगजगत के कुछ अनछुए पहलूओं
से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं …….विभिन्न तस्वीरों के मार्फ़त –
कुकुर, बिलार, मोर, सियार, तोता, मैना, हिरन, अनार; बरगद, भालू, सोना, जंगल, सेम की बाती, ख़ूंखार डकैत बराती; सबके बीच चौकन्ना अकेला भागता है आदमी, जैसे नींद और ऊब में घिरी, गिरी, चांदनी के पीछे दौड़ता हो चांद, बेसुध, भाग-भाग-भाग! २२ जनवरी-२०१० को प्रकाशित अजदक में औरत के आदमी की जातक-कथा से हम वर्ष कुछ यादगार पोस्ट की चर्चा की शुरुआत कर रहे हैं !लिव-इन-रिलेशनशिप को शीघ्र ही कानून के दायरे में लाना ही होगा ऐसा कहा दिनेश राय द्विव्व्दी ने २९ मार्च को अनवरत में …..!
image०६ मार्च को अंतर सोहिल पर एक आम भारतीय की पीड़ा परिलक्षित हुई रेलवे मंत्रालय के सन्दर्भ में, उनका कहना था की इस बार रेलमंत्री ने 117 रेलों की बढोतरी की है जी देश में। समय पर आने-जाने, सुविधा और सुरक्षा बढाने के बजाय हर साल कुछ रेल बढा दी जाती हैं। लम्बी दूरी की रेलों की पैन्ट्री (रसोई) में खाना बनाने के लिये शौचालय और सफाई के लिये प्रयोग होने वाला पानी उपयोग किया जाता है। रेलों की संख्यां बढने से बडे स्टेशनों पर रेल को प्लेटफार्म खाली ना होने के वजह से आऊटर पर रोका जाता है। नतीजा ट्रेन लेट, फिर उसके पीछे आने वाली ट्रेन लेट। रेलवे फाटक भी बार-बार बन्द करना पडता है, तो सडकों पर भी जाम की स्थिति बनी रहती है। अर्थात एक-आध बोगी ही बढा दी होती !
अभी वो तुतला कर बोलता है. मैं आजकल उसकी आवाज़ इस शे’र से साफ़ करा रहा हूँ –
“हर चीज़ कुर्बान है इश्क की खातिर, पर,
मादर-ए-वतन के लिए सौ इश्क भी कुर्बान है”
और देखता हूँ कि इससे उसकी जबान वैसे ही साफ़ होती है जैसे भगत सिंह अपनी बन्दूक की नली साफ़ करते थे.
…और ऐसा करते हुए मैं भगत सिंह से कहता हूँ कि “हम ‘आपके मुल्क’ से बेइन्तहां मुहब्बत करते हैं.” सोचालय पर सागर २६ मई को जन-गण मंगल दायक जय हे !
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क्या गरीब अब अपनी बेटी की शादी कर पायेगा ….? २९ मई को यह सवाल पूछा है संजय भास्कर ने आदत.. मुस्कुराने की पर !
…..एक कहानी गुरुदेव ने सुनाई थी कि एक कवि के पास उनके मित्र आये और बोले कि क्या दिन भर बैठे कविता करते रहते हो, कुछ काम क्यूँ नहीं करते? कविवर ने पूछा कि काम करने से क्या होगा? मित्र ने कहा कि उससे पैसा आयेगा. कवि जी ने कहा फिर? मित्र बोले कि फिर और काम करोगे, तो और पैसा..धीरे धीरे कुछ सालों में पैसा ही पैसा हो जायेगा. कवि बोले, फिर? मित्र ने कहा, फिर क्या, फिर रिटायर होकर आराम से बैठना और कविता करना. कवि मुस्कराने लगे कि सो तो मैं अभी ही आराम से बैठा कविता कर रहा हूँ फिर इसके लिए इतनी मशक्कत क्यूँ?? ०७ जून को उड़न तश्तरी पर सिगरेट छुडाने की मशीन और फिजूल के शोध को लेकर एक कवि की चिंता देखने को मिली समीर लाल समीर की कलम से –बेवजह की शोध: फिजूल खर्ची!!
कम टिप्पणियों का रोना रोने वाले, बात बेबात हो हल्ला मचाने वाले और हिन्दी ब्लॉगरी में गुणवत्ता की कमी की शिकायत करने वाले जरा इस साइट पर हो आएँ।


अर्थकाम
चुपचाप अपने काम में पूरे मनोयोग से लगे रहना यहाँ से सीखा जा सकता है। ऐसा कहा ०५ जून को गिरिजेश राव ने एक आलसी का चिठ्ठा पर !

