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Archive for the ‘साक्षात्कार’ Category

महंत विनयदास : इन दिनों हिंदू और उसके विभिन्न आनुषांगिक संगठनो को बिना प्रमाण के आतंकवादी घोषित किया जा रहा हैक्या आप को नही लगता की हमारी सरकार इस दृष्टि को अपना कर अल्पसंख्यको को मरहमलगा उनका वोट बैंक हथियाने की साजिश कर रही है?

मुद्राराक्षस:यह बात पूरी तरह ग़लत हैआज से दो साल पहले नांदेड का उदाहरण देते हुए मैंने लिखा था की हिंदू संगठन खतरनाक हो चुके है आज सारे प्रमाण सामने हैनांदेड में बम बनाते वक़्त का विष्फोट हो या कानपूर का या फिर मालेगाव का,इन सभी में मौके पर हिंदू युवक ही मरेउन स्थानों से भारी मात्र में बम बनने की सामग्री ,इस्लामी दाधिया,टोपिया और लुन्गीय बरामद हुईयानी की हिंदू युवक मुस्लिम वेश बनाकर विष्फोट करते थेमालेगाव विष्फोट में जो मोटरसाईकिल इस्तेमाल हुई थी ,वह किसी मुस्लमान की तो नही थी? और अब किस तरह का प्रमाण चाहिए ,हिंदू आतंकवाद को सिद्ध करने के लिएइस देश के सारे विस्फोटो की जांच होनी चाहिए
लेकिन होता यह है की ऐसे विस्फोटो की साड़ी जांच पड़ताल गड्ढे में दबा दी जाती हैऐसी स्तिथि में आतंकवाद के सच को सामने लाना भी जटिल होता जा रहा है

महंत विनयदास :उडीशा के कंधार में अल्पसंख्यक इसाइयो पर जिस तरह से कहर ढाया गया उसमें हिंदू संगठनऔर सरकार में कौन ज्यादा दोषी है ?

मुद्राराक्षस : दोनों हीक्योंकि उङीसा की सरकार भी तो हिंदू संगठनो के सहयोग से चल रही हैइसाइयों के विरूद्व वहा की हिंसा यदि पुलिस चाहती तो कुछ ही घंटो में रुक जातीलेकिन ख़ुद नवीन पटनायक चाहता रहा की वह भी नरेंद्र मोदी बन जाए

महंत विनयदास : क्या कारण है की जबजब चुनाव या राष्ट्रिय पर्व नजदीक आते है आतंकवादी गतिविधिया बढ़जाती है और मीडिया उनका डरौना दिखलाता है,आखिर क्यों ?उसके पहले या बाद में क्यों नही?

मुद्राराक्षस: ये सच नही हैपहले और बाद में भी यही होता रहा हैयह अलग बात है की जब चुनाव आते है तो लोग सब कुछ चुनाव से जोड़कर छुट्टी पा लेते है

महंत विनयदास :इधर जितने भी विष्फोट या विभिन्न देशो के राष्ट्राध्यक्षों ,प्रधानमंत्रियो की जो हत्याएँ हुई हैउनमें अक्सर C.I.A को जोड़ा जाता रहा हैइस सन्दर्भ में कुछ कहें

मुद्राराक्षस: C.I.A का काम बहुत लंबे समय तक पूरी दुनिया में बहुत कहाराब रहा हैख़ुद अमेरिका में भी C.I.A के विरूद्व काफी लिखा गया हैइधर C.I.A ख़ुद चर्चा में इसलिए नही है की उसकी भूमिका ख़ुद अमेरिकी सरकार अदा करती रही है

महंत विनयदास : कई विद्वानों ने मुस्लिम उलेमाओ,देव्बंदो को भारत की आजादी की लडाई में अग्रिम पंक्ति में माना हैकिंतु आज उन्ही दारुल उलूम देवबंद को आतंकवादी कहा जा रहा भाईउन्हें साजिशन बदनाम किया जारहा है या आज उनकी भूमिका बदल गई है

मुद्राराक्षस: यह आरोप बिल्कुल ग़लत हैदेवबंद एक अच्छी इस्लामिक वैचारिक संस्था हैउसी तरह जिस तरह वाराणसी में विद्वत परिषद् है

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”साम्प्रदायिकता तर्क के बजाये जोर जबरदस्ती और सामाजिक हिंसा पर आधारित होती है। ”
— मुद्राराक्षस

महंत विनय दास:वर्तमान परिवेश में आप साम्प्रदायिकता को किस तरह परिभाषित करना चाहेंगे ?

