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Archive for जून 14th, 2011

नेता रामदेव यादव

भ्रष्टाचार समाप्त करने के मुद्दे को लेकर नेता रामदेव यादव ने भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। बगैर यह समझे बुझे की भूख हड़ताल करने के लिये सिर्फ योगी होना ही आवश्यक नहीं है। उसमें महायोगी के गुण होना भी आवश्यक है। नेता रामदेव यादव ने रामलीला मैदान में पुलिस को देखते ही भीगी बिल्ली की भांति भागकर औरतों के झुण्ड में शामिल होकर उनकी ही पोशाक को धारण कर लिया था। भूख हड़ताल में भूख हडताली मात्र पानी व नीम्बू का ग्रहण कर सकता है किन्तु नेता रामदेव यादव ने शहद जैसे सम्पूर्ण भोजन को भी ग्रहण करना स्वीकार कर लिया था। जैसे दूध आप पीते रहे और कहे कि हम भूख हड़ताल पर हैं तो दूध भी सम्पूर्ण भोजन है और दूध पी लेने के बाद किसी अन्य भोजन की आवश्यकता नहीं रह जाती है। 6 दिन की भूख हड़ताल में नेता जी की योगी जैसी काया भोगी जैसी काया में परिवर्तित हो गयी। अस्पताल में नेता जी को भर्ती होना पड़ा। ग्लूकोज चढ़ाया जाने लगा। ग्लूकोज भी सम्पूर्ण भोजन है ग्लूकोज चढ़ने के बाद सम्बंधित व्यक्ति को किसी भी भोजन की आवश्यकता नहीं रह जाती है।
नेता रामदेव यादव जी आप मक्कड़ योग के स्वामी हो सकते हैं भूख हडताली नहीं। भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर भूख हड़ताल कर आप अपने कद को बढ़ाना चाहते थे किन्तु शारीरिक काया ने आपका साथ नहीं दिया और आपकी योगी की छवि भी धूमिल हुई है। सरकार ने जैसे ही पतंजलि योग पीठ की तथा नेता रामदेव जी आपकी कंपनियों की जांच शुरू कर दी वैसे ही देश की जनता को लगने लगा था कि आप भ्रष्टाचार के खिलाफ मुद्दे से भागने वाले हैं और रविशंकर का बहाना लेकर आपने भूख हड़ताल खत्म कर दी।
हमारे छात्र जीवन उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने दारुलसफा का गेट कोप भवन के रूप में जाना जाता था। वहां बहुत सारे मक्कड़ योगी अपनी मांगों के लिये भूख हड़ताल करते रहते थे और जब उनके स्वास्थ्य की जांच होती थी तो भूख हड़ताल के बावजूद उनका वजन बढ़ जाता था। हाँ कुछ लोग जो महायोगी होते थे वह वास्तव ,में भूख हड़ताल करते थे और लगभग दस दिनों में उनका वजन काफी गिर जाता था और पेशाब में किटोन नामक पदार्थ आने लगता था तब सरकार समर्थकों पर डंडेबाजी कर भूख हडताली को अस्पताल ले जाती थी। वहां पर भूख हडताली ग्लूकोज चढ़वाने से मन कर देता था तो कोई भी डॉक्टर जबरदस्ती ग्लूकोज नहीं चढ़ाता था तब पुलिस अंतर्गत धरा 309 आइ.पी.सी वाद की प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखकर तुरंत न्यायलय में पेश कर जेल रवाना कर देती थी और वहां पर जेल का डॉक्टर भूख हडताली की जीवन रक्षा हेतु जबरदस्ती ग्लूकोज चढ़ाता था किन्तु आप जैसे डरे, सहमें, बेबस, भूख हडताली के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हमारे समय के भूख हडताली न पुलिस से डरते थे, न अस्पताल वालों से डरते थे और न जेल में ही किसी से डरते थे कई बार जेल में भी लाठी चार्ज हो जाता था। भारत सरकार के सलाहकार भ्रष्टाचार या रिश्वत को वैध बनाने के लिये प्रयासरत है क्योंकि वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु रिश्वत को वैध बनाने के लिये बहस चला रहे हैं और इस सम्बन्ध में उन्होंने सरकारी पोर्टल पर आलेख लिखे हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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