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Posts Tagged ‘सुमन लोकसंघर्ष’

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भारतीय इतिहास में आज़ादी के बाद हिन्दुवत्वादियों द्वारा बाबरी मस्जिद का ध्वंस सबसे बड़ी आतंकी घटना है। यह घटना 6 दिसंबर 1992 को जर्मन नाजीवादी विचारधारा से लैस हिन्दुवत्वादियों ने की थी और भारतीय लोकतंत्र उसको न बचा पाने पर शर्मिंदा हुआ था। फेसबुक पर मित्रों के निम्नलिखित विचार आयें हैं :-

Jagadishwar Chaturvedi
आज 6 दिसम्बर है।यह स्वतंत्र भारत का कलंकमय दिन है। आज के ही दिन 1992 में बाबरी मस्जिद गिरायी गयी। जब यह मस्जिद गिरायी गयी तो मसजिद गिराने वालों ने एक ऐतिहासिक मसजिद को नष्ट किया, हमारे देश के संविधान और कानून की अवमानना की।इसके अलावा उस दिन अकेले अयोध्या में 14 मुसलमान मारे गए।267घर जलाए गए या तोड़े गए।19मजार और मदरसों को क्षतिग्रस्त किया गया।4500मुसलमानों को अयोध्या छोड़कर भागना पड़ा।इसके अलावा देश के विभिन्न इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी। दुखद यह है कि जिन संगठनों ने यह सब काण्ड किया उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
Anand Pradhan
बाबरी मस्जिद का ध्वंस आधुनिक भारत के इतिहास की सबसे शर्मनाक और त्रासद घटनाओं में से एक है. इस दिन भगवा सांप्रदायिक ताकतों ने एक बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक, बहुराष्ट्रीय और बहुभाषी भारत के विचार को मर्मान्तक चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. इसलिए यह आज़ाद भारत के इतिहास का एक काला दिन है जिसे बेहतर समाज और देश चाहनेवालों को कभी भुलाना नहीं चाहिए.

Girijesh Tiwari

आइए, आज फिर एक बार अदम गोंडवी को याद करें
और साम्प्रदायिक सौहार्द की गंगा-जमनी तहज़ीब की हिफ़ाज़त के लिये
पहलकदमी करें.
“हिन्दू और मुस्लिम के एहसासात को मत छेडिये;
अपनी कुर्सी के लिए जज़्बात को मत छेडिये.

हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है;
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िए.

ग़र ग़लतियाँ बाबर की थी, जुम्मन का घर फिर क्यों जले;
ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िए.

हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, जार या चंगेज़ ख़ाँ;
मिट गए सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िए.

छेड़िए असली जंग, मिल-जुल कर गरीबी ख़िलाफ़;
दोस्त, मेरे मज़हबी नग्मात को मत छेड़िए !”
Saleem Akhter Siddiqui
छह दिसंबर को आज की पीढ़ी भूलती जा रही है। हो सकता है वक्त के साथ यह तारीख इतिहास में कहीं दफन हो जाए। ऐसे ही जैसे 1949 से लेकर 31 जनवरी 1986 तक का वक्फा दफन रहा था। लेकिन 1 फरवरी 1986 ने सब कुछ बदल दिया। जो एक साल पहले दो सीटें लेकर इतिहास बनने की ओर अग्रसर थे, वे अचानक हमलावर हो गए। 2 से 88 और फिर 180 तक जा पहुंचे। देश की राजनीति का घोर सांप्रदायिकरण कर दिया गया। उस फसल को देश आज तक काट रहा है। मामला भले ही सुप्रीम कोर्ट में हो, लेकिन पता नहीं कौन और कब इसे दोबारा भड़काकर देश को अस्सी के दशक जैसे डरावने दौर में ले जाए।
Ali Sohrab
मंदिर तो एक बहाना है, मक़सद नफरत फैलाना है ,यह देश भले टूटे या रहे उनको सत्ता हथियाना है।
मस्जिद भी रहे, मंदिर भी बने क्या यह बिल्कुल नामुमकिन है?
हिलमिल कर सब साथ रहें क्या यह बिल्कुल नामुमकिन है?

इक मंदिर बने अयोध्या में इसमें तो किसी को उज्र नहीं
पर वह मस्जिद की जगह बने यह अंधी जिद है, धर्म नहीं।

क्या राम जन्म नहीं ले सकते मस्जिद से थोड़ा हट करके?
किसकी कट जाएगी नाक अगर मंदिर मस्जिद हों सट करके?

इंसान के दिल से बढ़कर भी क्या कोई मंदिर हो सकता?
जो लाख दिलों को तोड़ बने क्या वह पूजा घर हो सकता?

