Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

‘बागों में बहार है, मोदी साहब की सरकार है’. वास्तव में बहार है नजीब की माँ तथा छात्रों को अभी-अभी इंडिया गेट पर दिल्ली पुलिस द्वारा पीटा गया है और बसों में भरकर कहीं ले जाया जा रहा है. खबर के मुताबिक नजीब की मां को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चीन और पकिस्तान के सामने सरकार द्वारा शौर्य प्रदर्शन के बाद अब सरकार की नाक की बाल पुलिस दिल्ली पुलिस जो नजीब को पता लगाने में असमर्थ साबित हो चुकी है. वही पुलिस इंडिया गेट पर नजीब की माँ तथा छात्रों पर शौर्य प्रदर्शन कर रही थी.
              14 अक्टूबर से जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के फर्स्ट इयर के छात्र नजीब गायब हैं और मुख्य बात यह है कि गायब होने से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के छात्रों ने उनकी पिटाई कर दी थी. दिल्ली पुलिस मुस्लिम नवजवानों को प्रताड़ित करने का काम काफी दिनों से कर रही है और इसका स्पेशल ऑपरेशन सेल मुस्लिम नवजवानों को आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार करना और तरह-तरह के कहानी किस्से गढ़ने का आदि रहा तो वहीँ दिल्ली पुलिस जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार को फर्जी राष्ट्रद्रोह के मामले में गिरफ्तार करना और फिर उसी की शाह पर न्यायलय के अन्दर गुंडों द्वारा पिटाई उनका बहुचर्चित कारनामा रहा है. दिल्ली पुलिस नागपुर मुख्यालय पर आश्रित केंद्र सरकार द्वारा संचालित पुलिस है. वर्तमान में यह पुलिस दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी हिरासत में रख चुकी है. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में मुख्यमंत्री की हिरासत का शायद यह पहला मामला था. केंद्र सरकार के राजनीतिक विरोधियों को विभिन्न केसेस में फंसाने व उत्पीडन करने का काम करने में ऐसी गुलाम पुलिस शायद कहीं हो.
          भोपाल एनकाउंटर, बंसल परिवार को सीबीआई द्वारा आत्महत्या करने के लिए मजबूर करना और फिर एनडीटीवी पर एक दिवसीय प्रतिबन्ध लगाने की कार्यवाई अब यह साबित करने लगी है कि लोकतंत्र खतरे में है और भेडिये का मुखौटा धीरे-धीरे उतर रहा है तो वहीँ भारत के मुख्य न्यायधीश अपनी दर्द भरी आवाज़ में सरकार के सामने क्या न्यायालयों में ताला लगा दोगे. न्यायालयों में न्यायधीशों की नीतियां लगभग बंद सी हैं और स्तिथि यह हो रही है कि आप न्याय नहीं पा सकते हैं.
वहीँ, नागरिक संगठन ‘इन्साफ’ के नेता अमीक जामेई ने कहा है कि केंद्र सरकार अघोषित रूप से आपातकाल की तरफ बढ़ रही है.
सुमन

