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Posts Tagged ‘भाजपा’

Arif-Aqeel
गौ हत्या के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने के नारे के साथ बीजेपी ने चुनाव लड़ा था. यह नारा उसका सिर्फ देश के अन्दर सांप्रदायिक उन्माद फैलाने के लिए जरूरी होता है। जिससे कुछ लोग गौ हत्या के सवाल के ऊपर भावनात्मक तरीके से उसको वोट दे सके। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों में गौ रक्षा समितियों के माध्यम से जगह जगह सांप्रदायिक उन्माद्पैदा कर भोले भले लोगों का वोट ठग सके। अधिकांश: गौ शालाएं इन्ही के लोगों के द्वारा संचालित होती हैं और गायों के भोजन पर मिलने वाली राशि का उपयोग यह लोग अपने लिए करते हैं और दिनभर गौ हत्या पाप है का नारा लगाते हैं। इनके कई नेता गौ वध निवारण अधिनियम में देश के विभिन्न हिस्सों में गिरफ्तार भी हो चुके हैं।
आज मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के एमएलए आरिफ अकील ने पिछले दिनों अशासकीय संकल्प के माध्यम से एक प्रस्ताव पेश किया। वह चाहते थे कि गाय की मौत हो जाने के बाद बाद उसे जला या दफना दिया जाए और साथ ही उसके अंगों की बिक्री पर रोक लगा दी जाए। मगर सरकार इस संकल्प को पास करने से बचती रही और आखिरकार मत विभाजन की वजह से संकल्प पास नहीं हो सका। इस अशासकीय संकल्प ने भारतीय जनता पार्टी की कलई खोल दी।
अकील ने कहा, ‘गाय को गौ माता कहा जाता है और इसे मां का दर्जा दिया गया है। बावजूद इसके बूढ़ी गायों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। गाय की हड्डियों, चर्बी और चमड़ी के लिए उसे मार दिया जाता है।’ उन्होंने कहा कि इस कारोबार पर रोक लगनी चाहिए और गाय की मौत पर सरकारी खर्च पर उसेक अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जानी चाहिए।
अकील ने कहा कि बीजेपी ने इस मुद्दे पर चुनाव लड़ा है और अब वह पीछे हट रही है।
आखिरकार इस अशासकील संकल्प पर पहले ध्वनिमत कराया गया, लेकिन इससे स्थिति साफ नहीं हो पाई कि इसका विरोध करने वालों की संख्या ज्यादा है या समर्थन करने वालों की। इसके बाद वोटिंग की गई। साफ हुआ कि 55 सदस्यों ने इस संकल्प के विरोध में वोट डाले, जबकि समर्थन में सिर्फ 30 वोट पड़े। इस तरह यह संकल्प गिर गया।
भाजपा ने गौ हत्या के ऊपर प्रतिबन्ध लगाने को लेकर चुनाव लड़ा था। इस कार्य से जो देश के अंदर सांप्रदायिक उन्माद या आये दिन झगडे होते हैं वह बंद हो जाएंगे लेकिन भाजपा की मंशा साफ़ नहीं है उसके समर्थक किसी भी प्रकार के मुनाफे वाली चीज को बंद होते हुए बर्दाश्त नही कर सकते हैं।
अगर उसमें जरा भी ईमानदारी है तो अविलम्ब गौ वध के ऊपर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए अन्यथा उसके लिए यह नारा काफी फायदेमंद है- मुँह में राम बगल में छुरी -गोहत्या बहुत जरुरी ?

-सुमन
लो क सं घ र्ष !

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mjatour
गोविल्स के प्रचार में फंसा मीडिया नायक मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर। जब राजीव गांधी की तूती बोलती थी तो उनकी जय जयकार और जब मीडिया ने एक भ्रामक हिन्दुवत्व की लहर भारतीय समाज में पैदा की तो उस भ्रम को फैलाने का कार्य करने वाले उसी भ्रम में एम जे अकबर साहब दिग्भ्रमित होकर फंस गए। उनका सारा इतिहास का ज्ञान सामर्थ्य नमो नमो करने के लिए समर्पित हो गया है उदारवादी नीतियों के चलते अपनी सुख सुविधाओं को बरक़रार रखने के लिए पतन की कोई सीमा रेखा इस घटना के बाद नहीं रेह जाती है। यह ऐतिहासिक सत्य भी है कि अवसरवादी बुद्धिजीवी अपनी सुख सुविधाओं के लिए कुछ भी कर सकता है। जिसका प्रत्यक्ष उद्धरण यह है. एम जे अकबर कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं. वे बिहार के किशनगंज से दो बार सांसद रहे हैं. साथ ही वे राजीव गांधी के प्रवक्ता भी रहे हैं. वे इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटोरियल डॉयरेक्टर भी रहे हैं. अकबर ने कहा, ‘‘यह हमारा कर्तव्य है कि हम देश की आवाज के साथ आवाज मिलाएं और देश को फिर से पटरी पर लाने के मिशन में जुट जाएं. मैं भाजपा के साथ काम करने को तत्पर हूं.’’ इसी तरह की बातें जब वह राजीव गांधी के प्रवक्ता थे तब कहा करते थे। असल में तथाकथित बड़े पत्रकार सत्ता के प्रतिस्ठानों में और कॉर्पोरेट सेक्टर के बीच में मीडिएटर का काम करते हैं और मीडिएट होने के बाद वह स्वयं भी देश की सेवा में सीधे सीधे उतर पड़ते हैं। यह कोई भी आश्चर्य की बात नही है।
भाजपा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अनुषांगिक संगठन है जो नागपुर मुख्यालय से संचालित होता है। जर्मन नाजीवादी विचारधारा से ओत प्रोत संगठन है। विश्व का कॉर्पोरेट सेक्टर अपनी पूरी ताकत के साथ भारत के ऊपर फासिस्ट वादी ताकतों का कब्ज़ा कराना चाहता है। जिससे यहाँ के प्राकृतिक संसाधनो का उपयोग कर अकूत मुनाफा कमाया जा सके। भाजपा में बाराबंकी से लेकर बाड़मेर तक और नागपुर मुख्यालय से लेकर झंडे वालान तक कुर्सी के लिए मारपीट हो रही है , मान मनौव्वल हो रही है। चुनाव हुए नहीं हैं , प्रधानमंत्री , उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री के पद बाटें जा रहे हैं . जगदम्बिका पाल से लेकर सत्यपाल महाराज, रिटायर्ड जनरल-कर्नल से लेकर वरिष्ठ नौकरशाह पुलिस अधिकारी पत्रकार गिरोह बनाकर देश सेवा अर्थात लुटाई में हिस्सेदारी के लिए अपनी नीति, विचार त्याग सबको तिलांजलि देकर रातों रात अपनी निष्ठाएं और आस्थाएं बदल रहे हैं। उसके बाद भी सरकार फासिस्टों की नहीं बनेगी।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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