मंदिर तो एक बहाना है मक़सद नफरत फैलाना है
यह देश भले टूटे या रहे उनको सत्ता हथियाना है।

इस लम्बे-चौड़े भारत में मुश्किल है बहुमत पायेंगे
यह सोच के ओछे मन वाले अब हिन्दू राष्ट्र बनायेंगे।

इतिहास का बदला लेने को जो आज तुम्हें उकसाता है
वह वर्तमान के मरघट में भूतों के भूत जगाता है।

इतिहास-दृष्टि नहीं मिली जिसे इतिहास से सीख न पाता है
बेचारा बेबस होकर फिर इतिहास मरा दुहराता है।

जो राम के नाम पे भड़काए समझो वह राम का दुश्मन है।
जो खून-खराबा करवाए समझो वह देश का दुश्मन है।

वह दुश्मन शान्ति व्यवस्था का वह अमन का असली दुश्मन है।
दुश्मन है भाई चारे का इस चमन का असली दुश्मन है।

मंदिर भी बने, मस्जिद भी रहे ज़रा सोचो क्या कठिनाई है?
जन्मभूमि है पूरा देश यह इसे मत तोड़ो राम दुहाई है।

-डॉ. रण्जीत
Ranjan Yadav
आज कोई बाबरी विध्वंश का जश्न मना रहा है ,कोई गम में पागल हुए जा रहा है | लेकिन कुछ ऐसा है जो भारत के जातिवाद गद्दार समाज के खिलाफ मुहीम को अंजाम दे रहे है ,मेरा नाम उसी लिस्ट में शामिल करे |
असरफ हिन्दू और स्वरण मुस्लिम के लिए बाबरी और राम मंदिर मुद्दा दोनों में कोई अंतर नहीं है ,इनके लिए धर्म भी कोई मायने नहीं रखती है ,इनके लिए मायने रखती है तो सिर्फ और सिर्फ राज सत्ता !
देश के 60 फीसदी आबादी जब मंडल मुहीम में अपनी सविन्धानिक हक और आर्थिक हितो के लिए एकत्र हो रही थी ,तभी अडवानी मुरलीमनोहर जोशी जैसे जातिवादी असरफ स्वर्णों ने मंदिर -मस्जिद प्रकरण को आवाज दी |मंडल दब के रह गया ,आवाज दबी देश के आधी आबादी की ,अब खुद सोचे क्या इनके पाप इस जन्म में माफ़ किये जा सकते है ?
तुम्हारे शौर्य दिवस कलंक है देश पर !
संक्षेप में इनके लिए सिर्फ और सिर्फ एक शब्द “देशद्रोही गद्दार जातिवादी |
जंग जारी रहे ,लिखते रहिये लोगो को बताते रहिये ,समझाते रहिये ,गद्दार जातिवादी लोगो के चहरे सामने आनी ही चहिये | जब पेट भरा रहेगा तभी राम भजन होगा

Rajendra Singh
हम 6 दिसम्बर को ही भारत के संविधान को तार-तार करने वाली घटना भी हुई थी। मैं मुस्लिम भाइयो से बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए माफ़ी मांगता हूँ। हमारे समुदाय के लोगो ने जो गलत किया इस बात के लिए।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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भारत में विधि के शासन कि अवधारणा है, न कि परम्पराओं से संगठन निर्माण नही होता है केंद्रीय जांच ब्यूरो की स्थापना कुछ इसी तरह हुई है . माननीय उच्च न्यायालय गुवाहाटी न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी और न्यायमूर्ति इंदिरा शाह की खंडपीठ ने विधि के शासन की अवधारणा के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इस फैसले के बाद विधि के जानने वाले लोगों में एक नया उत्साह पैदा किया था कि देश में विधि का शासन को पुन: मान्यता दी जा रही है। देखने में यह आता है कि निचले स्तर पर बैठे न्यायाधीशगण राज्य या अभियोजन के प्रतिनिधि कि भूमिका में नजर आते हैं और कानून को राज्य के पक्ष में व्याख्या करते हैं और राज्य की मजबूरियों का हवाला देकर कानून कि अनदेखी की जाती है। कभी-कभी स्वतन्त्र न्यायपालिका कि अवधारणा का अस्तित्व ही नजर में नहीं आता है। मजिस्ट्रेट स्तर पर स्तिथि और भी बद से बदतर है।
An illegality perpetuates in illegalities. An illegality or any action contrary to law does not become in accordance with law because it is done at the behest of the Chief Executive of the State. In a democracy what prevails is law and rule and not the height of the person exercising the power.
– AIR 1991 SC 1902