आजादी के बाद से आज तक के इतिहास में पहली बार भोपाल कारागार से आठ कथित सिमी कार्यकर्ता कैदियों को निकाल कर दस किलोमीटर दूर ईटी  गांव में ले जाकर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी उस मुठभेड़ को सही साबित करने के लिए आश्चर्यजनक परिस्थितियों में जेल वार्डन रमाशंकर यादव की हत्या कर दी जाती हैं यह सभी कार्य राजनीतिक नेतृत्व के सम्भव नहीं है दिल्ली में सीबीआई वरिष्ठ अधिकारी बंसल को गिरफ्तार करती है और उस घटना में पहले बंसल की बेटी और पत्नी आत्महत्या कर लेती है और बाद में बंसल और उनका पुत्र भी आत्महत्या कर लेता है सीबीआई केन्द्र सरकार की इच्छा शक्ति को प्रदर्शित करती है और अधिकारियों को यह संदेश देती है कि अगर हमारे राजनीतिक इशारों के अनुसार कार्य नहीं करोगे तो यातना गृह में पूरे परिवार को तडपा तडपा कर मार डाला जायेगा। यह सब मामले नाजी जर्मनी की याद दिलाते हैं और हिटलर का गेस्टापो   जर्मनी में कवि लेखक पत्रकार न्यायविद व यहूदी लोगों को उठा ले जाते थे यातनागृहो में मार डालने का कार्य करते थे और अगर कोई व्यक्ति किसी जेल में होता था तो उसको कैदियों द्वारा पीटने के नाम पर उसकी हत्या कर दी जाती थी। कतील नाम के मुस्लिम नौजवान की हत्या जेल में कर दी जाती जब उसके केस का फैसला आने वाला होता है। उसी तर्ज पर जब इन सिमी कार्यकर्ताओं का फैसला आने वाला था तो जाकिर हुसैन सादिक, मोहम्मद सलीक, महबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अकील अमजद, शेख मुजीब और मजीद की हत्या कारागार से निकाल कर कर दी जाती है।
वही   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उक्त हत्या कांड  के विरोध प्रदर्शन  में पुलिस ने नागरिक संगठन रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव की बुरी तरह पिटाई की है. पुलिस राजीव को पीटते हुए जीपीओ पुलिस चौकी ले गई, जहां तबीयत बिगड़ने पर ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया.
                                  राजीव के अलावा मंच के शकील कुरैशी भी ज़ख़्मी हैं. मंच ने सोमवार को भोपाल में हुए सिमी एनकाउंटर और उसमें पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए लखनऊ, जीपीओ पर विरोध प्रदर्शन बुलाया था जहां पुलिस ने उनपर कार्रवाई की.   रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब अधिवक्ता ने कहा है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार से कोई अंदरुनी गठजोड़ कर रखा है?जिसका परिणाम   लाठी चार्ज है यह भी सरकारी हत्या का प्रयास है जो भी विरोध करेगा  उसका भी यही अंजाम होगा

                          देश बदल रहा है देश को यातना गृह और हत्या घर में बदला जा रहा है न्यायपालिका चिल्ला रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति न कर न्यायालयों में ताला लगाने की साजिश है राजनीतिक नेतृत्व हिटलर के फासीवाद से प्रतीत है उससे कोई उम्मीद करना बेइमानी होगी जरूरत इस बात की है कि धर्मनिरपेक्ष, जनवादी कार्पोरेट विरोधी शक्तियों को अपनी ताकत से विरोध करने की है भोपाल फर्जी मुठभेड़ प्रकरण की अविलंब जाच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश इस बिंदु पर कराने की आवश्यकता है कि क्या राजनीतिक नेतृत्व की इस फर्जी मुठभेड़ प्रकरण में कहा तक शामिल था 
—-रण धीर सिंह सुमन 
                          एडवोकेट
 लो क सं घ र्ष !

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल से भागे सभी आठ सिमी आतंकियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है। आतंकी सोमवार तड़के जेल में एक प्रधान आरक्षक की हत्या कर जेल से फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने इन्हें गुनगा थाना क्षेत्र में ईंटखेड़ी गांव के पास घेर कर एनकाउंटर में ढेर कर दिया। इन आतंकियों में जाकिर हुसैन सादिक, मोहम्मद सलीक, महबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अकील, अमजद, शेख मुजीब और मजीद शामिल थे। सभी आतंकियों पर 5-5 लाख का इनाम घोषित कर दिया था। पुलिस के अनुसार  सोमवार तड़के साढ़े तीन बजे जेल के बी ब्लॉक में बंद सिमी के आठ आतंकियों ने बैरक तोड़ने के बाद हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या कर दी। इसके बाद चादर की मदद से आतंकी दीवार फांदकर फरार हो गए थे। कारागार में जहाँ कैदी बंद किये जाते हैं     उस कमरे के बाद तीन बड़ी दीवालें होती हैं और हर जगह पहरा होता है शाम को जब एक बार कैदी बैरक के अन्दर बंद कर दिया जाता है तो सुबह ही बैरक खोला जाता है इसलिए वार्डन की हत्या कर कैदियों का भाग जाना कहीं से भी संभव नहीं प्रतीत होता है. जिसकी पुष्टि