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आईये अब आपको एक ऐसे ब्लॉग से परिचय करवाते हैं जो संभवत: हिंदी में अनूठा और अद्वितीय है ब्लॉग का नाम है मिसफिट:सीधीबात, ब्लोगर हैं गिरीश बिल्लोरे मुकुल ….हिंदी ब्लॉगजगत में होने वाली हर गतिविधियों पर इनकी तीखी नज़र रहती है और हर आम व ख़ास ब्लोगर के मन की बात पाठको के समक्ष दृढ़ता के साथ परोसना इनकी आदत है !ये अपने ब्लॉग के बारे में बड़े फक्र से कहते हैं कि “जी हां !मिसफ़िट हूं हर उस पुर्ज़े की नज़र में जो हर जो हर ज़गह फ़िट बैठता हो.आप जी आप और आप जो मिसफ़िट हो वो मेरी ज़मात में फ़िट है !!”ऐसे ब्लोगर को अतुलनीय और अद्वितीय न कहा जाए तो क्या कहा जाए ?ये हिंदी ब्लोगिंग में लाईव वेबकास्ट की प्रस्तुति करने वाले पहले ब्लोगर हैं !

रवीन्द्र प्रभात

और अंत में एक ऐसे ब्लॉग की चर्चा जहां पुराने भारतीय तस्वीरों को संकलित किया गया है,नाम है OLD INDIAN PHOTOS …..यह दुर्लभ ब्लॉग अंग्रेजी में है, किन्तु भारतीय सभ्यता-संस्कृति से जुडा होने के कारण भारतीयों को आकर्षित करता है ! उल्लेखनीय है कि इस ब्लॉग को तलाशने में श्री ललित शर्मा जी और श्री केवल राम जी का सहयोग रहा है, जो अभूतपूर्व है !

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ध्यान दें :

यहाँ मैं आपको एक स्पष्टीकरण दे दूं कि इस भाग में हास्य-व्यंग्य के साथ वर्ष के कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट की चर्चा करते हुए हिंदी के एक विशिष्ट ब्लोगर से भी आपको मिलवाया, ऐसा इसलिए कि इस भाग के साथ विश्लेषण का कार्य पूरा हो रहा है, केवल एक भाग और प्रकाशित होना है जिसमें हम वर्ष के १०० महत्वपूर्ण ब्लोग्स,१०० परुष ब्लोगर्स,१०० नवोदित ब्लोगर्स और १०० महिला ब्लोगर्स के नाम की घोषणा करेंगे परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण के आधार पर ……!

…….जारी है विश्लेषण, मिलते हैं एक विराम के बाद

परिकल्पना ब्लॉग से साभार

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कचेहरी बम कांड धमाकों की पुन: जांच की आवश्यकता उत्तर प्रदेश में लखनऊ और फैजाबाद की कचेहरियों में बम विस्फोट हुए थे। उस समय 25 दिसम्बर 2007 को ए.टी.एस, एस.टी.एफ और उच्च पुलिस अधिकारी बृजलाल ने अखबारों में अपने बयान प्रकाशित कराये थे जिसमें कहा गया था कि प्रारम्भिक जांच से पता चलता है कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद और गोकुल चाट हाउस पर जो धमाके किये गए। उनकी कार्यविधि लखनऊ और फैजाबाद में हुए धमाकों से मेल खाता है। दोनों धमाकों में एक जैसी बैटरी व घड़ियाँ व धमाके खेज माद्दे इस्तेमाल किये गए थे. फैजाबाद में हुए धमाके में प्रिंस टेबल अलार्म घडी का इस्तेमाल किया गया था उसी कंपनी की घडी हैदराबाद धमाके में भी इस्तेमाल की गयी थी। हैदराबाद में धमाके के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया गया था। स्वामी असीमानंद ने अपने 164 सी.आर.पी.सी के बयान में यह स्वीकार किया है कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद में धमाका उसी ने किया था और उसी तर्ज पर फैजाबाद और लखनऊ की कचेहरियों में बम धमाके हुए हैं तो हो सकता है कि हिन्दुवत्व वादी आतंकी संगठनो ने इन बम कांडों को किया हो। इन बम कांडों में 12 दिसम्बर 2007 को मोहम्मद तारिक को आजमगढ़ से और 16 दिसम्बर 2007 को मोहम्मद खालिद को मडियाहूँ से उठा कर एस.टी.एफ ने 22 दिसम्बर 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन के पास आर.डी.एक्स के साथ फर्जी गिरफ्तारी दिखाई थी। इसलिए आवश्यक यह है कि न्याय देने के लिए कचेहरी सीरियल बम विस्फोट कांड की पुन: जाँच की जाए और दोषी व्यक्तियों को अविलम्ब रूप से गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दी जाए। फर्जी गिरफ्तारी दिखाने वाले पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ भी समुचित कार्यवाई की जाए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओ की पुनरावृत्ति न हो।

सुमन

लो क सं घ र्ष !