कल से जारी न्यायलय के बाहर की बहस में एक पक्ष का कहना था की गुवाहाटी उच्च न्यायलय के फैसले पर स्थगन का कोई सवाल नहीं उठता है लेकिन वहीँ कुछ विधि विशेषज्ञों का मानना था कि केंद्र सरकार स्थगन प्राप्त कर लेगी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो की स्थापना को असंवैधानिक करार देने वाले गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ केन्द्र सरकार को शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिली। न्‍यायालय ने उच्च न्यायालय के इस आदेश पर स्‍टे लगा दिया है। याचिकाकर्ता, गृह मंत्रालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब भी मांगा गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस पी.सदाशिवम की अध्‍यक्षता में उनके आवास पर हुई, जहां उनके साथ दो अन्‍य न्‍यायमूर्ति भी थे। मामले की अगली सुनवाई 6 दिसंबर मुकर्रर की गई है। उच्चतम न्यायालय में एक कैवियट याचिका दायर कर कहा गया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो मामले में केंद्र सरकार की याचिका पर आदेश दिए जाने से पहले याचिकाकर्ता नवेंन्द्र कुमार को भी सुना जाए। इस आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो नामक तोते में जान आ गयी।
गुवाहाटी उच्च न्यायलय की एक खंडपीठ ने उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से केंद्रीय जांच ब्यूरो का गठन हुआ था और उसकी तमाम कार्रवाइयों को असंवैधानिक करार दिया।
न्यायमूर्ति आईए अंसारी और न्यायमूर्ति इंदिरा शाह की खंडपीठ ने नवेन्द्र कुमार की ओर से दायर एक याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो का गठन का आधार बने प्रस्ताव पर हाईकोर्ट की एकल पीठ के 2007 के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा था, इसलिए हम 1963 के प्रस्ताव को रद्द करते हैं जिसके जरिए केंद्रीय जांच ब्यूरो का गठन किया गया था..हम यह भी फैसला देते हैं कि केंद्रीय जांच ब्यूरो
न तो दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) का कोई हिस्सा है और न उसका अंग है और सीबीआई को 1946 के डीएसपीई अधिनियम के तहत गठित पुलिस बल के तौर पर नहीं लिया जा सकता। पीठ ने कहा था कि मामला दर्ज करने, किसी व्यक्ति को अपराधी के रूप में गिरफ्तार करने, जांच करने, जब्ती करने, आरोपी पर मुकदमा चलाने आदि की केंद्रीय जांच ब्यूरो की गतिविधियां संविधान के अनुच्छेद 21 को आघात पहुंचाती हैं और इसलिए इसे असंवैधानिक मानकर रद्द किया जाता है। गुवाहाटी उच्च न्यायलय ने यह भी कहा था कि गृह मंत्रालय का उपरोक्त प्रस्ताव न तो केंद्रीय कैबिनेट का फैसला था और न ही इन शासकीय निर्देशों को राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दी थी। अदालत ने कहा कि इसलिए संबंधित प्रस्ताव को अधिक से अधिक एक विभागीय निर्देश के रूप में लिया जा सकता है जिसे कानून नहीं कहा जा सकता। बहरहाल, गुवाहाटी उच्च न्यायलय ने कहा था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो अदालत में लंबित कार्यवाही पर आगे जांच करने के लिए पुलिस पर कोई रोक नहीं है। केंद्रीय जांच ब्यूरो का गठन किए जाने पर अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी का गठन कुछ स्थितियों से निपटने के लिए तदर्थ उपाय के रूप में किया गया था।
दिल्ली उच्च न्यायलय के पूर्व न्यायाधीश आरएस. सोढ़ी ने कहा था कि यह चौकाने वाली बात है कि बिना किसी अधिसूचना के सीबीआई जैसी एजेंसी चल रही है। अगर अधिसूचना नहीं है तो सीबीआई की वैधता ही नहीं है। इस फैसले के बाद तो मानो सीबीआई का वजूद ही खत्म हो गया है।
उच्च न्यायलय ने अपने फ़ैसले में कहा था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के गठन के लिए “गृह मंत्रालय का प्रस्ताव न तो केंद्रीय मंत्रिमंडल का फ़ैसला था और न इन कार्यकारी निर्देशों को राष्ट्रपति ने अपनी मंज़ूरी दी थी.”
उच्च न्यायलय ने आगे कहा था, “संबंधित प्रस्ताव को अधिक से अधिक एक विभागीय निर्देश के रूप में लिया जा सकता है, जिसे क़ानून नहीं कहा जा सकता.”
उच्च न्यायलय ने अपने आदेश में आगे कहा, “मामला दर्ज करने, किसी व्यक्ति को अपराधी के रूप में ग़िरफ़्तार करने, जांच करने, ज़ब्ती करने, संदिग्धे पर मुक़दमा चलाने जैसी केंद्रीय जांच ब्यूरो की गतिविधियां संविधान के अनुच्छेद-21 को आघात पहुंचाती हैं और इसलिए उसे असंवैधानिक मानकर रद्द किया जाता है। ”