 ईंटखेड़ी गांव के प्रत्यक्षदर्शियों ने आईबीसी 24 चैनल को बताया कि उनलोगों ने कुछ लोगों को भागते हुए देखा था। जब उनलोगों ने उसे रोकने की कोशिश की तो आतंकी उन पर रोड़े बरसाने लगे। इसके तुरंत बाद गांववालों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर तुरंत पहुंची पुलिस ने थोड़ी ही देर में एनकाउंटर में इन सभी आतंकियों को मार गिराया।विशेष बात यह भी है की घटनास्थल  पर कोई असलहा आतंकवादियो के पास से नही पाया गया है. भोपाल में सिमी के कैदियों को एनकाउंटर में मार गिराने की बात तथ्यों के विपरीत होने के कारण फर्जी मुठभेड़ हैं इसकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है जेल से निकाल हत्या कर दी है. भोपाल सेंट्रल जेल देश के चुनिंदा आधुनिक अति सुरक्षित जेलों मे माना जाता तो ऐसे कैसे हो गया की 8 बन्दी एक गार्ड का मर्डर भी कर देते हैं और फिर भाग भी जाते हैं और किसी को कानो कां खबर भी नही हुई ?  ये कि जेल से भागने के 10 घंटे बाद भी आठों बंदी 10 किलोमीटर भी नही भाग पाये और एक साथ एक जगह छिपे रहे ?  मध्यप्रदेश सरकार के ग्रह मंत्री कहते हैं कि फरार कैदियों के पास कोई हथियार नही था तो वहीं पुलिस के आला अधिकारी कह रहे हैं की वो हथियारों से लैस थे और उन्होंने पुलिस पे फायर किये जिसके बदले मे पुलिस ने उन्हें मार गिराया। उपरोक्त परिस्थितियां इस बात को और बल देती हैं की इनकाउंटर यह फ़र्ज़ी है ऐसे क्या हालात पैदा हो गए कि पुलिस को आठों कैदियों को जान से मारना पड़ा? क्या उनमे से कोई ज़िंदा नही पकड़ा जा सकता था ? दिल्ली से अलका लांबा ने ट्वीट कर कहा है कि- पहले आठ आतंकियों का भागा जाना और फिर एनकाउंटर में एक साथ मारे जाना। इसके लिए मप्र सरकार के पास ‘व्यापमं’ फार्मूला था। वहीं  भारतीय क्म्युनिस्ट पार्टी  उत्तर प्रदेश  के सचिव डॉ  गिरीश ने फेसबुक पर लिखा है एक को भी जिन्दा न पकड़ पाना और जेल से भाग जाने देना भी बहादुरी है और देशभक्ति भी।
पत्रकार  प्रवीण दूबे   ने लिखा   —शिवराज जी…इस सिमी के कथित आतंकवादियों के एनकाउंटर पर कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है….मैं खुद मौके पर मौजूद था..सबसे पहले 5 किलोमीटर पैदल चलकर उस पहाड़ी पर पहुंचा, जहां उनकी लाशें थीं…आपके वीर जवानों ने ऐसे मारा कि अस्पताल तक पहुँचने लायक़ भी नहीं छोड़ा…न…न आपके भक्त मुझे देशद्रोही ठहराएं, उससे पहले मैं स्पष्ट कर दूँ…मैं उनका पक्ष नहीं ले रहा….उन्हें शहीद या निर्दोष भी नहीं मान रहा हूँ लेकिन सर इनको जिंदा क्यों नहीं पकड़ा गया..? मेरी एटीएस चीफ संजीव शमी से वहीं मौके पर बात हुई और मैंने पूछा कि क्यों सरेंडर कराने के बजाय सीधे मार दिया..? उनका जवाब था कि वे भागने की कोशिश कर रहे थे और काबू में नहीं आ रहे थे, जबकि पहाड़ी के जिस छोर पर उनकी बॉडी मिली, वहां से वो एक कदम भी आगे जाते तो सैकड़ों फीट नीचे गिरकर भी मर सकते थे..मैंने खुद अपनी एक जोड़ी नंगी आँखों से आपकी फ़ोर्स को इनके मारे जाने के बाद हवाई फायर करते देखा, ताकि खाली कारतूस के खोखे कहानी के किरदार बन सकें.. उनको जिंदा पकड़ना तो आसान था फिर भी उन्हें सीधा मार दिया…और तो और जिसके शरीर में थोड़ी सी भी जुंबिश दिखी उसे फिर गोली मारी गई…एकाध को तो जिंदा पकड लेते….उनसे मोटिव तो पूछा जाना चाहिए कि वो जेल से कौन सी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए भागे थे..?अब आपकी पुलिस कुछ भी कहानी गढ़ लेगी कि प्रधानमन्त्री निवास में बड़े हमले के लिए निकले थे या ओबामा के प्लेन को हाइजैक करने वाले थे, तो हमें मानना ही पड़ेगा क्यूंकि आठों तो मर गए… शिवराज जी सर्जिकल स्ट्राइक यदि आंतरिक सुरक्षा का भी फैशन बन गया तो मुश्किल होगी…फिर कहूँगा कि एकाध को जिंदा रखना था भले ही इत्तू सा…सिर्फ उसके बयान होने तक….चलिए कोई बात नहीं…मार दिया..मार दिया लेकिन इसके पीछे की कहानी ज़रूर अच्छी सुनाइयेगा, जब वक़्त मिले…कसम से दादी के गुज़रने के बाद कोई अच्छी कहानी सुने हुए सालों हो गए….आपके  भक्त

