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Archive for जून 1st, 2020

जो सूखे है होंठ उनकी लाली को वोट दो
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
धोखे में है गरीबी घर सेठ भर रहें है, सिसकते समाजवाद की बहाली को वोट दो,
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
 पीढियों से मेहनत लुटती रही है जिनकी,
उन शोषितों कीअब खुशहाली को वोट दो की।
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
मजदूर का मुकद्दर गर्दिश को मोडते है,
एक जुट हो पूंजीपति की पामाली को वोट दो,
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
है क्रान्ति जिनका पेशा और इंकलाब मंजिल,
उनकी बनायी राहें उजाली को वोट दो,
 मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
सब बुलबुले चमन की हो जिसके लिए बराबर,
हर शाख के मुहाफिज माली को वोट दो,
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
उस ओर झूठें वादे, है गद्दी मकसद ,
मजूरो की अपनी राहें निराली को वोट दो,
मेहनतकशों के हंसिया और बाली को वोट दो।।
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ख्वाहिश
मानव द्वारा न मानव का शोषण हो अब
न अभावों में जीवन किसी का कटें।
अपनी मेहनत का फल सबको पूरा मिले
और पूंजी का शासन धरा से हटे।।
जुल्म की रात काली खतम जल्द हो
एक ऐसी सुबह की यहाँ पौ फटे।
जिसमें इन्सां बराबर हो दुनिया के हो सब
राज “शोषक” का सारे जहाँ से मिटे।।
समर्पण
दर्द मेहनत कशों का समझते है जो
दूर करने का जिनने है प्रण कर लिया।
करते सिजदा न पूंजी की ताकत का जो
और शोषण मिटाना हैं तय कर लिया।।
राज मजदूर का अब हो कायम यहां
लक्ष्य जीवन का जिनने बना है लिया।।
जिनकी नजरों में श्रम का ही सम्मान है
अपनी रचना उन्हीं को समर्पित किया।।
-श्याम बिहारी वर्मा
1988
दो शब्द
साथी श्याम बिहारी वर्मा द्वारा रचित प्रस्तुत पुस्तक एक प्रशंसनीय प्रयास है।
नौटंकी मेहनत कश जनता का अपने प्रदेश और देश में मनोरंजन का पूर्व में सर्वाधिक प्रचलित साधन रहा है।
रुस में जालिम जार शाही का अंत किस प्रकार हुआ और विश्व में प्रथम मजदूर – किसान राज्य कैसे कायम हुआ इस नौटंकी का विषय है जो रोचक भी है और अत्यंत शिक्षाप्रद भी।
इतिहास की इस सच्ची घटना को इस पुस्तक में अत्यंत सरल ढंग से जन भाषा में दर्शाया गया है।
नौटंकी के दर्शक एंव पुस्तक के पाठक इससे
मनोरंजन के साथ ही शिक्षा भी ग्रहण करेंगे
ऐसा मेरा विश्वास है।
मेहनत कश जनगण के आंदोलन को प्रस्तुत पुस्तक से बल मिलेगा।
राम चन्द्र बक्श सिंह
विधायक
नवाबगंज बाराबंकी
नेता कम्युनिस्ट विधायक दल उ प्र
अध्य्क्ष किसान सभा उत्तर प्रदेश
साथियों की ओर से
सन 1960 के दशक के उत्तरार्द्ध में जब बाराबंकी की कम्युनिस्ट पार्टी अपना जनाधार लगभग खो चुकी थी तथा जिला कमेटी वैचारिक बहसों का मंच मात्र बन कर रह गई थी जन कार्रवाईयां लगभग समाप्त हो चुकी थी साथ ही पार्टी का एक जुझारू तबका नक्सलवाद की चपेट में आ गया था ठीक उसी समय बाराबंकी जनपद की कम्युनिस्ट कतारो में साथी राम चन्द्र बक्श सिंह शामिल हुए।
उनके प्रयासों से बाराबंकी की कम्युनिस्ट पार्टी ने जन पार्टी का रुप धारण किया। उनके आवाहन पर जिले के अनेक उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान पार्टी की कतारों में शामिल होने लगे।
साथी श्याम बिहारी वर्मा उनमें से एक थे।