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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अमेरिका में विपक्ष के विरोध के कारण अमेरिकी बजट पास नही हो पाया और वहां आवश्यक कर्मचारियों को छोड़ कर काम बंदी चल रही है। यह अमेरिकी बहाना हो सकता है जबकि वास्तविकता यह है कि वह पूरी तरीके से दिवालिया हो चुका है। बैंक, बीमा कम्पनियाँ पहले से ही दिवालिया चल रही हैं। युद्ध उद्योग के कारण उसकी मुद्रा डॉलर दुनिया में राज कर रही है अब जरूरत है भारत, रूस, चीन, ईरान सहित मजबूत देशों को डॉलर की उपयोगिता को समाप्त करें और आपस में सारा व्यापार अपनी अपनी मुद्रा में करें। अमेरिका की शोषणकारी और सम्राज्यवादी प्रवित्तियों से मुक्त हों।
अमेरिका वित्तीय संस्थानों, बैंक, कॉर्पोरेशंस और विदेशी संस्थानों से कर्ज लेता है। इस पर वह ब्याज भी अदा करता है। जिन प्रमुख देशों के बैंकों, वित्तीय संस्थानों या विदेशी निवेशकों से वह कर्ज लेता है, उनमें प्रमुख रूप से हॉन्ग कॉन्ग, चीन, बेल्जियम, लक्जमबर्ग और ताइवान शामिल हैं। जरूरत पडऩे पर अमेरिका स्विस बैंक से भी कर्ज लेता है। आज वह कर्ज अदा करने की स्तिथि में नहीं है।
साम्राज्यवादी शक्तियों के चंगुल से निकलने का सही समय यही है और मानवता को बचाए रखने के लिए अपने-अपने मुल्कों की जनता का शोषण रोकने के लिए डॉलर की दादागिरी ख़त्म करना आवश्यक है। हम अमेरिका से कोई ऐसी वस्तु आयात नहीं करते हैं कि जिसके बगैर हमारा काम न चल सके और यह समस्त चीजें दुनिया के दुसरे देशों से भी लिया जा सकता है। अमेरिका कभी भी हमारा स्वाभाविक मित्र ही नही हो सकता उसकी अर्थव्यवस्था लूट और गुंडागर्दी के ऊपर ही आधारित है और जब उनका विलाप प्रारंभ हुआ है।
नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक क्लैपर ने रुवासे अंदाज में कहा कि यह केवल वॉशिंगटन का राजनीतिक मसला भर नहीं है बल्कि “इसकी वजह से हमारी अमरीकी सेनाओं, कूटनीतिज्ञों और नीति निर्माताओं की मदद करने की ताकत भी प्रभावित होती है. और इस तरह के हालात में हर बीतते दिन के साथ यह ख़तरा बढ़ रहा है.”
क्लैपर ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन ना देना, जबरन छुट्टी पर भेजना उन्हें आर्थिक दिक्कतों में डालता है और यह विदेशी गुप्तचर संस्थाओं के लिए बेहद मुफ़ीद है। यह विदेशी गुप्तचर संस्थाओं के लिए सपने सच होने जैसा है.”
वहीँ, अमरीका की तकनीकी गुप्तचर संस्था के निदेशक जनरल कीथ एलेक्जैंडर ने कहा की उनकी संस्था ने हजारों गणितज्ञों और कंप्यूटर विशेषज्ञों को छुट्टी पर भेज दिया है जिसका उन्हें वेतन नहीं मिलेगा.
आज जब अमेरिकी जो पूरी दुनिया में कत्लेआम करते हुए नजर आ रहे था, वह छाती पीट कर रो रहा है। चापलूस मुल्क उनके आंसू कब तक पोछेंगे। आंसू उनके बंद नहीं हो सकते हैं चाहे तीसरी दुनिया के सारे नागरिकों का क़त्ल करके समस्त संपत्ति दे दी जाए। अमेरिका ने सिर्फ इंसानों का कत्लेआम ही किया चाहे वह इराक हो, लीबिया हो, सीरिया हो, अफ्गानिस्तान हो। वहीँ जो उसके साथ रहा उसकी स्तिथि सोमालिया जैसी कर दी कि जहाँ आज समुद्री डाकुओं को छोड़ कर कुछ बचा नहीं है। इसीलिए ओबामा अपने कुनबे के साथ अमेरिका में विलाप कर रहे हैं और उनके सारे दौरे रद्द हो गए हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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imagesकई चुनावों से अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय समाजवादी पार्टी को धर्मनिरपेक्ष दल समझ कर वोट और सपोर्ट करता रहा है लेकिन सपा प्रमुख व उसके नीति नियंतागण उसको पिटवाने व आंसू पोछने का काम करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के गठन से ही रमा शंकर कौशिक जैसे अनेको जिम्मेदार नेता व उनके परिवार के लोग शिलापूजन कराते रहे और धर्म निरपेक्षता का मुखौटा भी लगाये रहे। जातिवादी ताकतें कभी धर्मनिरपेक्ष हो ही नही सकती और आरएसएस ने नियोजित तरीके से अब तो समाजवादी पार्टी के ऊपर कब्ज़ा जमा लिया है। बकौल बेनी प्रसाद वर्मा की को ढहाने की भी जिम्मेदारी मुलायम सिंह के ऊपर थी और उस काम को अपनी सत्ता को मजबूती देने के लिए बखूबी अंजाम दिया।
और आज जब आँखें खुली हैं तो यह संगठन हैरान हो गये हैं। जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी, ऑल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य डॉ. क्यू इलयास, जमात ए इस्लामी हिंद के महासचिव मौलाना नुसरत अली, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत के अध्यक्ष डा. जफरूल इस्लाम, मिली पॉलिटिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. तस्लीम रहमानी समेत कई मुस्लिम नेताओं ने अखिलेश यादव का यह दावा खारिज कर दिया कि दंगे विपक्ष की साजिश हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राजनीतिक व्यवस्था में विपक्ष सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़कर और कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी कर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करता है लेकिन सत्तारूढ़ दल का यह कर्तव्य है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखे.
उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार को बख्रास्त करने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर और उसके आसपास के इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा पर काबू पाने में विफल रहे।
अखिलेश सरकार के आने के बाद उत्तर प्रदेश में लगभग 104 सांप्रदायिक झडपें हो चुकी हैं और जगह-जगह सांप्रदायिक उन्माद के मामले बढ़ गए हैं। फैजाबाद से लेकर मुजफ्फरनगर तक दंगो में समाजवादी पार्टी के क्षेत्रीय नेताओं का हाथ साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है। प्रशासन समाजवादी पार्टी के नेताओं का नाम आते ही चुप्पी साध लेता है। जिससे स्तिथि बद से बदतर होती जा रही है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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यासीन को प्लांट करने वाले खुफिया अधिकारी सुरेश की पूछताछ से खुलेगा आईएम का राज प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात जवानों द्वारा आईएम के नाम पर फिरौती मांगना साबित करता है आईएम के नाम पर चल रहा फर्जीबाड़ा इंडियन मुजाहिदीन के कथित आतंकी यासीन भटकल की नेपाल में हुयी गिरफ्तारी को सियासी नाटक करार देते हुए कहा गया है कि पूरा खेल आतंकी वारदातों में आईबी की संदिग्ध भूमिका पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने और आईबी की खो चुकी विश्वसनियता की पुर्नबहाली के लिए खेला जा रहा है। जिस यासीन भटकल को इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी बताया जा रहा है वह दरअसल आईबी का ही आदमी है जिसका इस्तेमाल खुफिया एजेंसियां इंडियन मुजाहिदीन नाम के कागजी संगठन का हव्वा खड़ा करने के लिए कई सालों से कर रही थीं और जब उसके अस्त्तिव पर चैतरफा सवाल उठने लगे तो यासीन भटकल को गिरफ्तार दिखा दिया।