जेल के अन्दर से अगर निकाल कर मुठभेड़ के नाम पर हत्याएं की जा रही हैं तो यह सब संघ परिवार के घिनौने चहरे को प्रदर्शित करती हैं लेकिन प्रधानमंत्री से कहना चाहूँगा कि आप संघ के प्रचारक अवश्य रहे हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री भी हैं और इस तरह की कार्यवहियाँ देश को इंसानी कसाईखाने के रूप में तब्दील कर रही हैं. इससे देश का चेहरा बदरंग हो रहा है.

सुमन
लो क सं घ र्ष !

हर पार्टी में अच्छे आचरण के व्यक्तियों का अभाव- ओंकार सिंह

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला मंत्री ब्रजमोहन वर्मा, पूर्व विधायक परमात्मा सिंह, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री ओमकार सिंह साथ में हुमायूँ नईम खान- गजेन्द्र सिंह के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए.

बाराबंकी। देश की जनता को इस बात पर मंथन करना होगा कि हम सत्ता में कैसे लोगों को चुन कर भेज रहे हैं। वर्तमान समय में सत्ता व्यापारियों व अपराधियों के हाथ में चली गयी है। जिसके दुष्परिणाम आज हमारे सामने है।
यह विचार उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव ओंकार सिंह ने जिला के पूर्व विधायक समाज सेवी एवं साहित्य प्रेमी गजेन्द्र सिंह की चौथी पुण्य तिथि पर गांधी भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्य वक्ता के तौर पर अपने उद्बोधन में व्यक्त किया। उन्होनें हुकुमत ए ब्रितानिया के पूर्व प्रधानमंत्री चर्चिल के उस कथन का जिक्र किया जो उन्होनें भारत की स्वतंत्रता के उपरान्त अपने वक्तव्य में कहा कि भारत वर्ष स्वतंत्रता की प्राप्ति तो कर रहा है लेकिन कुछ दिनों उपरान्त इस अच्छे मुल्क का निजाम अपराधियों व व्यापारियों के हाथों में चला जायेगा। ओंकार सिंह ने देश की वर्तमान स्थिति व राजनैतिक परिवेशों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देशहित व समाजहित के बारे में आज कोई नहीं सोच रहा है और हर पार्टी में अच्छे आचरण के व्यक्तियों का अभाव सा होता जा रहा है। यह हमारे लोकतन्त्र के लिए ठीक नहीं है।
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन गयासुद्दीन किदवई ने पूर्व विधायक गजेन्द्र सिंह को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गजेन्द्र सिंह के भीतर जनहित प्रेम, देश प्रेम व समाज के सबसे निचले स्तर पर जीवन यापन कर रहे एक समर्पणभाव व सेवाभाव था। जिसका अनुशरण आज के राजनीतिज्ञों को करना चाहिए। पूर्व विधायक परमात्मा सिंह ने अपने विचार रखते हुए गजेन्द्र सिंह के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होनें विधायक न रहने के बावजूद अपने राजनैतिक क्षेत्र रामनगर के लिए सदैव कार्य किया।
श्रद्धांजलि सभा में जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित,महामंत्री प्रदीप सिंह,पूर्व न्यायधीश आर0सी0 निगम, उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निधि के निदेशक इज़हार हुसैन,पूर्व प्राचार्य डा0 अहसन वेग, गांधी समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा,भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा,वरिष्ठ भाजपा नेता केदार बक्श सिंह,,रणधीर सिंह सुमन,प्रशान्त मिश्रा, अवधेश प्रताप सिंह, हूमायू नईम खाँ, समाज सेवी सरदार जगजीत सिंह, अजय गुरूए विनय श्रीवास्तव, एवं विजय सिंह ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये।
इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष कौशल किशोर त्रिपाठी, डा0 कौसर हुसैन, मो0 वसीम राईन, सरदार सुरजीत सिंह,एस0एम0हैदर, महन्त हरिशरणदास,एस0ए0रिज़वी उर्फ शब्बन, जहीरूल कदर,नवीन सेठ,उपेन्द्र सिंह,कलीम किदवाई, श्याम सुन्दर दीक्षित, राजीव यादव,महन्त बी0पी0दास,पाटेश्वरी, विजय प्रताप सिंह, हनोमान वर्मा, अमर प्रताप सिंह, पवन वर्मा,कमल सिंह चन्देल,अजय कुमार सिंह, सतेन्द्र यादव, विनय सिंह, कर्मवीर सिंह,राजेन्द्र सिंह राणा, गिरीश चन्द्र, भूपेन्द्र सिंह सैंकी,रामनरेश, आदि उपस्थित थे।
मो0 तारिक खान के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के प्रारम्भ में उपस्थित जन ने चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

