Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘कविता’ Category


पार जा सकेंगे हम ,सोच ही निराली है ।
आग का समंदर है नाव मोम वाली है ।

हर तरफ़ अंधेरो की क्या करें शिकायत हम –
लौ दिये की गिरवी है कहने को दिवाली है ।

खून कैसे बिखरा है माँ के श्वेत आँचल पर-
बापू की अहिंसा आज तक सवाली है।

घी घडो में लिपटा है और पेट खाली है-
हक़ की बात करता ,कौन ये मवाली है।

कितने घर अंधेरो में सरहदों ने कर डाले-
हुक्मरां के कोठो पर आज भी दिवाली है ।

वो जवाँ से कहते है कोख सूनी होती है-
इस में तो गोवा है कुल्लू है मनाली है ।

जिंदगी गजल जैसी, जवानी तो यू समझें
आंसुओ की दौलत तो ‘राही’ने सम्हाली है।

 

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ‘राही’

Read Full Post »

ङाक्टरेट से सम्मानित , शिक्षामंत्री एस .एम पटेल है।
के.के.एन.एफ़ डिग्री उनकी ,उई खींच -खाँच नाइन्थ फ़ेल है॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

आफिस मा लागत छुट्टी है,सब देख रहे है क्रिकिटिया ।
बाबू औ अफसर दूनौ मिलि, जनता कै खड़ी करैं खटिया ॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

स्वीटर बुन रही मास्टरनी , लरिकउनी गप्पे मार रही।
मास्टरनी लरिकउनी मिलिकै,विद्या कै अरथी निकार रही॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

मास्टर जी कुर्सी पर सोवैं ,लरिकै खेले गुल्ली डंडा।
खुल गवा पोल पढ़ाई कै ,जब पहुंचे इस्पिट्टर पंडा॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

जब मिला नतीजा कै कारड़,लरिकउनेव कै फूटा भंडा ।
तब बप्पा किहिन धुनाई खूब,जब देखीं सब अंडै -अंडा ॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

दै रही वजीफा गवरमिन्ट औ,पूरी खीर खियावत है।
देखै पिक्चर ,फांकै पुकार ,सब लरिका मौज उडावत है॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

-मोहम्मद जमील शास्त्री

Read Full Post »


मीत संग संग चले इस तरह

भीड़ में हम अलग रह गए

सूनी कुटिया के आँगन में ज्यों

दीप जलते जले रह गए॥

गुम्बदों ने जो साये किए,

झोपडी झूम कर जल उठी

उनको महलो के साये मिले,
धूप में हम सभी रह गए॥

नत नयन से निखरती कला ,
हास अधरों पे छिटका हुआ।
नूपुरों की खनक सुन के भी
सब अधूरे सपन रह गए ॥

सिन्धु मंथन का उद्देश्य था
सबके अधरों को अमृत मिले।
जो कनोर रहे वास जी पा गए ॥

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ‘राही’

Read Full Post »

काल्हे उदघाटन भवा रहै , बहि गवा आज पुल पानी मा ।
केतनेव जन सरग सिधार गए,बचपन औ भरी जवानी मा ॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

छन्नूमल गरम मसाला मा, घोडी कै लीद मिलाय रहे ।
इस्पिट्टर कै मुट्ठी गरम करैं ,औ मन ही मन मुस्काय रहे॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

नौकरी के खातिर बेटवो अब , बप्पा कै गटई काटि लेई।
गहना पैसा हथियाय बहू,सासू कै टेटुवा दाबि देई ।

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

लखनऊ मा पढ़ती मिसरा जी की , नातिन बिरिज किसोरी है।
अम्मा पूछैं बिटयौनी से, ई छोरा है कि छोरी है॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

मोहम्मद जमील शास्त्री

Read Full Post »

रमिनवा कै लरिका बी .ऐ फ़ेल ,बंकी मा थान्हा प्रभारी है।
समसदवा एम॰ए , पी॰एच॰ङी॰ उहैं करत उ चौकीदारी है ॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

उ उतनै बड़ा आफिसर , वहिका जेतनै भारी पौव्वा है।
नाही तौ केतनौ पढ़ा लिखा ,मोची है कउनौ नौव्वा है ॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

दाँतन मा पीड़ा बहुत रहै। हम गउवें देखावै अस्पताल ।
मुल हमका का मालूम , इहाँ पर ब्याध बिछाये बैठ जाल॥
डॉक्टर हमका का मालूम बहु ङेरवाइस , सौ रुपया गाँठिस झाड़ लिहिस।
हम दाँत बतावा ऊपर कै, उ नीचे केर उखाड़ दिहिस॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