अब्दुल समद और उनके चचाओं समेत घर के दूसरे सदस्यों ने कहा था कि उसका नाम यासीन भटकल नहीं बल्कि मोहम्मद अहमद सिद्दीबापा है।भटकल में तैनात सुरेश नाम के खुफिया विभाग के अधिकारी ने मोहम्मद अहमद सिद्दीबापा, रियाज भटकल, इकबाल भटकल, मौलाना शब्बीर समेत कई युवकों को पहले अपने झांसे में फंसाया और बाद में उन्हें यह डर दिखा कर कि वांटेड हो गए हैं
उन्हें भूमिगत हो जाने के लिए मजबूर कर दिया। दूसरी तरफ इन युवकों के बारे में खुफिया विभाग मीडिया में लगातार खबरें चलवाती रहीं। भटकल के तमाम लोगों ने उन्हें बताया कि खुफिया अधिकारी सुरेश जो अब मंगलूरू में तैनात हैं ने ही भटकल के नौजवानों को आईबी द्वारा गठित कथित आतंकी नेटवर्क को खड़ा किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सचमुच आतंकवाद से लड़ने में गम्भीर है तो उसे सुरेश को गिरफ्तार कर पूछताछ करनी चाहिए।
सुरेश की गिरफ्तारी और पूछ-ताछ इसलिए भी जरूरी है कि पिछले दिनों इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ कांड में भी खुफिया विभाग के अधिकारी राजेंद्र कुमार की आपराधिक भूमिका उजागर हो चुकी है जिसे जानबूझ कर केंद्र सरकार गिरफ्तार नहीं कर रही है क्योंकि इससे आईबी की आतंकी भूमिका उजागर हो जाएगी। दूसरी ओर इशरत जहां के साथ मारे गए जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लई के पिता ने भी पिछले दिनों अहमदाबाद में प्रेस कांफ्रेंस कर के बताया था कि उनका बेटा आईबी के लिए काम करता था। यहां गौरतलब है कि इशरत समेत मारे गए चारों लोगों को लश्कर ए तैयबा का आतंकी बता कर मारा गया था।
आजमगढ़ नेता मसीहुदीन संजरी और तारिक शफीक ने कहा कि यासीन के साथ आजमगढ़ के असदुल्ला के गिरफ्तार दिखाए जाने के बाद आजमगढ़ का मीडिया ट्रायल फिर से शुरू हो गया है और मीडिया साम्प्रदायिक भाषा में फिर से आजमगढ़ को बदनाम करने लगी है। उन्होंने कहा कि पहले मीडीया और आईबी के स्रोतों ने कभी तौकीर को आजमगढ़ माड्यूल का मास्टर र्माइंड बताती थी तो अब यासीन भटकल को आजमगढ़ का मास्टर माईड बता रही है। आजमगढ़ को आतंक की नसर्री के रूप में बदनाम करने वाली मीडिया और खुफिया एजेंसियों के गठजोड़ वाले माड्यूल को पहले तय कर लेना चाहिए कि कौन मास्टर माईंड है। क्योंकि हर कथित गिरफ्तारी के बाद पकड़े गए शख्स को मीडिया और खुफिया एजेंसियां मास्टर माईंड और आजमगढ़ के माॅड्यूल का प्रमुख बताने लगती हैं। जिससे यह पुख्ता हो जाता है कि यह पूरा खेल खुद सरकार और मीडिया के एक हिस्से द्वारा संचालित है।
मोहम्म्द शुऐब ने कहा कि जिस तरह प्रधान मंत्री की सुरक्षा में लगे जवान और बीएसएफ के रिटायर्ड अधिकारियों द्वारा खुद को इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी बता कर नोएडा स्थित एक डाॅक्टर दम्पत्ति को धमकाने और तीस लाख रूपये की फिरौती मांगी गयी से
साफ हो जाता है कि पुलिस इस फर्जी आतंकी संगठन के नाम पर कैसे कैसे गुल खिला रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इंडियन मुजाहिदीन पर श्वेतपत्र लाने की मांग का।
मोहम्मद शुऐब ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान पहले दिन यदि सपा सरकार ने निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं सौंपा तो विधान सभा का सत्र नहीं चलने दिया जाएगा।
इंडियन नेशनल लीग के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि जिस तरह तेज बारिश और पुलिस के दबाव के बावजूद अवाम ने हिस्सेदारी की उससे साफ हो गया है कि मुसलमान और इंसाफ पसंद अवाम अब आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को छोड़ने के वादे से मुकरने वाली सपा सरकार को सबक सिखाने के लिए तैयार हो गयी है।
सुमन
लो क सं घ र्ष !