न्याय-जांच का काल चेहरा

'CBI अफसर ने कहा, तुम्‍हारी आने वाली पीढ़ियां भी मेरे नाम से कांपेंगी', नौकरशाह बंसल ने सुसाइड नोट में लिखा
कॉर्पोरेट अफेयर मंत्रालय में डीजी थे बीके बंसल
न्याय से पहले जांच. भारतीय न्याय व्यवस्था में पुलिस अपराध की विवेचना करने का काम करती है और विवेचना में संभावित अपराध करने वाले लोगों को पकड़ कर देश के विभिन्न थानों में या सीबीआई, एटीएस, एसटीएफ के कुख्यात यातना गृहों में यातनाएं देकर लाखों लोगों को प्रतिवर्ष जिन्दा लाश के रूप में तब्दील कर दिया जाता है. यह हमारी व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि पूरी दुनिया में है. दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों की हालत बाद से बदतर है इन यातना ग्रहों में कहने के लिए माननीय उच्चतम न्यायलय डी के बसु की व्यवस्था को लागू करने की बात करता है और राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग पूरी दुनिया में इन एजेंसियों के काले कामों को छिपाने के काम के आलावा कुछ नहीं करता है.छत्तीसगढ़ की सोनी सोरी से लेकर देश के विभिन्न गाँवों में इन आधुनिक जल्लादों के काले कारनामे आये दिन प्रकाश में आते रहते हैं. यह लोग कथित अपराधी के परिवार की महिलाओं, बच्चों व रिश्तेदारों को अमानुषिक उत्पीडन करते हैं. इस सन्दर्भ में कंपनी मामलों के महानिदेशक व उनके परिवार की आत्महत्या इन सारी जांच एजेंसियों की पोल खोलती है और इनका चेहरा कितना काला और कुरूप है
कंपनी मामलों के मंत्रालय के महानिदेशक व आईएएस अधिकारी बीके बंसल ने अपने सुसाइड नोट में सीबीआई पर प्रताड़ि‍त करने का आरोप लगाया. बसंल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि सीबीआई उनकी पत्‍नी और बेटी को भी ‘टॉर्चर’ कर रही थी. बंसल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि ‘सीबीआई जांचकर्ता ने कहा था कि तुम्‍हारी आने वाली पीढ़ियां भी मेरे नाम से कांपेंगी.’ बंसल ने लिखा कि उनकी पत्नी को थप्पड़ मारे गए, नाख़ून चुभोए गए, गालियां दी गईं. अपने सुसाइड नोट में बीके बंसल ने लिखा है, ‘डीआईजी ने एक लेडी अफसर से कहा कि मां और बेटी को इतना टॉर्चर करना कि मरने लायक हो जाएं. मैंने डीआईजी से बहुत अपील की, लेकिन उसने कहा, तेरी पत्नी और बेटी को ज़िंदा लाश नहीं बना दिया तो मैं सीबीआई का डीआईजी नहीं इसके अलावा एक हवलदार ने मेरी पत्नी के साथ बहुत गंदा व्यवहार और टॉर्चर किया, बहुत गंदी गालियां मेरी पत्नी और बेटी को दी. अगर मेरी ग़लती थी भी तो मेरी पत्नी और बेटी के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था.
बीके बंसल के बेटे ने भी अपने नोट में लिखा है, ‘मैं योगेश कुमार बंसल बहुत ही दुखी और मजबूरी की स्थिति में सुसाइड कर रहा हूं. मुझे इस सुसाइड के लिए मजबूर करने वाले सीबीआई के कुछ चुनिंदा अधिकारी हैं, जिन्होंने मुझे इस हद तक मानसिक रूप से परेशान किया. मेरी मां सत्या बाला बंसल एक बहुत ही विनम्र और धार्मिक महिला थी. मेरी बहन नेहा बंसल बहुत सीधी-सादी और दिल्ली यूनिवर्सिटी की गोल्ड मेडलिस्ट थी. उन दोनों पवित्र देवियों को भी इन्ही पांचों ने डायरेक्टली और इंडायरेक्टली इस हद तक टॉर्चर किया, इस हद तक सताया, इतना तड़पाया कि उन्हें सुसाइड करना पड़ा, वरना मेरी मम्मी और मेरी बहन नेहा तो सुसाइड के सख़्त ख़िलाफ़ थे. भगवान से प्रार्थना करूंगा कि ऐसा किसी हंसते-खेलते परिवार के साथ न करना.’