मुद्राराक्षस:समाज में जब विचार प्रक्रिया में रोगाणु पैदा होते है तो वे साम्प्रदायिकता का रूप ले लेते हैजैसे मनुष्य बीमार होता है वैसे ही समाज में अस्वास्थ्य का लक्षण साम्प्रदायिकता होती है

महंत विनयदास: समाज के लिए हिंदू साम्प्रदायिकता ज्यादा घातक है या मुस्लिम?

मुद्राराक्षस:किसी प्रकार की कोई भी साम्प्रदायिकता समाज के लिए घातक होती हैक्योंकि साम्प्रदायिकता तर्क के बजाय जोर जबरदस्ती और सामाजिक हिंसा पर आधारित होती है

महंत विनयदास : मुझे लगता है इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया दोनों ने मात्र मुस्लिम को ही आतंकवादी के तौर पर पेश किया हैक्या आप को नही लगता की इस सन्दर्भ में मीडिया वालो ने अपनी अति रंजित भूमिका निभाई है ?

मुद्राराक्षस:यह बात तो सच हैसमाज की तरह मीडिया में भी अर्धशिक्षित और अल्प शिक्षित लोगो की बहुतायत हैसमाज को लेकर उनके विचार गंभीर नही होतेफूटपाथी विचारधारा ही उन पर हावी होती हैयही वजह है की वे विवेक से काम लेते नही दिखतेमीडिया के अधिकांश लोग चूंकि हिंदू हैइसलिए वे एक हिंदू की तरह ही सोचते है और ये नतीजे निकाल लेते है की जो हिंदू नही है वह ग़लत हैइसी आधार पर उन्होंने मुसलमानों को सांप्रदायिक मान लिया है

महंत विनयदास :आज यह आम धारणा बन कर रह गई है की हिन्दी पत्रकारिता करनी है तो हिंदू बनकर करना होगा,ठीकउसी तरह जिस तरह से उर्दू पत्रकारिता मुसलमान बनकर की जाती हैक्या आप को नही लगता की आज प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया अपनी अतिवादी भूमिका के कारण जनता की दृष्टि में अविश्वसनीय होते जा रहे है ?

मुद्राराक्षस:अविश्वसनीयता की बात तो सही है आप कीलेकिन उनका महत्त्व इसलिए बना हुआ है की अर्ध्शिक्षा या कुशिक्षा बहुत प्रभावी भूमिका अदा करती हैगहरे विचार समाज में लोकप्रिय नही होतेयही स्तिथि मीडिया में काम करने वाले लोगो की भी होती हैयही वजह है की वे अधिकांशत: सतही रह जाते हैसामाजिक चेतना तो उनमें होती है और नही वे सामाजिक चेतना दे पाते है

महंत विनयदास:क्या आप को लगता है की समाज के शिक्षित होने के साथ समाज की यह तस्वीर बदल जायेगी?

मुद्रराक्षस:अर्ध शिक्षा किसी भी युग में समाप्त नही होतीइतिहास में किसी युग में समग्र शिक्षित समाज का उदाहरण नही मिलता है समाज अधिकांश:लोकप्रियता पर चलता हैअन्तर यही होता है की अगर समाज को चलने वाला महत्वपूर्ण विचारक है तो उसकी बात नीचे तक जाती है. आज समाज में जो लोग ऊपर है वे ख़ुद भी वैचारिक दृष्टि से अर्ध शिक्षित या कुशिक्षित हैइसलिए समाज में अर्धशिक्षित या कुशिक्षित ही लोकप्रिय है ,जिसकी आड़ में हमारे राजनेता और धर्म के ठेकेदार काजी पंडित अपनाअपना उल्लू सीधा करते हैसमाज में आतंक पैदा करते है

क्रमश:
आतंकवाद का सच में प्रकाशित

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