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20-aug-mulyam
संसदीय चुनाव की मंडी में राम को पेश कर दिया गया है और राम के बहाने सपा भाजपा अपना खेल प्रारंभ कर दिए हैं और वोट का आधार सांप्रदायिक आधार बनाने का कार्य प्रारंभ हो चुका है यह दोनों दल काफी पहले राम की मर्यादा को वोटों की मंडी में बेच चुके हैं और उसका लाभ भी उठाया है.
यात्रा की इजाजत के बहाने लिए ही विश्व हिंदू परिषद के सबसे बड़े नेता अशोक सिंघल के नेतृत्व में साधु संतों ने 17 अगस्त को मुलायम सिंह से मुलाकात की थी. अखिलेश यादव भी उस बैठक में मौजूद थे,वहीँ पर प्रदेश को आगामी संसदीय चुनाव की दृष्टि से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की योजना शुरू हो गयी थी. विश्व हिन्दू परिषद् आरएसएस भाजपा के पास उत्तर प्रदेश में कोई मुद्दा नहीं था इसलिए नूराकुश्ती शुरू हुई और एक मुद्दा ८४ परिक्रमा के बहाने पैदा किया गया. भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद् के किसी भी बड़े नेता में ये दम नहीं है कि वह दस किलोमीटर भी पैदल चल सके. राम को चुनाव का आधार बना कर दोनों पक्ष अपना अपना काम बनाने के फ़िराक में है.
चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए अशोक सिंघल ने उत्तर प्रदेश सरकार को 10 अगस्त को चिट्ठी भी लिखी थी. इसके हफ्ते भर बाद मुलायम से मुलाकात हुई. मुख्य सवाल यह हैं कि किसी जुलुस प्रदर्शन की अनुमति जिला प्रशासन या मंडल स्तर के अधिकारी देते हैं न कि मुख्यमंत्री व उनका बाप देता है.
चौरासी कोसी यात्रा परम्परागत रूप से चैत्र पूर्णिमा से बैसाख की पूर्णिमा के बीच होती है. उस हिसाब से यह यात्रा 25 अप्रैल से 20 मई के बीच हो चुकी है. ऐसे में विश्व हिंदू परिषद की प्रस्तावित यात्रा से एक नयी परम्परा की शुरुआत होती, जिसे अनुचित मानते हुए राज्य सरकार ने इसे निकालने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. यह सरकार का बहाना है मुख्य बात यह है कि प्रशासनिक अमला जिसकी कोई रीढ़ नही है वह भी इस षड़यंत्र में मेली मददगार है.
आरएसएस के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख राम माधव ने कहा कि प्रदेश सरकार सिर्फ एक वर्ग के वोट के लिए हिंदू धर्म और संस्कृति पर लगातार हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता के नशे में पाबंदी लगाकर बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को कुचलने का काम किया है। संत-महात्माओं को अगर परिक्रमा करने से रोका गया, तो सरकार का सत्तामद चकनाचूर हो जाएगा। आर एस एस का हिन्दू धर्म संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है सिर्फ धर्म के आधार पर जितना भी उपद्रव हो सके करना ही उसका काम है. आर एस एस का राजनितिक चेहरा भाजपा के रूप में मौजूद है तो उसको मुखौटा उतारकर सीधे सीधे राजनीती की बात करनी चाहिए और हिन्दू धर्म व संस्कृति को बदनाम करने का कार्य बंद कर देना चहिये.