             सीबीआई ने माना है कि उसे दिल्ली पुलिस से ये चिट्ठियां मिली हैं. वो जांच कर दोषियों को सज़ा देने की बात कह रही है. रिश्वत के एक आरोप से शुरू हुआ ये सिलसिला जिस तरह एक पूरे परिवार के ख़ात्मे तक जा पहुंचा है, वह अपने में दिल दहलाने वाली दास्तान है.
हम चाहे जितना लोकतंत्र, न्याय, समानता की बात करें लेकिन असली चेहरा काला है कुरूप है, भयानक है. यहाँ जो बातें प्रकाश में आ रही हैं. उसकी जानकारी राजनेताओं को, प्रशासनिक अफसरों को और न्यायिक अधिकारीयों को भी है लेकिन वह मुंह मियां मिठू बन अपने काले चेहरे को सफ़ेद कहते हैं लेकिन जनता की निगाह में उनके चेहरे का यही स्वरूप है जो बंसल नें अपने आत्महत्या करने वाले पत्र में लिखा है.
सुमन
 सरकारें किसानो के वोट से बनती हैं लेकिन सरकार में आने के बाद राजनीतिक दल उद्योगपतियों के हाथ के मोहरे हो जाते हैं. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद लगभग दो लाख से अधिक किसानो ने आत्महत्याएं कर ली हैं.
यह विचार किसान सभा के प्रांतीय महासचिव राजेंद्र यादव पूर्व विधायक ने गाँधी मूर्ती हजरतगंज लखनऊ के समक्ष किसानो के दुसरे दिन के धरना सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसानो को आत्महत्या से बचाने के लिए दस हज़ार रुपये प्रतिमाह की पेंशन केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर अविलम्ब घोषित करें. जब समय आता है तो कभी केंद्र सरकार लाखों-लाख करोड़ रुपये के कर व कर्जे उद्योगपतियों के माफ़ कर देती है और समय आने पर राज्य सरकारें भी यह कार्य करती हैं. किसानो व खेत मजदूरों की बात आते ही इनके खजाने में दमड़ी भी नहीं बचती है.
किसान सभा के संरक्षक व पूर्व विधायक जयराम सिंह ने कहा कि मोदी सरकार की प्रमुखता से ध्यान  कॉरपोरेट और मैन्यूफैक्चरिंग पर है, उसकी प्राथमिकता में कृषि क्षेत्र  नहीं आता है. यही कारण है कि मोदी सरकार के पहले साल में किसानों का संकट घटने की बजाय बढ़ा है.
किसान सभा के अध्यक्ष इम्तियाज बेग ने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने 1,000 करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का ऐलान किया था, लेकिन जिस देश में करीब 60 फीसदी कृषि योग्य भूमि ग़ैर-सिंचित है वहां हर खेत को पानी पहुँचाने के लिए यह राशि बेहद कम है.
 किसान सभा मथुरा की नेता सुश्री राधा चौधरी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के दो ही उपाय हैं. पहला, उसकी पैदावार और उपज का दाम बढ़ाना और दूसरा, उत्पादन लागत को कम करना. इन दोनों मोर्चों पर मोदी सरकार ने अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है. जबकि कृषि क्षेत्र का संकट बढ़ा है. किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं.
किसानो की सभा को अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किसान संघर्ष को नयी दिशा देते हुए वैचारिक आधार भी देने की आवश्यकता है. जिससे सशक्त किसान आन्दोलन पैदा हो सके.