बाराबंकी से टिकस लिहेउँ , कउनौ विधि रेल पर जइस चढ़ेउँ ।
पीछे से याक रेला आवा , हम त्रिशंकु अस लटक गएऊ ॥
उई भीड़ मा कउनौ हमरी औ , केतनेव कै जेबिन काटि दिहिस।
इए तिकाश है फर्जी धमकाइस , टीटिव सौ रुपया गाँठि लिहिस॥

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

मोहम्मद जमील शास्त्री

Read Full Post »

सत्ता की लाठी से गुंडे ,जबरन भैंसी हथियाए रहे
न्याय के खातिर घिसई काका , कोर्ट मा घिघियाये रहे

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

धूर्त सियारऊ गीता बांचै ,बैठ बिल्लैया कथा सुन रही
भेङहे करें संत सम्मलेन,गदहन की घोड़ दौड़ होए रही

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

नंग धड़ंग नन्हे मुन्ने, लोटी धूल गुबारन मा
टामी मेम की गोद मा सोवैं , घूमे .सी कारन मा

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

ठगबटमार ,छलीकपटी ,अब पहिरैं साधुन कै चोला
मुंह से रामराम उच्चारैं ,बगल मा दाबे हथगोला

यहि देश कै भैया का होईआओ हम….

-मोहम्मद जमील शास्त्री

Read Full Post »


यूँ भी रस्मे वफ़ा हम निभाते रहे
चोट
खाते रहे मुस्कुराते रहे

दिल की महफिल सजायी थी हमने मगर
वो
रकीबो के घर आतेजाते रहे

गए वो तसस्वुर में जब कभी
मीर
के शेर हम गुनगुनाते रहे

देखकर जिनको चलने की आदत थी
ठोकरे
हर कदम पर वो खाते रहे

जब भीराहीबुरा वक्त हम पर पड़ा
हमसे अपने ही दामन बचाते रहे

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेलराही

Read Full Post »


जितना बढ़ चढ़ के आइना जाने॥
हुस्न क्या शै है कोई क्या जाने॥

किस की जुल्फों को छूके आई है
महकी
महकी हुई हवा जाने

मौत किसको मिली हयात किसे-

तुझसे बेहतर तेरी अदा जाने

ऐश वालो से पूछते क्या हो
लज्जत गम तो ये गदा जाने

यु तो रहते हो साथ साथ मगर
कब
बिछड जाए वो खुदा जाने

किस कदर तुमसे प्यार है भगवन
ये
मेरी अपनी आत्मा जाने

मैं वोराहीहूँ जो फजले खुदा
रास्ता
सिर्फ़ प्यार का जाने

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेलराही

Read Full Post »


कभी कामना कामना को लजाये॥
चलो तृप्ति के द्वार डोली सजाएं॥

मुझे आइना जो दिखाने लगे वो-
कई सूरतो में दिखी लालसायें॥

तटों को बहाने चली धार मानी
मिटी रेत के गांव की भावनाएँ॥

उडे आंधियो के सहारे -सहारे –
मिटाती रही जिंदगी वासनाएं॥

उसी राह को खोज ले पस्त ”राही”
जहाँ जीव की माफ़ होती खताएं॥

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल ”राही”

Read Full Post »


उम्र की
सीढिया चढ़ते हुए,
जाने कब
किस सीढ़ी पर
छूट गया बचपन
मन पर
बङ्प्पन के खोल चढाकर
चला आया हूँ मैं
इतनी दूर
फिर भी क्यों टीस उठती है
बारबार,
उस बिछङे हुए बच्चे की याद?
बीते हुए बचपन में
फिर फिर लौट जाने की
क्यों होती है चाह?
अकेले में,
जब कभी आईने के सामने,
खुशी में त्यौहार में,
कभीकभी भीड़ के सामने,
कहाँ से प्रकट हो जाता है वह?
पलके झपकते,
मुहँ चिढाते ,
बच्चो के साथ
फिर से बच्चा बना देता है मुझे
जब भी कोई खुशी असह्य दुःख गहरा,
उतार देता है बङप्पन का नकाब
पल दो पल के लिए
बाहर निकल आता है बचपन
लेकिन बाकी सारे समय,
दिल के किसी अंधेरे कोने में
किसके डर से छिपा रहता है वह?
छटपटाता ,कसमसाता रहता है बचपन
अनूप गोयल

Read Full Post »

« Newer Posts - Older Posts »