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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हमारे गाँव में बहादुर मंगता रहते थे जब खेती के सारे काम निपट जाते थे तब वह एक झोले में कुरता धोती रख कर गाँव से सात-आठ मील दूर जाकर साफ़ सुथरा कुरता धोती पहन लेते थे और माथे पर त्रिकुंड लगा लेते थे। फिर एक अच्छे सधे ज्योतिषी की भूमिका में आ जाते थे और लोगों के हाथ और मष्तिस्क की रेखा को पढ़कर भविष्य बताने का काम करते थे। उनकी भाषा यह होती थी कि सुख भी होगा दुःख भी होगा। विपत्ति आएगी भी नही भी आएगी। बीमार थे और नही भी थे जैसी छद्म शब्दावली का प्रयोग कर अपना धंधा चलाते थे। यह मौसम विज्ञान की पहले की भविष्यवाणी कुछ इसी तरह से होती थी की बरसात होगी, नही भी होगी। छुट पुट बदल छाये रहेंगे नही भी रहेंगे। इसी तरह की सूचनाएं इंटेलिजेंस ब्यूरो किसी भी बम विस्फोट की घटना के बाद जारी करता है कि हमने पहले ही फलां-फलां जगह पर विस्फोट की सूचना सम्बंधित राज्य सरकार को दे दी थी। अगर कोई घटना घट गयी तो कुछ मास्टरमाइंड के नाम मीडिया की हवा में तैर रहे होते हैं, की चर्चा शुरू हो जाती है। कुछ जेलों में बंद मुसलमान नवयुवकों के नाम आने लगते हैं कि उसने अपने बयान में ऐसा कहा था और फिर कुछ लोगों को पकड़ कर बंद कर दिया जाता है और अदालतें अपने तरीके से न्याय करने लगती हैं और बम विस्फोटों की श्रंखला में कोई कमी नहीं होती है। गुजरात के एक एनकाउंटर की सीबी
आई द्वारा जांच होने पर आई बी स्वयं ही अपराधी घोषित हो जाती है और उसके तत्कालीन गुजरात प्रमुख राजेंद्र कुमार अभियुक्त नजर आने लगते हैं। ए के 47 जैसे आर्म्स की फर्जी बरामदगी का आरोप उन पर आ गया और फिर इंटेलिजेंस ब्यूरो का रुदन प्रारंभ होता है कि किसी तरीके से हमको बचाओ। केन्द्रीय गृह सचिव से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय उनके अपराधों को बचाने के लिए अपने रण कौशल का इस्तेमाल करने लगते हैं।
बाराबंकी जनपद में अपराध संख्या 295/2013 अंतर्गत धारा 120 बी, 302 आईपीसी थाना कोतवाली में आई बी भी अभियुक्त है। अगर इस केस की जांच भी सीबीआई जांच कर ली गयी तो इंटेलिजेंस ब्यूरो का पूरा का पूरा ढांचा सुसंगठित गिरोह के रूप में नजर आएगा.
आज जरूरत इस बात की है कि चाहे बौध गया के मंदिर विस्फोट का मामला हो या संसद हमला इस में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दुवत्व वादियों और इंटेलिजेंस ब्यूरो के नापाक गठजोड़ का हाथ है। एनडीए सरकार बनने के बाद आईबी व हिन्दुवात्व वादियों के गठजोड़ की जितनी भी कारगुजारियां है उनकी जांच करने की आवश्यकता है। अगर यह जांचे नही की जाती हैं तो फर्जी आतंकवाद के बादल भारतीय आकाश में तैरते रहेंगे तो कभी पुणे में तो कभी बौध गया में तो कभी दिल्ली में छुट पुट बरसते ही रहेंगे।
नकली बरसाते करवाने से बजट बढ़ता है, पूछ बढती है, आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन होते हैं और अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हित साधन पूरे होते हैं।

सुमन
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Indian opposition leader Advani lays flower wreath at mausoleum of Jinnah in Karachi
पाकिस्तान में कहा जाता है कि सिन्धु नदी के स्नान से बेवफाई आ जाती है। लाल कृष्ण अडवानी जब पाकिस्तान यात्रा पर गए तो शायद सिन्धु स्नान कर लिया था, तभी उनको जिन्ना याद आने लगे थे लेकिन अब सिन्धु स्नान का असर कम हो रहा है और भारतीय राजनीति में समन्वय वादी नेता के रूप में अपनी छवि स्थापित करना चाहते हैं। बाबरी मस्जिद ध्वंस के नायक और देश में साम्प्रदायिकता की लहर चलाने वाले अडवानी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं इसी लिए नागपुर मुख्यालय की छुपी हुई रणनीति के तहत गुजरात नरसंहार के नायक नरेन्द्र मोदी का नाम प्रधानमन्त्री पद के लिए उछाला गया है जिससे एनडीए के घटक दलों को यह सन्देश जाए कि यदि नरसंहारी प्रधानमंत्री नही चाहते हो तो उनसे कम अडवानी को प्रधानमंत्री का दावेदार मान लो इसी रणनीति के तहत शिवसेना जैसी उग्र हिन्दुवात्वादी पार्टी भी नरेन्द्र मोदी का विरोध कर रही है और अंत में अडवानी को नागपुर मुख्यालय प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाना चाहता है लेकिन सबसे बड़ा खतरा यह है की अडवानी ने अगर पुन: सिन्धु स्नान कर लिया तो देश के साथ कितना वफ़ा करेंगे। इन हिंदुत्व वादियों का इतिहास रहा है मुंह में राम बगल में छुरी।