बाराबंकी किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि गेंहू के दाम प्रति कुंतल 7600 रुपये तथा धान के दाम 5100 रुपये प्रति कुंतल दिलाया जाए.
किसान सभा द्वारा 24 सितम्बर से 28 सितम्बर 2016 तक विधानसभा के बगल में स्थित गाँधी मूर्ति के समक्ष धरना प्रदर्शन चल रहा है. किसान सभा की मांग है कि राष्ट्रीय किसान आयोग की संस्तुतियों को केंद्र और राज्य सरकारें तत्काल लागू करें, साठ वर्ष के सभी स्त्री-पुरुष किसानो, खेत मजदूरों, ग्रामीण दस्तकारों को 10 हजार मासिक पेंशन केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देना सुनिश्चित करें. , किसानो के सभी सहकारी और सरकारी कर्जे माफ़ किये जाए और कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिया जाए., भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तत्काल वापस लिया जाए., केरल राज्य की भांति किसान कर्ज एवं आपदा रहत ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए., नहरों में टेल तक पानी पहुँचाया जाए खेती किसानी के लिए बढ़ी बिजली दरें तुरंत वापस लिया जाए, नंदगंज, रसड़ा, छाता, देवरिया और औराई चीनी मिलों को तुरंत चालू किया जाए,  शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को सरकार अपने हाथ में ले, गन्ने का मूल्य 850 रु प्रति कुंतल कर दिया जाए तथा बकाया भुगतान किसानो को शीघ्र किया जाय, आपदा राहत प्रदेश के सभी किसानो तथा राज्य और केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार पहुँचाया जाए., प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल समाजवादी एक्सप्रेस वे छ: लेन की बनायीं जा रही है इसमें किसानो की उपजाऊ जमीन जा रही है, इसको मऊ-मुहम्मदबाद रोड में जोड़कर बनाया जाए जिससे सरकारी योजना भी पूरी हो जाएगी और किसानो की जमीन भी बच जाएगी, कृषि को बढ़ावा देने हेतु प्रत्येक न्याय पंचायत में एम्.एस.सी. कृषि पास नौजवानों को किसान सहायक के रूप में रखा जाए. खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 80 प्रतिशत लोगों को इस योजना का लाभ मिलना है जिसमें पात्र गृहस्थों की सूची बनने में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है इसे सही किया जाए तथा राशन वितरण में धांधली हुई जिनकी जांच करायी जाए, समेजित बाल दिवस परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों को सक्रिय किया जाए तथा मिलने वाली सुविधाओं में अधिकारियों के स्तर से कमीशनखोरी बंद किया जाए तथा बाल पुष्टाहार बच्चों को दिया जाए इसकी व्यवस्था की जाय, कानून व्यवस्था सत्ता पक्ष के नेताओं, मंत्रियों के हस्तक्षेप के कारण अधिक ख़राब है इसे दुरुस्त किया जाए, फसल बीमा की धनराशि किसानो को तत्काल दिया जाए, प्रदेश के समस्त साधन सहकारी समितियों पर रासायनिक खादों के साथ कीटनाशक दवा प्रमाणिक कंपनियों से व कृषि उपकरण उपलब्ध कराये जाए तथा जो साधन सहकारी समितियां डिफाल्टर हैं उन्हें चालू किया जाए.

तिरंगा यात्रा के नाम ……

बापू जी के लिए सदा
जिनके दरवाजे बंद रहे
जो रहे गुलामी के सिजदा
अव भारत के जयचंद रहे
उन जयचंदों को ढूंढ-ढूंढ
भगवा पहनाए जाते हैं
जिम्मेदारी के तख्तों पर
अब गद्दार बैठाये जाते हैं

– बृजलाल भट्ट “बृजेश”