जनपद की तहसील फतेहपुर में साथी वर्मा ने पार्टी को नया जीवन प्रदान किया और लगभग नए सिरे से पार्टी का गठन किया। तहसील फतेहपुर में पार्टी में आज जो नौजवान तबका दिखाई देता है तथा उच्च शिक्षा प्राप्त जो साथी तहसील की पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं वह सभी के सभी साथी श्याम बिहारी वर्मा के प्रयासों की देन है।
नौटंकी के माध्यम से साथी श्याम बिहारी वर्मा ने विश्व क्रान्तिकारी आन्दोलन की सबसे प्रमुख घटना को विचारों सहित मेहनतकश जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
नौटंकी को अगर माना जा सके तो यह साहित्य की एक ऐसी विधा है कि इसके माध्यम से मार्क्सवादी विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास अभी तक नहीं किया गया है।
अभी यह प्रारम्भ है यदि यह सिलसिला आगे और चल सका तो गांवों में आए दिन “लैला मजनूं” से लेकर “सुल्ताना डाकू” तक की नौटंकियों का मंचन कर मनोरंजन का जो साधन मुहैया किया जा रहा है उसका स्थान देर सवेर प्रगति शील क्रान्तिकारी नौटंकियां ले सकती है जो निश्चित रूप से मेहनतकश जनता तक क्रान्तिकारी विचारों को पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।
आशा है कि यह पुस्तक शोषित उत्पीडित जनता को आंदोलित करने मे मदद करेगी।
राम प्रताप मिश्र
सदस्य जिला कार्यकारिणी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
बाराबंकी
डां अशोक कुमार सिंह
सदस्य जिला कौंसिल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
डां राम लखन सिंह
सदस्य जिला कार्यकारिणी
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
बाराबंकी
डां समर सिंह
सदस्य जिला कौंसिल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
बाराबंकी
नुरुल हसन
मंत्री
शाखा बेलहरा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
कवि
शीश नवाकर मार्क्स को लै एंगेल्स का नाम
लेनिन का किस्सा लिखूं क्रि मेहनत कश्न प्रणाम।
मेहनत कशन प्रणाम करो
और उनको शीश झुकाओ
जिनके बाजू की मेहनत की रोटी तुम भी खाओ।
कार्ल मार्क्स ने जिन्हें जगाया
तुम उनको गले लगाओ
तभी मार्क्स के कहे रास्ते पर
चल मंजिल को पाओ।
व्यक्ति नहीं बदलो निजाम
शासन का मार्ग बताते हैं
उधर रुस के लेनिन के
भाई यूं अकुलाते है।
सारी आफत की जड है जार
यह बात समझ पाते हैं
और वहां के कुछ दिलेर
सम्राट पे हाथ उठाते हैं।
लेनिन के भाई संग उनके
फांसी की सजा पा जाते हैं
तब बालक लेनिन उसी दिवस
मां से यूं फरमाते है।
लेनिन
मां अब तो बादशाह जार के अत्याचार बर्दाश्त के बाहर हो रहे हैं।
लेनिन की मां
बेटा इस तरह चिंता करने से कोई फायदा नहीं है, जो होना था वह तो हो चुका। देखो तुम्हारे भाई ने इन जुल्मों से जनता को छुटकारा दिलाना चाहा तो उन्हें सजा- ए- मौत दे दी गई।
लेनिन
यही तो मैं भी सोच रहा हूँ।
लेनिन की मां
बेटा तुम अब बड़े हो कर इन अत्याचारों को मिटाने के लिए कुछ उपाय जरूर करना।
लेनिन
अब इंतजार करने का वक्त कहाँ है मां।
भाई असमय ही हमसे जुदा हो गए, हाल फिर भी जमाने का वैसा ही है।
उनके अधूरे रहे काम को, जल्द पूरा करें वक्त कैसा भी है।।
लेनिन की मां
उम्र पढने की बेटा तुम्हारी अभी, क्रान्तिकारी बनो वक्त आया नहीं।
पढके जिस दिन जवां बन के आओगे घर, इक मिनट भी करुंगी मै जाया नहीं।।
होगी खुशहाल जनता सभी रूस की, मार्ग तुमने जो मार्ग अपना बनाया सही।
जिंदगी अपनी देना लगा दांव पर, पर रहे रूस में जुल्म छाया नहीं।।
शेष ……….

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