सुमन
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देश के राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणव मुख़र्जी का नाम हेलीकाप्टर घोटाले में आया है। अगस्ता वेस्टलैंड से 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की खरीद में रक्षा मंत्रालय की सफाई से यूपीए सरकार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। अब तक इस मामले में कांग्रेस और यूपीए एनडीए सरकार पर आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ रही थी लेकिन गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने 3546 करोड़ रुपये की इस डील की जो फैक्टशीट जारी की है उसके मुताबिक सौदे पर मुहर सन् 2005 में लगी जब प्रणव मुखर्जी रक्षा मंत्री हुआ करते थे। डील के फाइनल होने के समय एसपी त्यागी एयर चीफ मार्शल, पूर्व आईपीएस अधिकारी व एसपीजी के मुखिया बीवी वांचू और एमके नारायणन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे।
एनडीए सरकार से लेकर यूपीए सरकार घोटालेबाजों की सरकार रही है। करोडो-करोड़ रुपये के घोटाले हुए हैं और किसी भी घोटाले का न्यायिक विचारण फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं हो रहा है। व्यक्तिगत अपराधों की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स में होती है लेकिन बड़े-बड़े घोटालों का विचारण फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट्स में नहीं होता है। इस घोटाले में राहुल गाँधी के परम मित्र कनिष्क सिंह का भी नाम आया है। इसके अतिरिक्त यह राजनेता राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाखो-लाख करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाते रहते हैं जो घोटाले ही होते हैं। पूर्व वित्त मंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री व वर्तमान देश के राष्ट्रपति महामहिम के सम्बन्ध में जनचर्चा के अनुसार धीरू भाई अम्बानी को लाभ पहुँचाने के लिए देश के बजट की नीतियाँ उन्ही अनुरूप तय होती थी जिससे अम्बानी ग्रुप को फायदा हो।
देश के अन्दर अब स्तिथि यह हो गयी है कि कोई भी खरीद अगर होती है तो उसमें घोटाला जरूर होता है। जैसे सरकारी नौकरियों में कोई भी भर्ती होती है तो उसमें भी बगैर घोटाले के भर्ती संभव ही नहीं हो पाती है। राजनेता व राज्य की मशीनरी भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी हुई है कुछ दिन शोर-शराबा होता है और फिर सब खामोश। अधिकारी व राजनेता दण्डित नहीं हो पाते हैं। सफेदपोश अपराधियों को दण्डित करने के लिए लचर कानूनी व्यवस्था भी है।

सुमन
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कभी नहीं, जो लोग सांप्रदायिक आधार पर प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी को पदासीन देखना चाहते हैं। उनको इस देश की सीमाओं की जानकारी नही है। गुजरात में जो नरसंहार हुआ है, उसके बाद भी अगर कोई इस धर्म निरपेक्ष भारत में यह सोचता है कि उग्र हिन्दुवत्व का प्रतीक नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हो जायेगा तो यह उनका दिवा स्वप्न है। मोदी को विकास पुरुष का प्रमाणपत्र टाटा और अम्बानी सहित बड़े-बड़े उद्योगपति दे रहे हैं। उनके द्वारा स्थापित मीडिया नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष की छवि बनाने में लगा हुआ है। गुजरात में खेत मजदूरों, किसानो, फैक्ट्री मजदूरों की हालत बाद से बदतर होती जा रही है। मल्टी नेशनल भारतीय कंपनियों को जो रियायतें दी जा रही हैं। श्रम कानूनों का गला घोटा जा रहा है। उससे आम जनता वाकिफ है और अगर गुजरात का यह तबका मोदी के समर्थन में होता तो गुजरात में अधिकांश सीटें मोदी को मिली होती। भारतीय जनता पार्टी कुछ प्रदेशों की ही पार्टी है। सम्पूर्ण भारत में उसकी कोई पकड़ नहीं है। इनके नेतागण आपस में नित्य लड़ते झगड़ते रहते हैं। भ्रष्टाचार में इनके नेतागण उसी तरीके से लिप्त हैं जिस तरह से कांग्रेस के नेतागण। बंगारू लक्ष्मण से लेकर नितिन गडकरी तक यह लोग बड़े बेइज्जत होकर राजनीति के गलियारे से वापस गए हैं। जर्मन नाजीवादी विचारधारा से लैस इस पार्टी को कभी भी बहुमत नहीं मिलना है। दुनिया की साम्राज्यवादी ताकतों के प्रतिनिधि यूरोपियन यूनियन या अमरीका चाहे जितनी कोशिश करे कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाएँ लेकिन बन नहीं पाएंगे। विदेशी ताकतें मोदी के लिए लोबिंग शुरू कर दी है। इस सम्बन्ध में इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि 7 जनवरी को दिल्ली में जर्मन राजदूत एम. स्टेनर के घर पर यूरोपियन यूनियन के देशों के राजदूत नरेंद्र मोदी से लंच पर मिले थे। इसके 15 दिन पहले ही मोदी लगातार चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। लंच के दौरान राजदूतों ने 2002 के दंगों के बारे में सरकार की कथित निष्क्रियता को लेकर मोदी से सवाल भी किए। बकौल स्टेनर मोदी ने उन लोगों को भरोसा दिलाया कि गुजरात में अब कभी दंगे नहीं होंगे। जर्मन राजदूत ने यह भी कहा कि मोदी भारतीय राजनीति में बड़ी हस्ती हैं। इस मीटिंग के दौरान मोदी ने राजदूतों को धैर्य के साथ सुना और गवर्नेंस के अपने मॉडल के बारे में बताया।
आर्थिक विकास का मोदी माडल मात्र इतना है कि उद्योगपतियों को हर संभव मदद करके उनके मुनाफे को लाखो गुना बढ़ने में मदद करना है। दंगे, फसाद कराकर आप भारतीय जनमानस का दिल नही जीत सकते हैं जब तक मजदूरों किसानो के सम्बन्ध में आपके पास सोच होगी तो देश का विकास होना संभव नही है। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। खेत मजदूर, बुनकर, शिल्पकार भुखमरी के रास्ते पर हैं। कारखानों में काम के घंटे 8 से ज्यादा बढ़ा दिए गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के पास इन तबको के बारे में कोई सोच नहीं है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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