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माननीय उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग में पी जे थामस की नियुक्ति के सम्बन्ध में विधिक सवाल उठाएं हैं। जिस पर केंद्र सरकार ने कहा कि आरोप पत्र लंबित होने से कोई व्यक्ति अपराधी नहीं हो जाता है। सरकार जब चाहे अपने मन से हर मामले की अपनी अलग व्याख्या कर लेती है। एक शस्त्र लाईसेंस लेने में यदि आपके ऊपर कोई मुकदमा अगर चला है और उसमें आप दोष मुक्त भी हो गए तो भी आपको नहीं मिलेगा। गुंडा एक्ट की कार्यवाई या जितने भी निरोधक कानून हैं उनमें दोषमुक्त वादों के आधार पर भी कार्यवाई सरकार करती है। दोहरा माप दंड अपनाना सरकार का अपना धर्म है किन्तु ए राजा से लेकर शरद पवार, कपिल सिब्बल, ममता बनर्जी भ्रष्टाचारियों व अपराधियों के सरगना हैं। जनता इनका कुछ नहीं कर सकती है क्यूंकि यह सब विधि निर्माता भी हैं। पी.जे थामस से लेकर ए.पी सिंह या भारतीय प्रशासनिक सेवा (भारतीय भ्रष्टाचार सेवा) के अधिकारियों के कारनामे जगजाहिर हैं। अधिकांश : इस सेवा के अधिकारीयों की अगर आर्थिक स्तिथि की जांच कराई जाई तो सफेदपोश अपराधी ही निकलेंगे। ए रजा ने कहा भी है कि मैंने कोई अकेले फैसला नहीं लिया है कैबिनेट का फैसला है। अब इस तरह से सारे लोग भ्रष्टाचार में शामिल हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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(झूठ तो बोले मगर झूठ का सौदा न करें )

ए राजा की गिरफ्तारी के बाद बच्चों ने नारा लगाया सिब्बल चोर की – खुल गयी पोल। माननीय दूरसंचार मंत्री हमेशा ए राजा के पक्ष में बयान जारी करते रहे कि ए राजा निर्दोष हैं कोई घोटाला नहीं हुआ है। 2-जी स्पेक्ट्र्म के आवंटन में सरकार गंगा की तरह से पवित्र है लेकिन जब देखा गया तो गंगा में पवित्र पानी की बजाय सीवर का पानी था। जब सी.बी.आई ने ए राजा के साथ भारतीय भ्रष्टाचार सेवा के दो अधिकारीयों को भी गिरफ्तार कर लिया तो स्तिथि जनता के सामने ही स्पष्ट हो गयी। कपिल सिब्बल साहब ने विदेशी शिक्षा माफियाओं के कहने से पूरी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है। स्कूलों में छात्रों की फीस बढ़ा दी है। विदेशी विश्विद्यालयों को आमंत्रित भी किया है। विदेशी शिक्षा व्यवस्था लागू करने के लिए यह आवश्यक था कि देश की वर्तमान शिक्षण व्यवस्था को ध्वस्त करना। इस कार्य को बखूबी कर दिया है।
दूरसंचार मंत्री की हैसियत से अभी हाल में उनका बयान आया है कि मोबाइल की काल दरें महंगी हो जायेंगी। जैसे कृषि मंत्री शरद पवार अपना मुंह खोलते हें तो महंगाई बढ़ने लगती है उसी तरह से सिब्बल साहब को जो विभाग मिलता है उसका वह सत्यानाश करने में लग जाते हैं। श्री सिब्बल में यदि जरा सा भी जमीर हो तो तुरंत मंत्री पद से इस्तीफा दे दें।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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महाशक्ति की यातायात व्यवस्था

बरेली आई.टी.पी में 416 पदों की भारती हेतु लगभग 11-12 राज्यों से लगभग दो लाख नवजवान आये। यातायात व्यवस्था चुस्त दुरुस्त न होने के कारण बीस नवजवान दुर्घटनाग्रस्त होकर मर गए। उसके बाद बेरोजगार नवजवानों ने उपद्रव मचाया।
हम बहुत खुश होते हें कि जब कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष हमको महाशक्ति कह देता है। हम अपने गिरहबान में कभी झाकने की कोशिश नहीं करते हें कि दो सौ रुपये किलो लहसुन बिक रहा है। करोडो की संख्या में नवजवान बेरोजगार हैं। भूख से लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं। राजनेता भ्रष्टाचार में स्नान कर रहे हैं। नौकरशाह व्यवस्था बनाने के नाम पर तरह-तरह की लूट कर रहे हैं।
इससे पूर्व में भी विभिन्न भर्तियों में बेरोजगारों की संख्या अधिक होने के कारण हादसे हुए हैं राज्य सरकार व केंद्र सरकार किसी भी हादसे के बाद चेती नहीं है। जब भर्तियाँ होनी हैं लाखो लोगों को पहुंचना है तो उसके लिए पहले से विशेष व्यवस्था क्यों नहीं की जाती है। हर बार राजनेता घडियाली आंसू बहा कर अपने फर्ज से मुक्त हो लेते हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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